
गाड़ी बेचते समय भूलकर भी न करिएगा ऐसी गलती, हादसा या अपराध हुआ तो फंस सकते हैं आप
बिना 29 और 30 नंबर फार्म पर ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी किए वाहन सौंपना कानूनी जोखिम है। कई लोग 100 रुपये के स्टाम्प पेपर पर बिक्री का अनुबंध कर वाहन दे देते हैं लेकिन यह दस्तावेज कानूनी रूप से पर्याप्त नहीं होता। यदि उस वाहन से कोई हादसा या अपराध हो जाए तो जिम्मेदारी पुराने वाहन मालिक की बन जाती है।
यदि आप अपनी कार या बाइक बेचने का मूड बना रहे हैं तो भूलकर भी ऐसी गलती न करिएगा। अक्सर ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जहां वाहन विक्रेता अपने वाहन बेच तो देते हैं लेकिन खरीदार ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी करने में देरी करते हैं। इस बीच यदि उस वाहन से कोई हादसा या अपराध हो जाए तो जिम्मेदारी पुराने वाहन मालिक की बन जाती है। क्योंकि कागजों में वाहन अभी भी उसके नाम पर दर्ज रहता है।

दिल्ली में हाल ही में हुए बम ब्लास्ट ने इस भय को और गहरा कर दिया है। जांच में खुलासा हुआ कि ब्लास्ट में इस्तेमाल वाहन चार बार बिक चुका था मगर आरटीओ में कभी ट्रांसफर नहीं हुआ। इस घटना के बाद गोरखपुर के वाहन विक्रेताओं में भी चिंता बढ़ी है। यहां भी कई ऐसे मामले हैं जहां विक्रेता ने वाहन तो बेच दिया लेकिन खरीदार ने नामांतरण नहीं कराया और बाद में हादसे की स्थिति में पुराने मालिक को पुलिस और अदालतों का चक्कर लगाना पड़ा।
आरटीओ विभाग के अनुसार, बिना 29 और 30 नंबर फार्म पर ट्रांसफर प्रक्रिया पूर्ण किए वाहन सौंपना कानूनी जोखिम है। कई लोग 100 रुपये के स्टाम्प पेपर पर बिक्री का अनुबंध कर वाहन दे देते हैं लेकिन यह दस्तावेज कानूनी रूप से पर्याप्त नहीं होता।
कोर्ट में जाने के बाद ही ऐसे मामले सुलझते है। ऐसा ही एक मामला दो साल पहले सामने आया था जब एक महिला द्वारा खरीदी गई कार से दुर्घटना में तीन लोगों की मौत हो गई। वाहन विक्रेता ट्रांसफर न होने का सबूत पेश नहीं कर सका और पुलिस ने उसी पर मुकदमा दर्ज कर लिया।
क्या बोले आरटीओ अधिकारी
गोरखपुर के एआरटीओ प्रशासन अरुण कुमान ने वाहन स्वामियों से अपील की है कि वे वाहन बेचते समय नियमों का पालन करें। नामांतरण, बीमा, टैक्स और पॉल्यूशन सर्टिफिकेट को अद्यतन रखकर ही वाहन सौंपें। अब ऐसे मामलों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी, ताकि भविष्य में कोई विक्रेता कानून के फंदे में न फंसे।



