दोनों पक्षों की सहमति से सील वुजूखाना का फटा कपड़ा बदलेगा, कोर्ट ने डीएम को दिया आदेश
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सील वुजूखाना का फटा कपड़ा बदलवाने को लेकर हिंदू पक्ष की ओर से मांगी गई अनुमति को वाराणसी कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

ज्ञानवापी स्थित सील वुजूखाना के ताले के फटे कपड़े बदलने के मामले की शुक्रवार को जिला जज संजीव शुक्ला की अदालत ने सुनवाई की। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा, सुप्रीम कोर्ट ने डीएम को वुजूखाना की सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी सौंपी है। इसलिए डीएम दोनों पक्षों की सहमति लेकर कपड़ा बदलने का निर्णय ले सकते हैं। इससे पूर्व प्रशासन प्रार्थना पत्र नॉटप्रेस करे और सभी पक्ष डीएम के समक्ष अपील करें। शासकीय अधिवक्ता ने इसके लिए समय मांगा। कोर्ट ने सुनवाई के लिए अगली तिथि 29 अक्तूबर नियत की है।
सुनवाई के दौरान अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से अधिवक्ता मुमताज, मो. रईस अहमद अंसारी एवं मो. अखलाख ने कहा कि 16 मई 2022 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वुजूखाना को सिर्फ ताला लगाकर कपड़े से सील किया गया है। इस सम्बंध अंजुमन के अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रति भी सौंपी। जिला जज ने आदेश का अवलोकन करने के बाद कहा कि इसमें सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही डीएम को वुजूखाना में सामने आये शिवलिंग जैसी आकृति को संरक्षित और सुरक्षित करने का आदेश दिया है। इसलिए आदेश के अनुपालन का दायित्व डीएम का है। इस अर्जी का यहां कोई औचित्य नहीं है। डीएम सभी पक्षों की सहमति लेकर उनकी मौजूदगी में वुजूखाना के ताला का कपड़ा बदल सकते हैं। हालांकि इससे पूर्व दाखिल अर्जी को नॉटप्रेस करना होगा।
विशेष शासकीय अधिवक्ता राजेश मिश्र ने इसके लिए कोर्ट से समय मांगा। कहा कि इस विषय पर आगे की कार्रवाई के लिए डीएम से बात करनी जरूरी होगी। गौरतलब है कि 8 अगस्त को जिला प्रशासन की और से विशेष शासकीय अधिवक्ता ने एक प्रार्थना पत्र देकर सील वुजूखाने पर लगे ताले के जर्जर कपड़े को बदलने की अनुमति मांगी है। जिस पर सुनवाई चल रही है।
अन्य अर्जियों के संबंध में जानकारी ली
उधर, ज्ञानवापी-शृंगार गौरी केस में दाखिल अन्य अर्जियों के सम्बंध में अदालत ने सम्बंधित अधिवक्ताओं से केस की जानकारी ली। अनुष्का तिवारी की ओर से 1991 के मूल वाद को एफटीसी से अपनी अदालत में ट्रांसफर करने की अर्जी पर सुनवाई के लिए पहली नवम्बर की तिथि लगाई है।
सील वुजूखाने का मामला
मई 2022 को तत्कालीन सिविल जज सीनियर डिविजन रवि कुमार दिवाकर ने एक प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए ज्ञानवापी परिसर का कोर्ट कमीशन की कार्रवाई का आदेश दिया था। कोर्ट कमीशन की कार्रवाई में वुजूखाना के अंदर शिवलिंग जैसी आकृति सामने आने पर उसे संरक्षित करने के लिए हिन्दू पक्ष ने अपील की। सक्षम कोर्ट ने 16 मई को प्रशासन को सील कर अपने संरक्षण में लेने का आदेश दिया। जिसके खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्हें वहां से भी राहत नहीं मिली। उच्चतम न्यायालय ने निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा। तबसे वुजूखाना को ताला लगाकर सील कर दिया गया है। उसकी सुरक्षा सीआरपीएफ कर रही है।

लेखक के बारे में
Dinesh Rathourदिनेश राठौर लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पिछले आठ सालों से काम कर रहे हैं। वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। कानपुर यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है। पत्रकारिता में 13 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश की डिजिटल मीडिया और प्रिंट जर्नलिज्म में अलग पहचान है। इससे पहले लंबे समय तक प्रिंट में डेस्क पर भी काम किया है। कुछ सालों तक ब्यूरो में भी रहे हैं। यूपी और राजस्थान के सीकर जिले में भी पत्रकारिता कर चुके हैं। यूपी की राजनीति के साथ सोशल, क्राइम की खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाते हैं। वायरल वीडियो की फैक्ट चेकिंग में दिनेश को महारत हासिल है।
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