लंबी सेवा के बाद सिर्फ तकनीकी आधार पर बर्खास्तगी अनुचित, हाईकोर्ट ने रद्द किए सरकार के सभी आदेश

Dinesh Rathour प्रयागराज, विधि संवाददाता
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि लंबी सेवा के बाद शिक्षकों को सिर्फ तकनीकी आधार बताकर सेवा समाप्त करना अनुचित है। कोर्ट ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के कई आदेशों को अवैध ठहराते हुए निरस्त कर दिया।

लंबी सेवा के बाद सिर्फ तकनीकी आधार पर बर्खास्तगी अनुचित, हाईकोर्ट ने रद्द किए सरकार के सभी आदेश

Allahabad Highcourt: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि लंबी सेवा के बाद शिक्षकों को सिर्फ तकनीकी आधार बताकर सेवा समाप्त करना अनुचित है। कोर्ट ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के कई आदेशों को अवैध ठहराते हुए निरस्त कर दिया और शिक्षकों को सभी लाभ देने का निर्देश दिया। कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने यह आदेश दिया।

गौतमबुद्ध नगर स्थित राम सिंह विश्व चैतन्य कन्या जूनियर हाईस्कूल में वर्ष 2006 में दो सहायक शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। बाद में विद्यालय को अनुदान सूची में शामिल किया गया, लेकिन इन शिक्षकों को लंबे समय तक वेतन नहीं मिला। 2014 में शासनादेश के बाद वेतन भुगतान की प्रक्रिया शुरू हुई। 2018 में क्षेत्रीय अनुमोदन समिति ने नियुक्तियों को सही मानते हुए वेतन देने का आदेश दिया लेकिन बाद में 2025 में अधिकारियों ने नियुक्ति को अवैध बताते हुए सेवा समाप्त करने का आदेश दे दिया।

2018 में सक्षम प्राधिकारी द्वारा मिल चुका है अनुमोदन

शिक्षकों ने कोर्ट में दलील दी किउनकी नियुक्ति पूरी तरह नियमों के अनुसार हुई थी। 2018 में सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदन मिल चुका है। उन्हें बिना सुनवाई के सेवा से रोका गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने पहले ही केवल वेतन विवाद तक सीमित जांच का निर्देश दिया था। जबकि राज्य सरकार का कहना था कि नियुक्ति विज्ञापन में न्यूनतम योग्यता का उल्लेख नहीं था। 2006 में बीएड योग्यता मान्य नहीं थी। इसलिए नियुक्तियां नियमों के विरुद्ध थीं।

शिक्षकों को बिना सुनवाई सेवा से हटाना न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन

हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि अधिकारियों ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर नियुक्ति की वैधता पर दोबारा फैसला किया है। 2018 में नियुक्ति को सही मानकर आदेश दिया जा चुका था, इसलिए इसे दोबारा नहीं खोला जा सकता। शिक्षकों को बिना सुनवाई के सेवा से हटाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। शिक्षक करीब 19 वर्षों से कार्यरत हैं, ऐसे में केवल तकनीकी आधार पर सेवा समाप्त करना गलत है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति को आसानी से रद्द नहीं किया जा सकता। यदि कोई धोखाधड़ी नहीं है, तो कर्मचारियों के हितों की रक्षा जरूरी है। कोर्ट ने 26 अगस्त 2025, 30.अगस्त 2025, एक सितंबर 2025 और आठ सितंबर 2025 के सभी आदेश रद्द कर दिए और शिक्षकों को सेवा जारी रखने और सभी वेतन व अन्य लाभ देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि लंबे समय तक सेवा करने के बाद केवल तकनीकी आपत्तियों के आधार पर नियुक्ति रद्द करना न्यायसंगत नहीं है।

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Dinesh Rathour

लेखक के बारे में

Dinesh Rathour

दिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका (डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।

पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी है।

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