
बिजली चोरी और घर-घर छापेमारी के लिए 'डिजिटल' हथियार; विजलेंस को मिला GPS का साथ
यूपी में बिजली चोरी रोकने और घर-घर आधी रात के बाद छापेमारी के लिए विभाग को नया डिजिटल हथियार मिल गया है। विजिलेंस टीम और विभागीय जांच दल को अत्याधुनिक GPS युक्त 'बॉडी वॉर्न कैमरों' (Body Worn Cameras) से लैस करने का फैसला लिया है।
उत्तर प्रदेश में बिजली चोरी रोकने के लिए चलाए जा रहे अभियानों में अब 'हाई-टेक' मोड देखने को मिलेगा। विभाग ने अपनी विजिलेंस टीम और विभागीय जांच दल को अत्याधुनिक GPS युक्त 'बॉडी वॉर्न कैमरों' (Body Worn Cameras) से लैस करने का फैसला लिया है। पिछले दो वर्षों से चल रही लंबी कवायद के बाद आखिरकार इन उपकरणों को हरी झंडी मिल गई है। यह कदम न केवल छापेमारी की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करेगा, बल्कि जांच टीम पर लगने वाले भ्रष्टाचार और उत्पीड़न के आरोपों पर भी लगाम लगाएगा। पिछले कुछ समय से आधी रात के बाद भी बिजली चोरों के खिलाफ घर-घर छापेमारी और अभियान चलाया जा रहा है। इसे लेकर आरोप-प्रत्यारोप भी लग रहे हैं।
भ्रष्टाचार और उत्पीड़न पर लगेगा 'जीपीएस' का पहरा
अक्सर बिजली विभाग की छापेमारी के दौरान उपभोक्ताओं और विजिलेंस टीम के बीच विवाद की खबरें आती रहती हैं। छोटे उपभोक्ताओं द्वारा यह आरोप लगाया जाता रहा है कि जांच के नाम पर उन्हें प्रताड़ित किया जाता है या उनसे अवैध वसूली की कोशिश की जाती है। वहीं, बड़े बकायेदारों और औद्योगिक इकाइयों के मामलों में विजिलेंस टीम पर साठ-गांठ कर कार्रवाई को हल्का करने के आरोप भी लगते रहे हैं।
अब बॉडी वॉर्न कैमरा लगने से छापेमारी की हर गतिविधि की लाइव रिकॉर्डिंग होगी। इसमें लगे जीपीएस (GPS) के जरिए मुख्यालय को यह पता रहेगा कि टीम किस समय, किस स्थान पर मौजूद है और वहां क्या कार्रवाई हो रही है।
पारदर्शिता के साथ बढ़ेगा राजस्व
उत्तर प्रदेश में बिजली चोरी एक विकराल समस्या है। आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में हर साल लगभग 5,000 करोड़ रुपये की बिजली चोरी होती है, जिसका सीधा असर विभाग की आर्थिक स्थिति और ईमानदार उपभोक्ताओं के टैरिफ पर पड़ता है। नई तकनीक के आने से साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करना नामुमकिन होगा, जिससे अदालती मामलों में भी विभाग का पक्ष मजबूत होगा और चोरी करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।
उपभोक्ता परिषद ने फैसले का किया स्वागत
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस फैसले का पुरजोर स्वागत किया है। उन्होंने कहा, "यह मांग पिछले दो साल से लंबित थी। जीपीएस युक्त कैमरों के इस्तेमाल से विजिलेंस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी। इससे न केवल विभाग की छवि सुधरेगी, बल्कि आम उपभोक्ताओं का उत्पीड़न भी रुकेगा। अब किसी भी कार्रवाई का डिजिटल प्रमाण उपलब्ध होगा, जिससे गलत आरोपों की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।"
माना जा रहा है कि विद्युत विभाग का यह 'डिजिटल हथियार' आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश में बिजली वितरण प्रणाली को बेहतर बनाने और चोरी मुक्त प्रदेश के लक्ष्य को प्राप्त करने में मील का पत्थर साबित होगा।
प्रमुख विशेषताएं और लाभ:
लाइव निगरानी: अधिकारी दफ्तर में बैठकर छापेमारी का सीधा प्रसारण देख सकेंगे।
साक्ष्यों की सुरक्षा: कैमरे में रिकॉर्डेड वीडियो को मिटाया नहीं जा सकेगा, जिससे साक्ष्य सुरक्षित रहेंगे।
झूठे आरोपों से बचाव: अक्सर हंगामे के दौरान टीम पर लगने वाले मारपीट के झूठे आरोपों से भी बचाव होगा।
अनुशासन: फील्ड पर तैनात कर्मचारियों और अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।

लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव हिन्दुस्तान में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर हैं।
और पढ़ें



