
ठंड से श्वास, अस्थमा, एलर्जी से मरीज बढ़े
Deoria News - देवरिया, निज संवाददाता। मौसम में बदलाव के साथ ठंड और धुंध से लोगों की
देवरिया, निज संवाददाता। मौसम में बदलाव के साथ ठंड और धुंध से लोगों की सेहत पर असर पड़ रहा है। थोड़ी सी लापरवाही श्वास, अस्थमा व एलर्जी से ग्रसित लोगों पर भारी पड़ रही है। इसकी वजह से उनकी दिक्कत बढ़ जा रही है। नाक से ठंडी हवा के अंदर जाने से श्वास की परेशानी बढ़ा दे रही है। वहीं निमोनिया की समस्या भी हो रही है। मेडिकल कॉलेज में श्वास से संबंधित बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या इन दिनों बढ़ी है। डॉक्टर मरीजों को दवा देने के साथ ठंड से बचने के साथ सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
मौसम बदला है। सुबह और शाम ठंड है। ठंडी हवा लोगों की मुश्किल बढ़ा दे रही है। साथ ही धुंध के कारण श्वास के मरीजों की दिक्कत बढ़ जा रही है। इस समय जरा सी अनदेखी से लोगों की सेहत बिगड़ रही है। श्वास, अस्थमा, सीओपीडी के मरीजों को परेशानी हो रही है। ठंडी हवा के नाक और कान से होकर अंदर जाने से पुराने मरीजों की परेशानी बढ़ जा रही है। एलर्जी के ग्रसित लोग भी चपेट में आ रहे हैं। सर्दी, जुकाम, आंख में खुजली, नाक से पानी और छींक से लोग पीड़ित हो जा रहे हैं। वहीं इलाज में लापरवाही से निमोनिया से लोग पीड़ित हो जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग में मरीजों भीड़ बढ़ी है। सोमवार को करीब 150 इलाज हुआ। तीमारदार श्वास से पीड़ित मरीजों को लेकर पहुंचे थे। इसमें श्वास, अस्थमा, सीओपीडी से पीड़ित करीब 80 से 90 मरीज रहे। एलर्जी के 20 से 25 व निमोनिया से पीड़ित 8 से 9 मरीज रहे। पल्मोनरी मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डॉ. अनुराग शुक्ला का कहना है कि इस मौसम में आरएसबी वायरस पनपता है। सुबह धुंध व ठंडी हवा नाक व कान से अंदर जाने से फेफड़ की नली सिकुड़ जाती है। इससे श्वास, अस्थमा व सीओपीडी के मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है। उन्हें श्वास लेने में परेशानी होने लगती है। वहीं एलर्जी के लोगों को भी दिक्कत होती है। इस बीमारियों से ग्रसित अधिक मरीज आ रहे हैं। इलाज में लापरवाही से वायरल निमोनिया होने की संभावना रहती है। शुगर, गंभीर रोग से पीड़ित व बुजुर्गों को सतर्क रहने की जरूरत है। लापरवाही से निमोनिया व टीबी होने का खतरा रहता है। सुबह व देर शाम घर से न निकलें, गर्म कपड़ा पहन कर रहना चाहिए। श्वास, अस्थमा, एलर्जी के मरीज को नाक, कान, ढकना व मास्क लगाना चाहिए। पौष्टिक व संतुलित आहार को सेवन करें, गुनगुना पानी पिएं, अधिक तेल, मसाला, घी के सेवन से परहेज करना चाहिए। नियमित दवा व इन्हेलर लेने की जरूरत है। ठंड से बचाव के लिए सावधानी बरती जरूरी है। कोई परेशानी होने पर विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क कर इलाज कराना चाहिए। मेडिकल कॉलेज में रही भीड़, इलाज के लिए करना पड़ा इंतजार मेडिकल कॉलेज में रविवार के अवकाश के बाद मरीज उमड़े। करीब 2400 से अधिक लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया, वहीं फालोअप में भी मरीज पहुंचे थे। आर्थों में भीड़ अधिक रही। यहां करीब 630 मरीजों का इलाज हुआ। इसमें ज्वाइंट पेन, नस, सर्वाइकल, हड्डी रोग के मरीज अधिक रहे। मेडिसिन में लंबी कतार रही। यहां करीब 410 से अधिक मरीज पहुंचे थे। चेस्टपेन की शिकायत लेकर करीब 10 व पैरलासिस के लक्षण के चार मरीज पहुंचे थे। इसके अलावा बुखार, पेट व सिर दर्द, बीपी, शुगर के मरीज रहे। पल्मोनरी मेडिसिन में भी लाइन रही। श्वास, एलर्जी, अस्थमा के अधिक मरीज रहे। यहां 150 से अधिक मरीजों का इलाज हुआ। ईएनटी में करीब 195 से अधिक मरीज पहुंचे थे। इसमें कान में खुजली, दर्द, सनसनाहट, कम सुनाई देने से पीड़ित मरीज रहे। स्किन में कतार लंबी रही। करीब 255 मरीजों का इलाज हुआ। इसमें दिनाय, खुजली, दाने निकलने के पीड़ित मरीज अधिक रहे। सर्जरी में भी भीड़ रही। यहां 130 मरीजों का उपचार हुआ। इसमें हेड इंजरी, हार्निया, पथरी सहित अन्य मरीज रहे। नेत्र रोग में करीब 150 मरीजों का इलाज हुआ। इसमें आंख में खुजली, पानी आने, दर्द, चुभन, लालीपन व मोतियाबिंद से पीड़ित रहे। बाल रोग में करीब 130 से अधिक मरीज रहे। इसमें श्वास, बुखार, सर्दी, खांसी से पीड़ित अधिक रहे। दंत में 97, मानसिक रोग में 140 मरीज पहुंचे थे। डिजिटल एक्स-रे सेंटर पर सुबह से लम्बी कतार रही। करीब 170 से अधिक मरीजों की जांच हुई। मरीजों व तीमारदारों को इंतजार करना पड़ा, जिससे दिक्कत हुई। पीपी सेंटर में शिफ्ट हुआ एआरटी सेंटर - मेडिकल कॉलेज के पुराने भवन में स्थित एआरटी सेंटर को सोमवार को महिला अस्पताल के पुराने भवन के प्रसोत्तर केंद्र में स्थापित किया गया। एआरटी सेंटर में एचआईवी मरीजों की काउंसलिंग, इलाज के अलावा वायरल लोड, सीडी फोर जांच और दवा वितरण होता है।

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