
बौर आते ही आम के बाग की बढ़ाएं निगरानी-प्रो. रवि प्रकाश
Deoria News - सलेमपुर में किसान गोष्ठी में प्रो. रवि प्रकाश मौर्य ने आम की बौर आने के समय की महत्ता बताई। फरवरी-मार्च में कीट और रोगों का प्रकोप बढ़ता है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है। उन्होंने किसानों को नियमित निगरानी और उचित प्रबंधन की सलाह दी, ताकि गुणवत्तापूर्ण आम की फसल सुनिश्चित की जा सके।
सलेमपुर(देवरिया), हिन्दुस्तान टीम। आम की बेहतर पैदावार के लिए बौर आने का समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। फरवरी-मार्च के दौरान यदि किसान बाग की समय पर देखभाल कर लें तो उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। इस अवधि में मौसम में बदलाव के कारण कीट व रोगों का प्रकोप बढ़ जाता है, जिससे बौर और फलन प्रभावित होने की आशंका रहती है। रविवार को किसान गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए प्रसार्ड ट्रस्ट मल्हनी के निदेशक प्रो. रवि प्रकाश मौर्य ने कहा। उन्होंने बताया कि बौर निकलते समय आम के बागों में पाउडरी मिल्ड्यू (खर्रा/दहिया), गुझिया कीट, भुनगा, पुष्पगुच्छ मिज और बौर झुलसा रोग का खतरा सबसे अधिक रहता है।
ऐसे में किसानों को बाग की नियमित निगरानी कर समय रहते उचित प्रबंधन करना चाहिए। उन्होंने बताया कि खर्रा रोग एक फफूंदजनित रोग है, जिसके लक्षण बौर, नई पत्तियों व पुष्पक्रम पर सफेद पाउडर के रूप में दिखाई देते हैं। इससे फूल झड़ने लगते हैं। इसके नियंत्रण के लिए घुलनशील गंधक 2 ग्राम प्रति लीटर पानी या हेक्साकोनाजोल 1 मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना लाभकारी है। गुझिया कीट जनवरी से मार्च के बीच जमीन से निकलकर पेड़ों पर चढ़ता है और बौर व पत्तियों का रस चूसकर नुकसान पहुंचाता है। इसके प्रबंधन के लिए कार्बोसल्फान 25 ईसी 2 मिली प्रति लीटर पानी में छिड़काव करें। भुनगा कीट आम का एक खतरनाक कीट है, जो बौर, कोमल पत्तियों व फलों को नष्ट कर देता है। यह चिपचिपा पदार्थ छोड़ता है, जिस पर काली फफूंदी लग जाती है। इसके नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 1 मिली प्रति 3 लीटर पानी में, साथ में स्टिकर मिलाकर छिड़काव करें। पुष्पगुच्छ मिज के प्रकोप से बौर के डंठल और पत्तियों पर काले-भूरे धब्बे दिखाई देते हैं, जिससे पुष्पगुच्छ सूख सकते हैं। इसके लिए डायमेथोएट 2 मिली प्रति लीटर या बाइफ्रेंथ्रीन 0.7 मिली प्रति लीटर पानी में, स्टिकर के साथ छिड़काव करने की सलाह दी गई है। बौर झुलसा रोग अधिक नमी व आर्द्रता में फैलता है, जिससे फूल व छोटे फल झड़ने लगते हैं। इसके नियंत्रण के लिए मेन्कोजेब व कार्बेन्डाजिम के 0.2 प्रतिशत घोल (2 ग्राम प्रति लीटर पानी) का छिड़काव करें। प्रो. रवि प्रकाश मौर्य ने किसानों से अपील की कि बौर आने के इस अहम समय में बागों की सतत निगरानी कर समय पर उपचार अपनाएं, जिससे आम की फसल से बेहतर और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन सुनिश्चित किया जा सके।

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