
पूर्वांचल की भूमि साहित्य के लिए है बड़ी ऊर्वरा- डॉ. रामदेव
Deoria News - देवरिया में नागरी प्रचारिणी सभा के सभागार में पं. हर्षधर द्विवेदी स्मृति संवाद एवं पुस्तक लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। दुर्गा पाण्डेय ने अपने पिता की पुस्तक 'अश्वत्थ की छांव' का लोकार्पण किया।...
देवरिया, निज संवाददाता। नागरी प्रचारिणी सभा के सभागार में पं. हर्षधर द्विवेदी स्मृति संवाद एवं पुस्तक लोकार्पण समारोह का आयोजन रविवार को किया गया। महाराजा अग्रसेन इण्टर कॉलेज की पूर्व प्रवक्ता व सभा की पूर्व अध्यक्ष दुर्गा पाण्डेय द्वारा अपने पिता स्व. श्रीहर्षधर द्विवेदी के पुष्पांजलि स्वरुप लिखी पुस्तक अश्वत्थ की छांव का लोकार्पण किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. रामदेव शुक्ल ने कहा कि पूर्वांचल की भूमि साहित्य के लिए बड़ी ऊर्वरा है। पं. हर्षधर का लगाया बिरवा अश्वत्थ की तरह आज चारों ओर फैल रहा है। दुर्गा पाण्डेय दूसरी पुस्तक नहीं होगी तीसरी भी निकलेगी। विशिष्ट अतिथि आचार्य जयप्रकाश नारायण द्विवेदी ने कहा कि अश्वत्थ की छांव को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है।

एक जो बाहर दिखाई देता है और दूसरा जो जमीन के अन्दर फैला है। इस तरह पं. हर्षधर ब्रह्म स्वरूप है। इसमें दुर्गा पाण्डेय ने उन सभी लोगों को याद किया है जो उनसे जुड़े हुए थे। प्रो. सुधाकर तिवारी ने भी संबोधित किया। डॉ. दिवाकर प्रसाद तिवारी ने पुस्तक की समीक्षा की। कहा कि किताब पढ़ने पर लगता है कोई कहानी पढ़ी जा रही है। दुर्गा पाण्डेय ने अपने पिता के बारीक से बारीक स्वभाव को लिखने में सफलता पाई है। आचार्य परमेश्वर जोशी ने कहा पं. हर्षधर एक उत्कृष्ट और निर्भीक वक्ता, कुशल पत्रकार थे, जिसका चित्रण पुस्तक में गहरी अनुभूति के साथ किया गया है। अध्यक्षता कर रहे डॉ. जयनाथ मणि त्रिपाठी ने अतिथियों आभार व्यक्त किया। इससे पहले मां वाणी के चित्र पर अतिथियों ने माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। पुस्तक की लेखिका दुर्गा पाण्डेय ने अतिथियों का स्वागत किया और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। वाणी वन्दना नित्यानंद आनन्द और स्वागत गीत सौदागर सिंह ने सुनाया। संचालन डॉ. अभय कुमार द्विवेदी ने किया। इस दौरान गोपालजी त्रिपाठी, बृद्धिचन्द्र विश्वकर्मा, रमेश तिवारी, विजय प्रसाद, प्रेम कुमार अग्रवाल, हृदय नारायण जायसवाल, ऋषिकेश मिश्र, अजय मिश्र, खुशबू अरोड़ा, प्रीति पाण्डेय, कृति त्रिपाठी, करन मणि पुण्यदेव मणि, वरुण पाण्डेय आदि मौजूद रहे। राष्ट्र गान के साथ समारोह के समापन की घोषणा की गई। नागरी काव्य गोष्ठी एवं पुस्तक लोकार्पण नागरी प्रचारिणी सभा के तत्वावधान में द्वितीय रविवारीय कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें कवियों ने अपनी रचना सुनाकर वाहवाही बटोरी। वहीं बाल कानी संग्रह चन्द्रयान और काव्य संग्रह निश्चेत सीता पुस्तक का विमोचन किया गया। इसका शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि के बाद गीतकार महेश सिंह दीपक के प्रस्तुत वाणी वन्दना से हुआ। भोजपुरी गीतकार नित्यानंद आनन्द ने होठवा गुलाबी लागे बिंदिया लिलारे हो... गीत सुनाया। कवयित्री कीर्ति त्रिपाठी ने मां जीवन पथ में उजियारा करने के लिए काटती थी...तथा लखनऊ से आए कृष्ण कुमार सरल ने ज्ञान की ज्योति से दूर तम हो गया... सुनाकर वाहवाही बटोरी। इसी बीच आर्यावर्ती सरोज आर्या की बाल कहानी संग्रह चन्द्रयान और काव्य संग्रह निश्चेत सीता का विमोचन दयाशंकर कुशवाहा, डॉ. अनिल कुमार त्रिपाठी, कृष्ण कुमार सरल, अध्यक्ष डॉ. जयनाथ मणि त्रिपाठी ने किया। महीने के कवि के रूप में रामेश्वर तिवारी को सभा के मंत्री द्वारा सम्मानित किया गया। इसी क्रम में विकास तिवारी विक्की, गोरखपुर से आईं वन्दना मिश्रा, रमेश सिंह दीपक, पार्वती देवी, रामेश्वर तिवारी राजन, पुष्कर तिवारी, लालता प्रसाद चौधरी, कौशल किशोर मणि, क्षमा श्रीवास्तव, योगेन्द्र तिवारी योगी, रंजीता श्रीवास्तव, प्रार्थना राय, रविनंदन सैनी, राममनोहर मिश्र, गोपाल जी त्रिपाठी, छेदी प्रसाद गुप्त विवश ने भी अपनी रचना प्रस्तुतएं सुनाई। अध्यक्षता गीतकार दयाशंकर कुशवाहा व संचालन गीतकार सौदागर सिंह ने किया। मंत्री डॉ. अनिल कुमार त्रिपाठी ने आभार व्यक्त किया।

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