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44 डिग्री तापमान में जनजीवन बेहाल, फसलों को बचाना बनी चुनौती

देवरिया, निज संवाददाता। पखवाड़े भर से 43-44 डिग्री तापमान रहने से आदमी से लेकर...

44 डिग्री तापमान में जनजीवन बेहाल, फसलों को बचाना बनी चुनौती
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हिन्दुस्तान टीम,देवरियाWed, 19 Jun 2024 02:00 PM
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देवरिया, निज संवाददाता। पखवाड़े भर से 43-44 डिग्री तापमान रहने से आदमी से लेकर पशु-पक्षी तक बेहाल हैं, वहीं इस मौसम में धान की नर्सरी व सब्जी की फसलों को बचाना किसानों के लिए चुनौती बन गया है। प्रचंड गर्मी ने धान की नर्सरी और सब्जी की फसलों की सिंचाई का खर्च बढ़ा दिया है। वहीं गर्मी के चलते सब्जी का पैदावार घट गया है, इससे सब्जी का दाम भी बढ़ने लगा है। बरसात होने में विलंब के चलते खरीफ फसलों की खेती पिछड़ जायेगी।
एक महीने से अधिक समय से तीखी धूप व भीषण गर्मी का कहर जारी है। दिन-रात उमस भरी गर्मी से लोग बेहाल हो गये हैं। शहर से लेकर गांव तक आदमी से लेकर पशु-पक्षी तक गर्मी की मार से त्रस्त हैं। पखवाड़े भर से तापमान 40 डिग्री से उपर चल रहा है। लगभग हर रोज 43-44 डिग्री तापमान होने के चलते उमस भरी गर्मी से लोग परेशान रहे। प्रचंड गर्मी के चलते कूलर, पंखा भी राहत देने में बहुत काम नहीं आ रहा है। इसमें भी बार-बार बिजली की कटौती दाद में खाज का काम कर रहा है। कड़क धूप व बीच-बीच में लू के थपेड़ों के चलते धान की नर्सरी व सब्जी आदि की फसलों को बचाये रखना किसानों के लिए चुनौती बन गया है। गर्मी बढ़ने के चलते धान की नर्सरी व सब्जी की फसलों को बचाने के लिए एक दिन बाद सिंचाई करनी पड़ रही है। इससे सिंचाई पर होने वाला खर्च बढ़ गया है। तीखी धूप के चलते फसलों की बढ़वार भी रूक गया है। वहीं सब्जी का पैदावार भी घटने से इसकी महंगाई बढ़ने लगी है। मंगलवार को भी गर्मी का कहर जारी रहा। अधिकतम तापमान 43 डिग्री तथा न्यूनतम 30 डिग्री रहा। इससे दोपहर में धूप से बचने को सिर को गमछा, टोपी, दुपट्टा से ढ़ककर ही निकले। सड़कों पर भीड़ कम रही और मुहल्ले की गलियां सूनी रही। गर्मी का प्रकोप बढ़ने से कूलर, पंखा भी काम नहीं कर रहे हैं। गर्मी से राहत पाने को लोग विभिन्न तरह के ठंडे पेय पदार्थो की मांग बढ़ गयी है। किसानों को मानसून आने में विलंब होने से खरीफ फसलों की खेती पिछड़ने की आशंका सता रही है।

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