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21 नवंबर, 2020|11:21|IST

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कस्तूरबा की बर्खास्त शिक्षिकाओं ने दी विभाग की कार्रवाई को चुनौती

कस्तूरबा की बर्खास्त शिक्षिकाओं ने दी विभाग की कार्रवाई को चुनौती

कस्तूरबा आवासीय बालिका विद्यालयों की बर्खास्त शिक्षिकाओं ने बीएसए कार्यालय की परेशानी बढ़ा दी है। इन शिक्षिकाओं ने बर्खास्तगी के खिलाफ स्थगन आदेश ले लिया है। इससे बीएसए कार्यालय में जिम्मेदारों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखाई देने लगी हैं। कार्यालय के कर्मचारी हाईकोर्ट में काउंटर दाखिल करने की तैयारी में हैं।

जिले के 13 कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में कार्यरत 15 शिक्षकों को फर्जी कागजातों और अभिलेखों में हेरफेर कर नौकरी हथियाने के आधार पर सेवा से बर्खास्त कर दिया था। इनमें एक वार्डेन, आठ पूर्णकालिक, चार अंशकालिक और एक ऊर्दू शिक्षिका शामिल थीं। बर्खास्तगी से पूर्व बीएसए कार्यालय से लेकर राज्य परियोजना तक इनके अभिलेखों की व्यापक जांच पड़ताल की गयी थी। वहीं लार में कार्यरत तत्कालीन वार्डन ऋचा वर्मा को जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर जून में ही बर्खास्त कर दिया गया था। इनके खिलाफ गोरखपुर के एक व्यक्ति की शिकायत पर बीएसए ने जांच कमेटी गठित की थी। कुछ दिन बाद बीएसए के निर्देश पर जिला समन्वयक बालिका शिक्षा ने इन शिक्षकों के खिलाफ सदर कोतवाली में मुकदमा भी दर्ज करा दिया था। बीएसए के इस निर्णय के खिलाफ कई बर्खास्त शिक्षकों ने हाईकोर्ट की शरण ले ली और बीएसए पर बिना सुनवाई किए बर्खास्त कर देने का आरोप लगाते हुए राहत की मांग की।

इन्हें मिला स्टे: अभी तक इस मामले में सात शिक्षकों को हाईकोर्ट से स्टे मिल गया है। इनमें लार में वार्डन रहीं ऋचा वर्मा, गौरीबाजार की पूर्णकालिक शिक्षिका विजया सिंह, भाटपार रानी की पूर्णकालिक शिक्षिका अमृता सिंह, बरहज की पूर्णकालिक शिक्षिका अर्चना, बैतालपुर की पूर्णकालिक शिक्षिका निशा कुमारी, लार की पूर्णकालिक शिक्षिका अनामिका त्रिपाठी, लार के शिक्षक वशिष्ठ कुशवाहा शामिल हैं। बीएसए कार्यालय अब कोर्ट में काउंटर दाखिल कर बचाव करने की तैयारी में हैं। कर्मचारियों को बार-बार हाईकोर्ट का चक्कर काटने की चिंता सता रही है।

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  • Web Title:Kasturba 39 s sacked teachers challenged the department 39 s action