वैज्ञानिक गतिविधियों से जुड़ी संस्थाओं को इसरो बना रहा स्पेस ट्यूटर, जानिए कैसे
Deoria News - भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 5 अगस्त 2022 को 'स्पेस ट्यूटर' पहल शुरू की है, जिसमें 239 संस्थाओं को चयनित किया गया है। उत्तर प्रदेश से 21 संस्थान इस पहल में शामिल हैं। यह कार्यक्रम शैक्षणिक संस्थानों और एनजीओ को अंतरिक्ष विज्ञान में प्रशिक्षण देने की अनुमति देता है।

प्रशान्त मिश्रा गोरखपुर। वैज्ञानिक गतिविधियों से जुड़ी संस्थाओं को इसरो स्पेस ट्यूटर बना रहा है। 5 अगस्त 2022 में इसरो के पूर्व चेयरमैन ए. एस. किरण कुमार द्वारा शुरू की गई इस पहल के तहत देश भर से इसरो के अब तक कुल 239 स्पेस ट्यूटर चयनित किए जा चुके हैं। इस क्रम में उत्तर प्रदेश से सर्वाधिक रुझान दिखा, जहां इसरो के 21 पंजीकृत स्पेस ट्यूटर सूचीबद्ध हैं। इसमें शैक्षणिक संस्थानों, गैर सरकारी संगठनों व तकनीकी कंपनियों व शौकिया वैज्ञानिक समूहों द्वारा आवेदन किया जा सकता है। इसके लिए इसरो की आधिकारिक वेबसाइट पर नए स्पेस ट्यूटर्स के लिए पंजीकरण विंडो उपलब्ध है।भारतीय
अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, इसरो व्यक्तिगत रूप से किसी को ‘ट्यूटर’ बनाने के बजाय संस्थाओं को प्राथमिकता देता है। दरअसल, कई गैर-सरकारी संगठनों या शैक्षणिक संस्थानों ने अपने-अपने ढांचे विकसित किए हैं, जिनमें इच्छुक छात्रों को पंजीकरण कराने और अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के बारे में सीखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इनमें से कई एजेंसियों के पास पुस्तकों और प्रयोगशाला कार्यों से युक्त ‘मॉड्यूल’ हैं, जो नियमित कक्षा पाठ्यक्रम के साथ-साथ चलते हैं। इसके अलावा, डिजिटल सामग्री निर्माता और ऑनलाइन शिक्षक सोशल मीडिया और मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करते हुए कक्षाओं को आभासी बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इनके लिए यह पहल काफी लाभप्रद है।इसरो द्वारा संचालित यह कार्यक्रम शैक्षणिक संस्थानों, गैर सरकारी संगठनों और तकनीकी कंपनियों को आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त भागीदार बनने की अनुमति देता है, जिनमें से कई को सीधे आधिकारिक इसरो स्पेस ट्यूटर पेजपर सूचीबद्ध किया गया है। प्रशिक्षक, इसरो द्वारा अधिकृत सामग्री का उपयोग करते हुए अंतरिक्ष विज्ञान, रोबोटिक्स, कोडिंग और उपग्रह प्रौद्योगिकी में प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। ये कार्यक्रम स्कूली छात्रों को वैज्ञानिक करियर की ओर प्रोत्साहित करने के लिए डिजाइन किए गए हैं। पंजीकृत प्रशिक्षकों को इसरो के संसाधनों तक पहुंच प्राप्त होती है, जिनमें वीडियो, प्रस्तुतियां और इंटरैक्टिव उपकरण शामिल हैं।ऐसे करना होगा आवेदनइच्छुक एनजीओ या संस्थान निर्धारित प्रारूप के अनुसार https://www.isro.gov.in/spacetutor.html पर विवरण भरकर सीबीपीओ को भेज सकते हैं, जिसमें संस्थान की प्रोफाइल और एसटीईएम गतिविधियों में भागीदारी की योजना शामिल होगी। इसरो इन प्रस्तावों का मूल्यांकन करेगा और पात्रता के आधार पर चयन करेगा। चयनित संस्थानों के साथ इसरो एमओयू कर उन्हें पंजीकृत ‘स्पेस ट्यूटर’ बनाता है। मंडल से अब तक तीन पंजीकृत हो चुकी हैं साथ ही नए आवेदन भी किए गए हैं।इसरो द्वारा संचालित इस कार्यक्रम को खासकर ग्रामीण परिवेश में और भी अधिक प्रभावी तौर पर लागू किया जाए, तो यह आने वाले वर्षों में अंतरिक्ष विशेषज्ञों की अगली पीढ़ी तैयार करने में एक और सशक्त भूमिका निभा सकता है। साथ ही, इसरो को समय-समय पर इसकी प्रभावी निगरानी भी सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि कोई इसरो के नाम का गलत या भ्रामक उपयोग न किया जा सके।अमर पाल सिंह, खगोलविद, वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला, गोरखपुर
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