इमरजेंसी रजिस्टर से खुलेगी एंबुलेंस के फर्जी मरीजों की पोल
Deoria News - देवरिया में एंबुलेंस से फर्जी मरीजों को ढोने का मामला उजागर हुआ है। एंबुलेंस कर्मियों पर सुबह 10 बजे से पहले 3-4 केस दिखाने का दबाव है। शासन ने मरीजों के सत्यापन के लिए पत्र भेजा है, लेकिन जांच अभी शुरू नहीं हुई है। फर्जी केसेज मिलने पर रिपोर्ट भेजी जाएगी।

देवरिया, निज संवाददाता। मेडिकल कालेज से लेकर सीएचसी, पीएचसी के इमरजेंसी, ओपीडी तथा एंबुलेंस के रजिस्टर से मिलान से एंबुलेंस से ढ़ोये फर्जी मरीजों की पोल खुलेगी। एंबुलेंस व इमरजेंसी के रजिस्टर में मरीजों का ब्योरा दर्ज होता है। एंबुलेंस कर्मियों पर सुबह 10 बजे से पहले 3-4 केस का दबाव रहता है। जिससे एंबुलेंस कर्मी आशा व परिचितों का नंबर डालकर फर्जी मरीज दिखाते हैं। हालांकि मरीजों के सत्यापन को महानिदेशक के पत्र के दो सप्ताह बाद भी जांच शुरू नहीं की गयी है। बीमारों,घायलों को समय से अस्पताल पहुंचाने को जिले में 108 के 38, 102 के 32 तथा एएलएस के 5 एंबुलेंस चलते हैं।
वह 24 घंटे अस्पताल पहुंचाने को तैयार रहते हैं। इसका संचालन निजी कंपनी करती है। 108 एंबुलेंस को एक मरीज पर 33 सौ व 102 के प्रति मरीज पर 700 रूपये कंपनी को भुगतान होता है। प्रत्येक एंबुलेंस पर ईएमटी व पायलट होते हैं। कंपनी के अधिकारियों का ईएमटी व पायलट पर अधिकाधिक केस का दबाव रहता है। सुबह 10 से पहले 3-4 केस दर्ज कराने को दबाव डालते है। एंबुलेंस कर्मी आशा या किसी परिचित के मोबाइल नंबर पर फर्जी केस दिखाने को मजबूर होते हैं। एंबुलेंस में उपलब्ध सुविधाओं, फर्जी केस आदि की जांच को सीएमओ आफिस में नोडल अधिकारी हैं। बावजूद इसके एंबुलेंस सेवाओं में फर्जी, भ्रामक ट्रिपों, केसेज की शिकायत पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवायें, लखनऊ के महानिदेशक डा. रतन पाल सिंह सुमन ने एंबुलेंस से ढ़ोये मरीजों की जांच करने को सीएमओ को 9 जनवरी को पत्र भेजा है। लेकिन पत्र के दो सप्ताह बाद भी इसकी जांच शुरू नहीं की गयी है। --- शासन से एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाये मरीजों का सत्यापन को पत्र आया है। 26 जनवरी के बाद एंबुलेंस में उपलब्ध सुविधाओं, मरीजों का सत्यापन उनके नाम, मोबाइल नंबर तथा रजिस्टर में दर्ज ब्योरे से की जायेगी। फर्जी केसेज मिलने पर शासन को रिपोर्ट भेजी जायेगी। डा. अनिल कुमार गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, देवरिया
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