कम राशन कार्ड वाली दुकानों का होगा विलय, शासन ने 500 से कम राशन कार्ड वाली दुकानों का मांगा ब्योरा
भारत सरकार ने 500 से कम राशन कार्ड वाली उचित दर दुकानों के विलय की योजना बनाई है। यह कदम आर्थिक रूप से अलाभकारी दुकानों को समाप्त करने के लिए उठाया जा रहा है। जिले में कुल 1456 सस्ते गल्ले की दुकानें हैं, जिनमें से आधी दुकानों के खत्म होने की संभावना है।

देवरिया, निज संवाददाता। पांच सौ से कम राशन कार्ड वाली कोटे की दुकानें समाप्त हो सकती है। इससे कम संख्या वाली दुकानों का अगल-बगल की दुकानों में विलय किया जायेगा। 500 से कम राशन कार्ड वाले दुकानों का आपूर्ति विभाग से ब्योरा मांगा गया है। नए नियम से करीब 50 फीसदी दुकानें खत्म हो सकती हैं। जिले के नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर कुल 1456 सस्ते गल्ले की दुकानें हैं। कोटे की दुकानों से अंत्योदय व पात्र गृहस्थी को राशन दिया जाता है। अंत्योदय कार्ड धारकों की संख्या करीब 1.5 लाख है। पात्र गृहस्थी की संख्या अधिक है। भारत सरकार ने 500 से कम राशन कार्ड वाली उचित दर दुकानों का नजदीकी दुकानों में विलय करने की तैयारी चल रही है।
भारत सरकार ने इस संबंध में खाद्य एवं रसद विभाग को पत्र भेजा है, इसमें 500 से कम राशन कार्डो की संख्या वाली उचित दर दुकानों का पुनर्गठन करने की सलाह दी गई है।प्रमुख सचिव एवं आयुक्त खाद्य एवं रसद ने सभी जिला पूर्ति अधिकारियों को संबंधित दुकानों के विलय, स्थानांतरण, पुनर्गठन करने को ब्योरा मांगा है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के पोर्टलों पर उपलब्ध आंकड़ों में सामने आया है कि बड़ी संख्या में कोटे की दुकानें 500 से कम राशन कार्डों पर चल रही हैं, जिससे वह आर्थिक रूप से अलाभकारी हो गए हैं। जनसंख्या घनत्व, भौगोलिक निकटता और व्यावहारिकता के आधार पर कम कार्ड संख्या वाले उचित मूल्य दुकानों का विलय करने की सलाह दी गई है।
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