ग्राउंड रिपोर्ट :रोज बढ़ रहे सोने चांदी के भाव से रोजी रोटी के संकट में पड़े कारीगर

Jan 23, 2026 09:31 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, देवरिया
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Deoria News - देवरिया में सोने और चांदी के बढ़ते दामों के कारण कारीगरों और दुकानदारों की रोजी-रोटी पर संकट आ गया है। 600 से ज्यादा कारीगरों में चिंता बढ़ गई है, जबकि दुकानदारों ने एडवांस बुकिंग और उधार की प्रथा समाप्त कर दी है। लोग अब आर्टिफिशियल जेवर की ओर बढ़ रहे हैं।

ग्राउंड रिपोर्ट :रोज बढ़ रहे सोने चांदी के भाव से रोजी रोटी के संकट में पड़े कारीगर

देवरिया/सुरौली, हिन्दुस्तान टीम रोज बढ़ रहे सोने चांदी के भाव के कारण इससे जुड़े कारीगर और दुकानदारों की रोजी-रोटी पर संकट आ गया है। जिले के आभूषण कारीगरों की चिंता बढ़ गई है। वहीं इस व्यापार से जुड़े दुकानदार भी संकट के दौर से गुजर रहे हैं। भाव में अचानक आई तेजी से कारीगरों से हाथ थम गए हैं। देवरिया में सोना व चांदी के जेवर बनाने वाले कारीगर की संख्या 600 से अधिक है। इसमें सोना के कारीगर ज्यादा हैं। शहर के आर्यसमाज गली में सैकड़ो छोटी बड़ी कारीगरी की दुकानें हैं जिन दुकानों पर लगातार सोने चांदी के जेवर बनाया करते थे।

भाव का ऐसा ग्रहण लगा है कि आज उन दुकानों पर सन्नाटा पसरा है। कारीगर चिंतित अवस्था में बैठ भविष्य की चर्चाएं कर रहे हैं। यह सभी कारीगर महाजन (होलसेलर) से जुड़े होते । यह सभी कारीगर होलसेल दुकानदारों के आर्डर व आवश्कता के हिसाब से जेवर बनाते हैं। एडवांस बुकिंग हो रही कैंसिल, उधार का सिस्टम खत्म शादियों के लिए दुकानदार व शोरूम एडवांस बुकिंग करते थे लेकिन अब दुकानदारों ने इस सिस्टम को समाप्त कर दिया है। वहीं पहले से बुकिंग को दुकानदारों द्वारा समाप्त किया जा रहा है। गांवों में उधार के जेवर खरीदने की परंपरा रही है जो समाप्त हो रही है। लोग विश्वासनीय दुकानदरों से उधार सोने व चांदी जेवर खरीद लेते थे, और कार्यक्रम बीतने को बाद भुगतान करते थे। अब दुकानदार उधार देने से साफ इंकार कर रहे हैं। आभूषण की जगह अन्य उपहारों का चलन बढ़ा सोने चांदी के व्यापार में रूटीन की बिक्री भी समाप्त हो गई है। शादियों के सीजन में मंडप में देने वाले चढ़ावा में तो लोग कटौती कर ही रहे हैं, उपहार में सोना व चांदी के जेवर देने परंपरा भी बदल रही है। लोग अब शादियों में आभूषण की जगह इलेक्ट्रॉनिक्स या आवश्यकतानुसार अन्य सामान दे अपना परंपरा को निभा रहे हैं। हल्के जेवरों की मांग बढ़ी, बिछिया पायल भी पंहुच से बाहर बढ़ती महंगाई के कारण हल्के जेवरों की मांग बढ़ गई है। ग्राहक हल्के जेवर खरीद कर अपना काम चला रहे हैं। वहीं कारीगरों पर कम से कम वजन के जेवर बनाने का दबाव बन रहा है। दुकानदारों के रूटीन की बिक्री में बिकने वाले पायल और बिछिया के बिक्री पर भी विराम लग गया है। दुकानों पर पायल व बिछिया रोज बिकने वाला आइटम है। महिलाएं पायल व बिछिया हमेशा पहनी रहती हैं। साल छः महीनें में हर घर में पायल व बिछिया की आवश्यकता होती थी, लेकिन चार माह में तीगुने बढ़े चांदी के दामों ने इस पर भी रोक लगा दिया है। पहले पांच छः सौ में मिलने वाली बिछिया अब दो से तीन हजार में मिल रही है। आर्टीफिशियल जेवरों की तरफ बढ़ी रूझान सोने की बढ़ती महंगाई ने आर्टिफिशियल जेवरों के मांग को बढ़ा दिया है। शादियों में चढ़ाए जाने वाले जेवर तो सोने चांदी के ही होते हैं मगर शादियों में शामिल महिलाएं ज्यादातर आर्टिफिशियल जेवर ही पहन रही हैं। आर्टिफिशियल जेवर अच्छे डिजाइन में बिना रिस्क के उपलब्ध हैं। हालांकि सोने व चांदी के बढ़ते भाव ने आर्टिफिशियल जेवरों के दाम में को भी प्रभावित कर दिया है। दो सौ रुपए में मिलने वाले आर्टीफिशियल जेवर करीब 6 सौ में मिल रहे हैं। बोले कारीगर - बढ़ती महंगाई ने कारीगरों के हाथ रोक दिए हैं। बिक्री न होने से महाजनों का आर्डर नहीं मिल रहा है। बस सुबह दुकान खोल रहे हैं और शाम को चले जा रहे हैं। ऐसे ही भाव बढ़ते रहे तो हम लोगों के रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।" दशरथ वर्मा, कारीगर - बढ़ते भाव ने हम कारीगर के भविष्य को अंधकार में डाल दिया। बिक्री न होने से सोने व चांदी के जेवर बनना लगभग बंद हो गया है। हम सभी बहुत परेशान हैं। ऐसे ही भाव बढ़ता रहा तो हम सभी को दूसरी व्यवसाय की तरफ ध्यान पड़ेगा।" मनोज वर्मा, कारीगर बोले कारोबारी - ग्राहक आ रहे हैं और सामान देख कर चले जा रहे हैं। बिक्री कहें तो 70 प्रतिशत तक घट गई है। एडवांस बुकिंग का सिस्टम फेल हो गया है। बिक्री नहीं रहेगी तो रोजगार पर संकट गहरा जाएगा। सबकुछ बिक्री पर ही निर्भर करता है।" जयेश बरनवाल, दुकानदार - बढ़ते भाव ने दुकानदारी को इतना प्रभावित कर दिया है कि पूरे दिन दुकान पर सन्नाटा रह रहा है। यही स्थिति रही तो बहुत सारे कारीगर और दुकानदार इस व्यवसाय को छोड़ देंगे। बढ़ती भाव चिंताजनक और पीड़ादायक भी है। राजकुमार वर्मा, दुकानदार

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