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बढ़ गए हैं हृदयरोग के मामले, चिकित्सक एक भी नहीं

देवरिया, निज संवाददाता। जिले में मौसम बदलते ही हृदयरोग के मामले बढ़ गए हैं।...

बढ़ गए हैं हृदयरोग के मामले, चिकित्सक एक भी नहीं
हिन्दुस्तान टीम,देवरियाMon, 04 Dec 2023 09:00 AM
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देवरिया, निज संवाददाता। जिले में मौसम बदलते ही हृदयरोग के मामले बढ़ गए हैं। इमरजेंसी से लेकर ओपीडी तक प्रतिदिन 20 से 22 मामले हार्ट अटैक से संबंधित आ रहे हैं। पर महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कालेज में हृदयरोग का एक भी चिकित्सक नहीं है। इसके चलते मजबूरी में मेडिकल कालेज के चिकित्सक रोगियों को हायर सेंटर रेफर कर देते हैं।
महर्षि देवरहा बाबा स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालय बनने के साथ ही जिले के लोगों में बेहतर चिकित्सा मिलने की उम्मीदों को पंख लग गए। कालेज की शानदार बिल्डिंग को देखकर लोगों का उत्साह चरम पर पहुंच गया। इसकी कीर्ति पड़ोसी राज्य बिहार तक पहुंच गई। इसका असर यह हुआ गर्मियों के दिनों में मेडिकल कालेज की ओपीडी तीन हजार रोगी प्रतिदिन तक पहुंच गई। सर्दियां बढ़ने पर भी ओपीडी दो हजार के आसपास रहती है। इसमें मेडिसीन विभाग में पांच से आठ सौ तक रोगी आते हैं। इसके चलते तीन कक्ष में चिकित्सक बैठकर रोगियों का परीक्षण करते हैं। ठंड बढ़ने के साथ ही हृदयरोगियों की संख्या भी बढ़ गई है। इमरजेंसी से लेकर ओपीडी तक औसतन 20 से 22 रोगी प्रतिदिन हृदय रोग से पीड़ित होकर चिकित्सा कराने आते हैं। कुछ पक्षाघात के भी रोगी आते हैं। इनका इलाज मेडिसीन विभाग के चिकित्सकों के ही भरोसे है। मेडिकल कालेज में कार्डियोलॉजी का कोई विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है। इसके चलते गंभीर रोगियों की चिकित्सा संभव नहीं हो पाती है।

आईसीयू अभाव में इलाज में होती है दिक्कत

मेडिकल कालेज बनने के बाद भी आईसीयू नहीं बना है। कोई रोगी खासकर हृदय रोगी अगर गंभीर स्थिति में पहुंच गया और आईसीयू की जरुरत पड़ गयी तो मजबूरन हायर रेफर करना पड़ता है। पेशेंट को गोरखपुर मेडिकल कालेज जाने में दो घंटे तक का समय लग जाता है। इससे रोगी के रिकवर होने की संभावन कम हो जाती है। कई बार रोगी के परिजन कई बार घबराहट में शहर के निजी अस्पतालों का रुख कर लेते हैं।

जिला अस्पताल की हृदय रोग इकाई मेडिकल कॉलेज में गायब

मेडिकल कालेज बनने से पहले बाबू मोहन सिंह जिला चिकित्सालय में एक गहन हृदय रोग इकाई (आईसीसीयू) भी बना था। अस्पताल में डॉ. यूडी त्रिपाठी और डॉ. राकेश पांडेय बतौर कार्डियोलॉजिस्ट बारी बारी से तैनात रहे। तब गंभीर हृदय रोगियों को अस्पताल में ही चिकित्सा मिल जाती थी। मेडिकल कालेज बनने की प्रक्रिया में आईसीसीयू का भवन ध्वस्त कर दिया गया। अभी इसके छोटे से भूभाग पर ब्लड सेपरेशन यूनिट लगा दी गई है। अगर आईसीसीयू रहता तो हृदय रोगियों को बेहतर चिकित्सा मिल पाती।

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मेडिकल कालेज में आईसीयू नहीं है। यहां कोई कार्डियोलॉजिस्ट तैनात नहीं है। यहां चिकित्सा के लिए आने वाले हृदय रोगियों का इलाज फिजिशियन करते हैं। इसमें से अधिकांश यहीं पर स्वस्थ हो जाते हैं। गंभीर रोगियों को प्राथमिक चिकित्सा देकर हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है।

डॉ. एचके मिश्र, सीएमएस

महर्षि देवरहा बाबा स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालय।

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