बढ़ता भाव तोड़ रही सोनारी परंपरा, उधार का समाप्त हुआ व्यवहार

Jan 25, 2026 09:20 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, देवरिया
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Deoria News - सोने और चांदी के बढ़ते भाव ने ज्वेलरी व्यापार को संकट में डाल दिया है। अब ग्राहक उधारी पर खरीदारी नहीं कर पा रहे हैं और दुकानदार भी उधारी देने से कतराने लगे हैं। इस कारण बिक्री में 70% तक गिरावट आई है। व्यापारी अब नए विकल्प तलाश रहे हैं क्योंकि व्यापार की स्थिति बेहद चिंताजनक है।

बढ़ता भाव तोड़ रही सोनारी परंपरा, उधार का समाप्त हुआ व्यवहार

देवरिया/ सुरौली, हिन्दुस्तान टीम। सोना चांदी के लगातार बढ़ते भाव ने इस व्यापार के मिजाज को ही बदल दिया है। विश्वास और उधार की पर चलने वाले इस व्यापार की परंपरा को बढ़ते भाव ने बदल कर रख दिया है। अब जितना पैसा उतने की ही खरीदारी हो रही है। एडवांस बुकिंग का सिस्टम समाप्त हो गया है। और तो और ग्राहकों को दिए गए उधार के जोवरों के पैसे पर वसूली पर दुकानदार जोर लगा रहे हैं। बढ़ते भाव ने इस व्यापार को हाशिए पर लाकर खड़ा कर दिया है। इस व्यापार से जुड़े व्यापारी चिंतित हैं और आने वाली पीढियां के लिए नए विकल्प की तलाश में लगे हुए हैं।

अब व्यापारियों को इस परंपरागत व्यवसाय में भविष्य नजर नहीं आ रहा है। नगद की खरीदारी पर मिल रहा जेवर सोने चांदी के जेवरों का व्यापार को उधारी का व्यापार माना जाता था। ग्राहक और व्यापारी दोनों उधारी को अपनाने में कोई परहेज नहीं करते थे। अगर ग्राहक और दुकान के बीच विश्वास बना हुआ है, तो व्यापारी लाखों का जेवर ग्राहक को देने में हिचकते नहीं थे। व्यापारी भी बड़े व्यापारियों से उधार पर सामान लेते थे और बिक्री के बाद भुगतान करते थे। एक तरह से देखा जाय तो इस व्यवसाय का बड़ा हिसा उधारी पर टिका हुआ था, लेकिन बढ़ते भाव ने इस व्यापार के प्रकृति को बदल दिया है। रोज आ रही तेजी ने दुकानदारों के हिसाब को बिगाड़ कर रख दिया है। अब कोई भी दुकानदार ग्राहकों को उधार देने को तैयार नहीं है। वहीं महाजनों (होलसेलर) से दुकानदारों को मिलने वाला उधार भी अब बंद हो गया है। ग्राहकों को अपने बजट के हिसाब से सामान खरीदना पड़ रहा है। उधार दिए गए जेवरों से अब खरीदारी संभव नहीं है। दुकानदारों का पूरा जोर बाजार में दिए गए उधार वसूलने पर लगा हुआ है। कम काम हो लेकिन पूंजी सुरक्षित रहे व्यापारी इस सिद्धांत पर काम कर रहे हैं। तेजी से घट रहा व्यापार, अधिक लग रही पूंजी बढ़ते भाव के चलते खरीदारी करने की क्षमता तो घटी ही है, उधार भी नहीं मिल रहा है। जिन दुकानों से लोग वर्षो से सामान लेते थे, अब वह दुकानदार भी उधारी पर सामान नहीं दे रहे हैं। व्यापारी इसके पीछे होसेलरों से उधार न मिलने का तर्क देकर लोगों को समझा रहे हैं। इसका नतीजा यह हुआ है कि बिक्री में 70% तक गिरावट आई है। इस व्यापार को लेकर व्यापारी समाज चिंतित है। वहीं दुकानों का मेल लगाने के लिए दुकानदारों को अपनी अधिक पूंजी लगानी पड़ रही है। अधिक पूंजी लगाने के बाद भी व्यापार लगातार घट रहा है। सामान्य रूप से महिलाओं के लिए दैनिक इस्तेमाल के जेवर भी पहुंच से दूर हो गए हैं। पांच छः मिलने वाला बिछिया दो तीन हजार व दो हजार रूपए से शुरू होने वाला पायल अब दस हजार से शूरू हो रहा है। इससे रूटीन की भी बिक्री बंद हो गई है। एडवांस बुकिंग का सिस्टम बंद, पैसा जमा करने पर तय हो रहा भाव पहले लोग दुकानों पर कुछ रकम देकर एडवांस में बुकिंग करा लेते थे। इससे सोने, चांदी का दाम बढ़ने पर उन्हें पुराने दाम पर ही सामान मिला जाता था। अगर दाम कम हो गया तो व्यापारी को लाभ हो जाता था। यह व्यवस्था इसलिए चल रही थी कि सोने व चांदी के दाम में बढ़ोत्तरी या गिरावट कम होती थी। थे। भाव स्थिर होने से नफा नुकसान में मामूली अंतर आता था जो व्यापारी आपस में सह लेते थे। लेकिन सोना चांदी के लगातार बढ़ रहे भाव ने व्यापारी हिसाब किताब में भी परिवर्तन ला दिया है। अब होलसेलर छोटे व्यापारियों से पहले पैसा जमा करने के बाद ही भाव तय कर रहे हैं क्योंकि एक दिन में भाव में कई बार परिवर्तन हो रहा है। पहले भाव स्थिर रहता था और एक भाव कई दिनों तक चलता था। अब कोई व्यापारी जोखिम नहीं उठा रहा है। सुरक्षित नहीं है व्यापार, तलाश रहे रोजगार के विकल्प परंपरागत चलने वाले इस व्यापार में व्यापारी स्वयं को सुरक्षित नहीं मान रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि पहले धनवान से गरीब आदमी तक अवसरों पर सोना चांदी खरीदता था, लेकिन बढ़ते दाम ने सोने, चांदी को आम आदमी की पहुंच से दूर कर दिया है। ऐसे में अगली पीढ़ियों को सौंपने वाले इस व्यापार से जुड़े लोग मान रहे हैं कि इसी तरह भाव बढ़ता रहा तो सोना, चांदी सभी की पहुंच से दूर हो जाएगा। ऐसे में अपनी आने वाली पीढियों व स्वयं के लिए भी दूसरे रोजगार का विकल्प तलाश रहे हैं। बोले व्यापारी परंपरागत व्यापार इस व्यापार में भाव के बढ़ोत्तरी ने बहुत कुछ बदल दिया है। पहले भाव तय हो जाता था, पैसा बाद में दिया जाता था लेकिन अब जितना पैसा जमा हो रहा है उतने का ही भाव कट रहा है। उधार व एडवांस की व्यवस्था समाप्त हो रही है। व्यापार मुश्किल दौर से गुजर रहा है। --- आलोक मोदनवाल, सर्राफा व्यवसायी यह व्यापार संकट के दौर गुजर रहा है। बढ़ती मंहगाई में ग्राहक घटते जा रहे हैं। उधार का कारोबार समाप्त हो रहा है। सारा ध्यान उधार वसूली पर है। माल कम बिके, लेकिन अपनी पूंजी सुरक्षित रहे। इस तरह से व्यापार की स्थिति रही तो व्यापार बदलना मजबूरी होगा। --- रमाशंकर वर्मा, सर्राफा व्यवसाई व्यापार में ऐसी स्थिति कभी नहीं आई थी। बढ़ते भाव ने बहुत कुछ बदल रहा है। ग्राहक और दुकानदार एक विश्वास करते थे और उधार नगद सब चलता रहता था। बढ़ते भाव में महाजनों का भी सहयोग नहीं मिल रहा है। एडवांस बुकिग की सिस्टम खत्म हो गया है। -अजय वर्मा, सर्राफा व्यवसाई बढ़ते भाव ने बहुत कुछ बदल दिया है। बिक्री में तेजी से गिरावट आ रही है। रूटीन की बिक्री में बिकने वाले आइटम भी नहीं ब्क रहे हैं। दुकानदारी की स्थिति बहुत खराब है। भविष्य को लेकर चिंता बढ़ रही है। जबतक भाव स्थिर नहीं होता है तक कुछ कहना मुश्किल है। --- राजू वर्मा, सर्राफा व्यवसायी

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