अनियमितता में हिरंदापुर के प्रधान का पावर सीज
Deoria News - देवरिया में ग्राम पंचायत हिरंदापुर के प्रधान श्रीनिवास का पावर सीज कर दिया गया है। मनरेगा में 6 लाख की अनियमितता की शिकायत पर हाईकोर्ट के आदेश के बाद यह कार्रवाई हुई। जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति...

देवरिया, निज संवाददाता। वित्तीय अनियमितता में हिरंदापुर के प्रधान का पावर सीज कर दिया गया है। कृषि रक्षा अधिकारी की जांच में मनरेगा में 6 लाख की अनियमितता मिली थी। कार्रवाई नहीं होने पर शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट में रिट दाखिल किया था। हाई कोर्ट के आदेश पर डीएम ने प्रधान का पावर सीज किया है। इस मामले में फाइनल जांच को तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गयी है। रामपुर कारखाना विकास खण्ड के करनपुर पचफेड़ा निवासी अलकेन्द्र राव ने ग्राम पंचायत हिरंदापुर में विकास के नाम पर मनरेगा कार्यो में बड़े पैमाने पर धांधली करने की शिकायत जिलाधिकारी से किया था।
शिकायत की जांच कर जिला कृषि रक्षा अधिकारी एवं लघु सिचाई विभाग के सहायक अभियंता ने 12 अप्रैल-23 को रिपोर्ट प्रस्तुत किया। इसमें मनरेगा से हुए कार्यो में 5 लाख 94 हजार की अनियमितता पायी गयी। इसके लिए ग्राम प्रधान श्रीनिवास व तकनीकी सहायक कैलाश सिंह दोषी पाये गये। जांच रिपोर्ट के आधार पर ग्राम प्रधान श्रीनिवास के पावर को प्रतिबंधित करते हुए अंतिम जांच को जिला कृषि अधिकारी को नामित किया गया। जांच में दोषी पाये जाने के बाद भी कार्यवाही नहीं होने के खिलाफ अलकेन्द्र राव ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट ने 31 जुलाई को आदेश में स्पष्ट इन्ट्रक्शन दाखिल करने का आदेश दिया। स्पष्ट आख्या उपलब्ध नहीं होने पर जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम के तहत हिरंदापुर के तत्कालीन व वर्तमान ग्राम प्रधान श्रीनिवास के प्रधान पद से संबंधित शक्तियों के प्रयोग एवं कृत्यों के संपादन को प्रतिबंधित कर दिया है। ग्राम प्रधान का पावर सीज होने के बाद ग्राम पंचायत का कार्य निर्वाचित तीन सदस्यों की समिति करेगी। डीएम ने प्रधान पर लगे आरोपों की जांच करने को जिला विकास अधिकारी, उपायुक्त श्रम रोजगार व एं आरईएस के सहायक अभियंता दिनेश केशरवानी की तीन सदस्यीय समिति बनायी है। समिति से दो सप्ताह में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। जिला कृषि अधिकारी ने जांच में दे दिया था क्लीन चिट सहायक अभियंता की जांच में मनरेगा से कराये कार्यो में 6 लाख रूपये की अनियमितता में ग्राम प्रधान का पावर सीज कर दिया गया था। इसकी अंतिम जांच को तत्कालीन जिला कृषि अधिकारी मृत्युंजय कुमार सिंह को नामित किया गया था। 13 सितंबर-24 को उनकी जांच आख्या में प्रधान पर लगाये गये आरोपों की पुष्टि नहीं हुई। इस पर 18 सितंबर-24 को प्रधान का पावर बहाल कर दिया गया। इसके खिलाफ अलकेन्द्र राव हाईकोर्ट में चले गये। कोर्ट ने स्पष्ट इन्ट्रक्शन मांगा, लेकिन तत्कालीन डीएओ मृत्युंजय कुमार सिंह का लखनऊ तबादला होने के चलते आख्या उपलब्ध नहीं हो सका। इसके बाद डीएम ने प्रधान का पावर सीज कर दिया।
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