Deoria News: इमरजेंसी में बेड बढ़े पर नहीं बढ़े स्टाफ, मरीजों को परेशानी

हिन्दुस्तान, देवरिया
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Deoria News: देवरिया के महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर में इमरजेंसी के शिफ्ट होने के बाद मरीजों की संख्या बढ़ गई है, लेकिन स्टाफ की संख्या नहीं बढ़ी है। मरीजों की देखभाल में दिक्कतें आ रही हैं। हालांकि, एक हफ्ते से हर्ट रोग के दवा की कमी भी सामने आई है।

इमरजेंसी में बेड बढ़े पर नहीं बढ़े स्टाफ, मरीजों को परेशानी
इमरजेंसी में बेड बढ़े पर नहीं बढ़े स्टाफ, मरीजों को परेशानी

Deoria News: देवरिया, निज संवाददाता। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर में इमरजेंसी के शिफ्ट होने के बाद बेड बढ़ा दी गई। मरीजों की संख्या में इजाफा हो गया, लेकिन उसके सापेक्ष स्टाफ की संख्या नहीं बढ़ी है। इसकी वजह से मरीजों की देखभाल करने में दिक्कत हो रही है, उनकी वहीं कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज के पुरानी इमरजेंसी में करीब सोलह बेड थे। मरीजों की भीड़ से बेड कम पड़ जा रहे थे। इसको देखते हुए ट्रामा सेंटर का निर्माण कराया गया और उसमें इमरजेंसी को शिफ्ट किया गया। यहां हर रोज चौबीस घंटे में करीब 400 मरीज आते हैं। इसमें करीब तीन सौ मरीजों का ओपीडी में इलाज होता है, जबकि करीब 100 मरीजों को भर्ती करना पड़ता है। यहां मरीजों के लिए अत्याधुनिक बेड सहित अन्य इंतजाम किए गए। बेड की संख्या बढ़ कर 30 हो गई है। बेड भरे रहते हैं, लेकिन हर शिफ्ट में स्टाफ नर्स व एमपीडब्लू बढ़ने के बजाए उतनी ही तैनाती है।

स्टाफ कमी के कारण दिक्कतें

एक शिफ्ट में करीब छह स्टाफ नर्स की तैनाती होती है, इसमें भी एक कागजी कार्य में रहते हैं या फिर एक की छुट्टी रहती है। साथ ही छह एमपीडब्लू की ड्यूटी रहती है, जबकि हर शिफ्ट में कम से कम दस स्टाफ नर्स और इतने ही एमपीडब्लू की ड्यूटी की जरूरत महसूस की जा रही है। कर्मचारियों की कमी के कारण मरीजों की देखभाल में दिक्कत होती है, वहीं कोई जरूरत पड़ने पर तीमारदारों को बार-बार उनके पास जाना पड़ता है। रजिस्ट्रेशन, भर्ती बनाने, स्टोर से दवा व अन्य सामग्री लाने सहित अन्य कार्य होते हैं। ऐसे में संख्या कम होने से परेशानी होती है। हालांकि सीमित संसाधन में ही मरीजों को बेहतर सुविधा देने के प्रयास किए जा रहे हैं।

हर्ट रोग के दवा की कमी

मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर इमरजेंसी में हर्ट अटैक के मरीज की जिंदगी बचाने के लिए ब्लड पतला करने के इंजेक्शन की निशुल्क व्यवस्था की गई, जो काफी महंगी आती है। इसका लाभ मरीजों को मिल रहा था। इधर करीब हफ्ता, दस दिन से इंजेक्शन समाप्त हो गई है, जिससे इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। अन्य कुछ दवाओं से किसी तरह काम चलाया जा रहा है। आनन-फानन में मरीजों को रेफर कर दिया जा रहा है।

स्टाफ नर्स की परेशानियाँ

मेडिकल कॉलेज के ट्रामाセン्टर स्थित इमरजेंसी में हर शिफ्ट में स्टाफ नर्स की तैनाती होती है। उनके लिए अब तक चेंजिंग रूम की व्यवस्था नहीं की गई, ताकि वह ड्यूटी आने और समाप्त होने के बाद जाते समय अपना ड्रेस बदल सकें। ऐसे में ड्रेस बदलने में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसको लेकर नाराजगी भी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

✦महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर में कितने मरीज आते हैं?−
यहां हर रोज चौबीस घंटे में करीब 400 मरीज आते हैं।
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