
स्वच्छ एवं हरित कैम्पस के रूप में विकसित किए जाएंगे विद्यालय
संक्षेप: Deoria News - देवरिया में बेसिक शिक्षा विभाग ने 22 पीएम श्री कम्पोजिट विद्यालयों को हर्बल और औषधीय उद्यान विकसित करने के लिए चुना है। यह कदम बच्चों को प्रकृति से जोड़ने और स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने के लिए है। इन विद्यालयों को हरित एवं स्वच्छ कैम्पस के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे बच्चे स्वस्थ जीवन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होंगे।
देवरिया, निज संवाददाता। बच्चों को प्रकृति से जोड़ने तथा आयुर्वेद व औषधीय पौधों के महत्व को समझाने के लिए विद्यालयों को स्वच्छ एवं हरित कैम्पस के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जिले के 22 पीएम श्री कम्पोजिट विद्यालयों को चिन्हित किया गया है, जिसमें हर्बल व औषधीय उद्यान विकसित किया जाएगा। उद्यान के विकसित होने से बच्चे पर्यावरणीय एवं स्वस्थ्य जीवन की दिशा में जागरूक होंगे। जिले के विभिन्न विकास खण्डों में 2121 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इन विद्यालयों में 33 विद्यालयों को पीएम श्री विद्यालय के रूप में चयनित किया गया है। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा चयनित इन विद्यालयों में गुणवत्तापरक शिक्षा, आधुनिक सैक्षणिक सुविधाएं, हरित एवं स्वच्छ परिसर उपलब्ध कराना प्राथमिक है।

वहीं इन विद्यालयों को नवाचार आधारित अधिगम का केन्द्र बनाने का भी उद्देश्य है। जिले में संचालित पीएम श्री विद्यालय पर विशेष फोकस कर उन्हें विकसित बनाया जा रहा है एवं उनमें पढ़ने वाले बच्चों को आधुनिक शिक्षा भी उपलब्ध कराई जा रही है। ऐसे में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जिले के 22 पीएम श्री कम्पोजिट विद्यालयों को हर्बल व औषधीय उद्यान के लिए चयनित किया गया है। इन विद्यालयो को स्वच्छ एवं हरित कैम्पस के रूप में विकसित किया जाएगा। जिससे बच्चे शिक्षा के साथ ही पर्यावरणीय संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता एवं कौशल आधारित शिक्षण से जुड़ सकेंगे। विद्यालयों में 200 से 300 वर्ग मीटर का क्षेत्र उद्यान के लिए चयनित किया जाएगा और उसमें औषधीय पौधे अश्वगंधा, तुलसी, गिलोय, एलोवेरा, नीम, हरड़, आंवला एवं सुगंधित पौधे लेमनग्रास, पुदीना, शतावरी, सिट्रोनेला के साथ ही गेंदा, हल्दी, अदरक, सहजन के पौधे रोपित किए जाएंगे। जबकि पौधों की सुरक्षा के लिए ग्रीन शेड नेट हाऊस एवं उद्यान के चारों तरफ बाड़ की व्यवस्था की जाएगी। उद्यान के लिए बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा प्रति विद्यालय पर करीब 30 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे।

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