आपरेटर और टेक्नीशियन के अभाव में खराब हो रहे वेंटिलेटर

Jan 24, 2026 09:16 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, देवरिया
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Deoria News - महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण जैसे वेंटिलेटर और सीटी स्कैन मशीन टेक्नीशियन की कमी के कारण बंद पड़े हैं। केवल 15 वेंटिलेटर चालू हैं जबकि 105 मौजूद हैं। गंभीर मरीजों को रेफर करना पड़ रहा है और चिकित्सा सुविधाओं का अभाव लोगों को परेशान कर रहा है।

आपरेटर और टेक्नीशियन के अभाव में खराब हो रहे वेंटिलेटर

देवरिया, निज संवाददाता। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में अत्याधुनिक जीवर रक्षक उपकरण आपरेटर और टेक्नीशियन के अभाव में कमरों में बंद पड़े हैं। प्रयोग में न लाने के कारण यह सभी खराब हो रहे हैं। इनमें से मात्र पंद्रह ही क्रियाशील है, जबिक अधिकांश अक्रियाशील हैं। करीब 105 वेंटिलेटर होने के बाद भी अब तक आईसीयू की सुविधा नहीं हो सकी है। इसमें ट्रेंड स्टाफ का न होना भी आड़े आ रहा है। ऐसे में गंभीर मरीजों को रेफर करना पड़ता है। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज की स्थापना 2021 में बाबू मोहन सिंह जिला अस्पताल को उच्चीकृत कर की गई।

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कोविड काल में एमसीएच विंग को मरीजों के लिए अस्पताल बनाया गया था। यहां 20 बेड का आईसीयू, 37 ऑक्सीजनयुक्त बेड सहित करीब सौ बेड थे। ऑक्सीजन कंसंट्रेटर 651 थे। धीरे-धीरे स्थिति सामान्य होने पर एमसीएच विंग में मेडिकल कॉलेज का महिला अस्पताल संचालित होने लगा। इसके बाद मेडिकल कॉलेज के पास करीब 105 वेंटिलेटर हो गए। पंद्रह वेंटिलेटर इस्तेमाल किए जाने लगे, जबिक आपरेटर और टेक्नीशियन के न होने के कारण अन्य वेंटिलेटर को अलग-अलग स्थानों पर कमरों रख दिया गया। मॉक ड्रिल में ही कुछ की क्रियाशीलता परखी गई। प्रयोग में न लाने के कारण अधिकांश खराब हो गए हैं। ऑक्सीजन को सीएचसी, पीएचसी पर भेज दिया गया। मेडिकल कॉलेज में मौजूद करीब 50 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर का भी कम इस्तेमाल होता है। वेंटिलेटर का अब एमएमसी कराया जा रहा है। कुछ विशेषज्ञ डॉक्टरों, वेंटिलेटर आपरेटर व टेक्नीशियन के अलावा दक्ष स्टाफ नर्स की कमी होने के कारण अब तक आईसीयू भी नहीं बन सका है। इसकी वजह से गंभीर मरीजों का इलाज भी नहीं हो रहा है। मरीजों को गोरखपुर मेडिकल रेफर करना पड़ रहा है, जबकि कुछ मरीजों को निजी अस्पतालों की ओर रूख करना पड़ता है, जिससे उन अस्पतालों को चांदी है, जहां अधिक धन खर्च करना पड़ रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शुक्रवार को वीरवट निवासी असलम अंसारी का 13 वर्षीय पुत्र रहमत अंसारी छत से गिर कर गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजन लेकर इंमरजेंसी पहुंचे, जहां जांच कराने के बाद रेफर दिया गया। श्वास की बीमारी से पीड़ित बसडीला के रामदेव 65 को भी आईसीयू न होने से हायर सेंटर भेज दिया गया। परिजनों ने बताया कि सुविधा न होने से गोरखपुर मेडिकल कॉलेज भेजा जा रहा है। यहां सुविधा होती तो आसानी होती। -------- मेडिकल कॉलेज में दो ऑक्सीजन प्लांट खराब कोविड महामारी के समय मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की उपलब्धता के लिए पांच ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए गए थे। इसमें एक हजार एलपीएम क्षमता के तीन प्लांट हैं, जो क्रियाशील हैं, जबकि 500 और 85 एलपीएम का प्लांट खराब पड़ा है। इसके अलावा बीस हजार लीटर क्षमता का एलएमओ प्लांट स्थापित है, लेकिन अभी चालू नहीं हो सका है। ------------ सीएचसी पर बंद हैं ऑक्सीजन प्लांट कोविड के समय में जिले के दो सीएचसी में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किया गया था। इसमें रुद्रपुर में 250 लीटर एलपीएम का प्लांट है, जो मॉक ड्रिल के समय चलता है। वहीं सीएचसी पिपरादौला कदम में 500 एलपीएम का प्लांट बंद रहता है। बिजली रहने पर कभी-कभी चालू का टेस्टिंग होती है। यहां जनरेटर नहीं है। सीएचसी व पीएचसी पर ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भी उपलब्ध हैं, लेकिन प्रयोग नहीं होता है। संसाधन की कमी से इलाज में दिक्कत आती है। -------- सामग्री समाप्त होने से बलगम जांच प्रभावित सीएचसी सलेमपुर में बलगम जांच के लिए सीबी नॉट मशीन लगाई गई। इन दिनों कार्टेज समाप्त होने की वजह से जांच नहीं हो पा रही है, जिससे मरीजों को परेशानी हो रही है। टेक्नीशियन की कमी से बंद है तीन करोड़ की सीटी स्कैन मशीन मेडिकल कॉलेज में करीब तीन करोड़ की लागत से 128 स्लाइस की अत्याधुनिक सीटी स्कैन मशीन स्थापित की गई है, लेकिन टेक्नीशियन की कमी के कारण डेढ़ साल बाद भी शुरू नहीं हो सकी है। इसके चालू होने से ब्रेन, पेट, सीना, गांठ, नस, हार्ट एनजीओ और मांसपेशियों की बारीक जांच संभव होती। स्पेशल जांच के लिए मरीजों को निजी जांच सेंटरों का सहारा नहीं लेना पड़ता। ईईजी जांच न होने से मरीजों को जाना पड़ता है बाहर मेडिकल कॉलेज में दिमाग की जांच के लिए इलेक्ट्रो इंसिफेलोग्राम (ईईजी) मशीन उपलब्ध है, लेकिन टेक्नीशियन की कमी के कारण करीब दो साल बाद भी शुरू नहीं हो सकी है। इस जांच के चालू होने से बच्चों को झटका आने के अलावा मिर्गी के मरीजों के दिमाग की जांच में सहूलियत होगी। टीएमटी जांच न होने से मरीजों को परेशानी मेडिकल कॉलेज में ट्रेड मिल टेस्ट (टीएमटी) मशीन भी करीब एक साल से अधिक समय से टेक्नीशियन के अभाव में बंद पड़ी है। जिन मरीजों का बीपी बढ़ता और घटता है उन्हें हार्ट अटैक व फाजिल की आशंका बढ़ जाती है। वहीं सीढ़ी चढ़ने, तेज पैदल चलने पर सांस फूलने, मेहनत का काम करने पर जल्द थकान हृदय रोग की दिक्कत का प्रारंभिक लक्षण हो सकता है। ईसीजी जांच कराने पर रिपोर्ट नार्मल आने पर इस तरह के मरीजों को टीएमटी जांच की जरूरत होती है, वहीं इको मशीन है, लेकिन जांच नहीं होती है। इन जांचों के शुरू होने से मरीजों को काफी सहूलियत होगी।

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