रोजगार सेवकों को 6 से 8 माह से नहीं मिला मानदेय
Deoria News - देवरिया में रोजगार सेवकों को 6 से 8 माह का मानदेय नहीं मिला है, जिससे उनकी दीवाली और होली फीकी रही। सलेमपुर, गौरी बाजार और पथरदेवा के रोजगार सेवकों का मानदेय बकाया है। कर्मचारियों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। सभी को मार्च में बजट आने पर मानदेय मिलने की उम्मीद है।

देवरिया, निज संवाददाता। जिले में तैनात रोजगार सेवकों को 6 से 8 माह का मानदेय नहीं मिला है। इससे रोजगार सेवकों का दशहरा, दीवाली की तरह होली भी फीकी रही। सलेमपुर ब्लाक का 9 महीना, गौरी बाजार के 11, पथरदेवा के रोजगार सेवकों का 8 माह का मानदेय बकाया है। वहीं ब्लाकों में तैनात एपीओ, टीए, सहायक एकाउंटेंट का भी दो से तीन महीने का वेतन नहीं मिला है। वेतन के अभाव में कर्मचारी आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। मनरेगा योजना का नाम बदल कर वीबी जीरामजी योजना कर दिया गया है। योजना में जिले में कुल 656 रोजगार सेवक तैनात हैं।
उनके द्वारा ग्राम पंचायतों में होने वाले कार्यो की निगरानी व जाब कार्ड धारकों की हाजिरी बनाने की जिम्मेदारी होती है। लेकिन उन्हे पिछले कई सालों से समय से मानदेय नहीं मिलता है। कार्य करने के बाद मानदेय को कई-कई माह तक इंतजार करना पड़ता हे। इससे रोजगार सेवकों को दैनिक खर्च चलाना भी मुश्किल हो जाता है। जिले के सभी विकास खण्डों में तैनात रोजगार सेवकों का मानदेय बकाया है। इसमें सलेमपुर ब्लाक में 9 माह, गौरी बाजार में 11 तथा पथरदेवा ब्लाक के रोजगार सेवकों का 8 माह से मानदेय नहीं मिला है। औसतन 6 से 8 माह का मानदेय बकाया है। समय से मानदेय नहीं मिलने से रोजगार सेवकों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है। बीजी जीरामजी योजना के तहत जिला मुख्यालय से लेकर विकास खण्डों में तैनात एपीओ, टीए, सहायक एकाउंटेंट व आपरेटर आदि का भी मानदेय दो से तीन महीने से नहीं मिला है। योजना का नाम बदलने से भी मानदेय में विलंब हुआ है। सभी को मार्च में बजट आने पर मानदेय मिलने की उम्मीद है।
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