अपने ही बुने जाल में फंसती जा रही हैं बीएसए
Deoria News - देवरिया में शिक्षक कृष्णमोहन की खुदकुशी मामले में बीएसए शालिनी श्रीवास्तव की मुश्किलें बढ़ रही हैं। नए खुलासों से कार्यालय के भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हो रहा है। कृष्णमोहन ने आत्महत्या से पहले बीएसए पर प्रताड़ना का आरोप लगाया था। उनके आवास से बरामद डीवीआर और वायरल आडियो ने बीएसए की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

देवरिया, निज संवाददाता। शिक्षक कृष्णमोहन के खुदकुशी प्रकरण में बीएसए शालिनी श्रीवास्तव की मुश्किलें और भी बढ़ सकतीं हैं। प्रतिदिन नए- नए खुलासे होने से बीएसए कार्यालय के भ्रष्टाचार की गहराई सामने आ रही है। इस मामले में अपने करतूतों को छिपाने के लिए बुने गए जाल में बीएसए फसतीं चलीं जा रहीं हैं। उनके आवास से बरामद हुए डीवीआर ने उनकी मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। वहीं अब वायरल हुआ आडियो कार्यालय के भ्रष्टाचार की पोल खोल रहा है। आडियो को सुनने से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि कार्यालय किस तरह से भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबा था और यहां के अधिकारी लोगों को किस तरह से प्रताड़ित करते थे।
कुशीनगर जिले के कुबेरस्थाना थाना क्षेत्र के हरैया बुजुर्ग के रहने वाले कृष्ण मोहन सिंह जिले के गौरीबाजार विकास खण्ड स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, मदरसन में सहायक अध्यापक थे। वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के यहां रहते थे। 20 फरवरी की रात उन्होने फंदा लगाकर जान दे दी थी। आत्महत्या से पूर्व उन्होने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह समेत अन्य लोगों पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए सुसाइट नोट व वीडियो भी जारी किए थे। जिसके जांच के बाद दोषी मिलीं बीएसए शालिनी श्रीवास्तव को 27 फरवरी को निलंबित कर दिया गया था, जबकि लिपिक संजीव सिंह पहले ही निलंबित हो चुका है। पुलिस की जांच के आंच से बचने के लिए बीएसए शालिनी श्रीवास्तव द्वारा बुने गए जाल में अब वह फंसती हुई नजर आ रही हैं। बीएसए द्वारा कार्यालय के एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से निकलवाया गया डीवीआर पुलिस ने उनके सरकारी आवास से बरामद किया है। इससे यह प्रतित हो रहा है कि बीएसए ने अपने भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए डीवीआर को गायब कराया था, हालांकि कयास लगाया जा रहा है कि आवास छोड़ने से पूर्व वे डीवीआर को अपने साथ ले जाना भूल गईं, जो अब उनके लिए अब मुसीबत बन सकती है। इधर लिपिक व शिक्षक के बात करने का आडियो वायरल होने के बाद बीएसए कार्यालय का भ्रष्टाचार सामने आ रहा है। आडियो सुनने से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस प्रकार से बीएसए कार्यालय का ‘सिस्टम’ कार्य कर रहा था, और लोग उस ‘सिस्टम’ से जूझ रहे थे। संजीव सिंह के पटल पर जमी है सबकी नजर बीएसए कार्यालय के जिस पटल पर लिपिक संजीव सिंह कार्यरत था, उसके निलंबन के बाद यह पटल खाली है। पटल पर अभी तक किसी की तैनाती नहीं हो सकी है। डायट प्राचार्य के बीएसए पद पर अतिरिक्त कार्यभार ग्रहण करने के बाद से रिक्त पटल पर तैनाती को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। सबकी नजर इस पटल पर जमीं हुईं हैं, हालांकि विवाद के कारण इस पटल के लिए कोई नाम नहीं ले रहा है। सूत्रों की मानें तो विवाद के कारण इस पटल पर आने के लिए कोई सिर नहीं उठा रहा है, अगर यह पटल किसी बाबू को मिल भी जाता है तो वे फूंक- फूंक कर ही कार्य करेगा।
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