प्रेम, दया, पीड़ा व प्रगति के कवि थे पाषाण : डॉ. दिवाकर त्रिपाठी
Deoria News - देवरिया में युग द्रष्टा जनवादी कवि ध्रुवदेव मिश्र पाषाण की जयंती पर स्मृति संवाद गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कई साहित्यकारों ने भाग लिया और पाषाण की रचनाओं की महत्ता पर चर्चा की। उन्होंने...
देवरिया, निज संवाददाता। नागरी प्रचारिणी सभागार में मंगलवार को युग द्रष्टा जनवादी कवि ध्रुवदेव मिश्र पाषाण की जयंती पर स्मृति संवाद गोष्ठी व काव्य पाठ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती व विख्यात कवि पाषाण के चित्र पर प्रचारिणी सभा के पूर्व अध्यक्ष आचार्य परमेश्वर जोशी, अध्यक्ष डॉ. जय नाथ मणि त्रिपाठी, मंत्री अनिल त्रिपाठी, साहित्यकार डॉ. सुधाकर त्रिपाठी, पूर्व प्राचार्य डॉ. दिवाकर प्रसाद त्रिपाठी, कवि इंद्रकुमार दीक्षित ने माल्यार्पण व दीप प्रज्वलित कर किया। बतौर मुख्य वक्ता पूर्व प्राचार्य व नागरी प्रचारिणी के उपाध्यक्ष डॉ. दिवाकर प्रसाद तिवारी ने कहा कि जनवादी कवि ध्रुवदेव मिश्र पाषाण प्रेम, दया, पीड़ा व प्रगति के कवि थे।

उन्होंने कहा कि पाषाण की सभी रचनाओं की एक ग्रंथावली प्रकाशित होनी चाहिए। जिससे कि आने वाली पीढ़ी महान कवि के बारे में समझ व जान सके। उन्होंने कहा कि उनको पढ़ा जाना है और पढ़ा जाना भी चाहिए। आचार्य परमेश्वर जोशी ने कहा कि जनवादी, कवि, पाषाण, यह तीनों का समावेश जिनके जीवन में हुआ ऐसे स्मृतिशेष ध्रुवदेव मिश्र अपने सिद्धांतों के पाषाण थे। उन्होंने जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी को अंगीकार कर आजीवन देवरिया की सेवा करते रहे। उनकी शैली बेबाक थी। 1965 में पाषाण ने भटनी से देवरिया आकर मेरे मोहल्ले में रहकर, देवरिया टाइम्स नामक दैनिक अखबार का सम्पादन भी किया। ऐसे महान व्यक्तित्व को मेरा शत शत नमन है। साहित्यकार डॉ. सुधाकर तिवारी ने कहा की कविता अनुपस्थिति की उपस्थिति है। कवि को समझना चाहते हैं तो उसके हृदय व मस्तिष्क के साथ जुड़ना होगा। जनवादी कवि पाषाण नक्सलवादी आंदोलन की उपज थे। उनकी कविताओं को समझने के लिए उस काल में जाना होगा। बंगाल में भी रहकर उनकी कविताओं में देवरिया की माटी की महक है। भोजपुरी के हजारों शब्द उनकी कविताओं में समाहित है। कार्यक्रम को सभा के मंत्री डॉ. अनिल त्रिपाठी, किसान नेता शिवाजी राय, डॉ. चतुरानन ओझा, विश्व भोजपुरी सम्मेलन के जिलाध्यक्ष गिरिजेश मिश्र, भारतीय किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष पवन मिश्रा, डॉ. अचल पुलस्तेय, पवन मिश्र ने संबोधित किया। जबकि कवि सौदागर सिंह, राममनोहर मिश्र, दयाशंकर कुशवाहा, अंजली अरोरा, कृति त्रिपाठी, कौशल किशोर मणि त्रिपाठी, विनोद पांडेय, प्रार्थना राय ने अपनी रचनाओं को प्रस्तुत किया। कवि रमेश सिंह दीपक की वाणी वंदना से गोष्ठी की शुरुआत हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता नागरी प्रचारिणी के अध्यक्ष डॉ. जयनाथ मणि त्रिपाठी व संचालन पूर्व मंत्री इंद्र कुमार दीक्षित ने किया। आयोजक रवींद्रनाथ तिवारी व कवि पाषाण के ज्येष्ठ पुत्र विश्वदेव मिश्र ने सभी अतिथियों के प्रति आभार जताया। इस दौरान प्रचारिणी सभा के पूर्व मंत्री व कवि सरोज पांडेय, सरयू पारीण ब्राम्हण परिषद के अध्यक्ष डॉ. मधुसूदन मणि त्रिपाठी, मंत्री कौशल किशोर मिश्र, विश्व भोजपुरी सम्मेलन के प्रदेश अध्यक्ष सिद्धार्थ मणि त्रिपाठी, डॉ. शकुंतला दीक्षित, कांग्रेस नेता ऋषिकेश मिश्र, इष्टदेव तिवारी, रवि प्रकाश मिश्र छोटे, ज्ञानेश्वर मणि त्रिपाठी, ओंकार पांडेय, पूर्व सभासद सुभाष राय, रमेश सिंह, दीपक, नित्यानंद, राममनोहर, लालसा प्रसाद चौधरी आदि उपस्थित रहे।

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