बजट के अभाव में एनएचएम कार्यक्रमों पर लगा ब्रेक
Deoria News - देवरिया में एनएचएम का बजट नहीं मिलने से स्वास्थ्य विभाग के एक दर्जन राष्ट्रीय कार्यक्रम प्रभावित हो गए हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में बजट शून्य होने से आरबीएसके, अंधता नियंत्रण, कुष्ठ और टीबी उन्मूलन कार्यक्रम ठप हो गए हैं। कर्मचारियों को दो महीने से वेतन नहीं मिला है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
देवरिया, निज संवाददाता एनएचएम का बजट नहीं मिलने से स्वास्थ्य विभाग के एक दर्जन राष्ट्रीय कार्यक्रमों पर ब्रेक लग गया है। साल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में करीब 100 करोड़ का बजट मिलता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 4 माह पहले एनएचएम का बजट शून्य कर दिया गया, जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में बजट नहीं आने से राष्ट्रीय कार्यक्रम ठप हैं। बजट के अभाव में आरबीएसके,अंधता नियंत्रण, कुष्ठ, टीबी उन्मूलन कार्यक्रम प्रभावित हो रहे हैं। वहीं एनएचएम के 1100 कर्मचारियों को दो महीने से वेतन नहीं मिलने से वह आर्थिक तंगी में हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की योजनाओं पर बजट संकट पड़ रहा है।
बजट की कमी के चलते कई महत्वपूर्ण योजनाएं प्रभावित हैं, जिससे स्वास्थ्य कर्मियों के वेतन, केंद्रों के संचालन और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं पर संकट गहरा गया है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं का मुफ्त अल्ट्रासाउंड को ई-वाउचर चार माह तक ठप रहा है। गर्भवती महिलाओं को मजबूरी में निजी जांच केंद्रों पर पैसा देकर अल्ट्रासाउंड करना पड़ा, हालांकि अब फिर से इसे चालू कर दिया गया है। वहीं टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत टीबी मरीजों को मिलने वाली एक हजार रुपये की मासिक पोषण राशि भी छह माह से नहीं मिल रही है। जबकि टीबी मरीजों के शीघ्र सेहतमंद होने को यह सहायता बेहद जरूरी है। एनएचएम के तहत संचालित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों का किराया और बिजली बिल का भुगतान न होने से दिक्कत बढ़ गयी है। वहीं सामानों की आपूर्ति करने वाले ठेकेदारों का भी लाखों रूपया बकाया है। स्वास्थ्य केन्द्रों पर सुई, सिरिंज का संकट टीबी डॉट सेंटर, शहरी व ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों के रखरखाव को हर साल मिलने वाला बजट भी जारी नहीं हुआ है। इससे दवाइयों, जांच सामग्री और बुनियादी सुविधाओं की आपूर्ति बाधित हो रही है। रोगी कल्याण समितियों का बजट भी खत्म हो चुका है। इसके चलते सीएचसी और पीएचसी पर सुई, सिरिंज, बीपी उपकरण, ड्रेसिंग सामग्री का संकट खड़ा हो गया है। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। बोले सीएमओ एनएचएम का बजट नहीं आने से समस्या बढ़ी है। इसके लिए लगातार संपर्क किया जा रहा है। अलग-अलग मदों से पोर्टल के माध्यम से बजट आता है। जैसे ही बजट आयेगा भुगतान किया जायेगा और राष्ट्रीय कार्यक्रमों में तेजी लाई जायेगी। - डा. अनिल कुमार गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधिकारी।
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