दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन; लखनऊ में स्टेशन के लिए मंथन, इन चार में से एक होगा फाइनल

लखनऊ विजय वर्मा
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दिल्ली से वाराणसी बुलेट ट्रेन के लिए लखनऊ में स्टेशन के स्थान पर मंथन शुरू हो गया है। चार स्थान चिह्नित किए गए हैं। इन चार में से एक स्थान पर मुहर लगेगी। इस ट्रेन से दिल्ली से लखनऊ केवल दो घंटे में पहुंचा जा सकेगा।

दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन; लखनऊ में स्टेशन के लिए मंथन, इन चार में से एक होगा फाइनल

दिल्ली-वाराणसी हाईस्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) परियोजना को लेकर राजधानी लखनऊ में तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर में हाईस्पीड रेल स्टेशन के निर्माण के लिए चार संभावित स्थान चिन्हित किए गए हैं, जिनमें कानपुर रोड स्थित शहीद पथ-किसान पथ एक्सप्रेसवे क्षेत्र, वृंदावन योजना (जी-20 ग्राउंड), इकाना स्टेडियम के निकट तथा गोमती रिवरफ्रंट शामिल हैं। इन चारों विकल्पों में से एक स्थान को अंतिम रूप देने के लिए 9 जून को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें लखनऊ विकास प्राधिकरण समेत विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

बैठक में प्रस्तावित स्थलों की कनेक्टिविटी, भूमि अधिग्रहण, निर्माण संबंधी चुनौतियों और शहर पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने इस बात पर विचार किया कि किस स्थान पर स्टेशन निर्माण के दौरान सबसे कम बाधाएं आएंगी और यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सकेगी। सूत्रों के अनुसार अब जल्द ही लखनऊ मेट्रो और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ भी बैठक होगी। इसके बाद स्टेशन के लिए अंतिम स्थान तय किए जाने की संभावना है।

एक्सप्रेसवे और इकाना को मिल रही प्राथमिकता

तैयार डीपीआर के अनुसार शहीद पथ-किसान पथ एक्सप्रेसवे क्षेत्र और इकाना स्टेडियम के आसपास के विकल्प अपेक्षाकृत कम जटिल माने जा रहे हैं। इन स्थानों पर भूमि अधिग्रहण की समस्या सीमित है और निर्माण कार्य से शहर की मौजूदा सड़कों व उपयोगिताओं पर कम असर पड़ने की संभावना है। वहीं वृंदावन योजना में एसजीपीजीआई रोड के नीचे एक किलोमीटर लंबी सुरंग निर्माण की चुनौती है। दूसरी ओर गोमती रिवरफ्रंट विकल्प शहर के प्रमुख ट्रांजिट हब के सबसे करीब होने के बावजूद बड़े पैमाने पर भूमिगत यूटिलिटी शिफ्टिंग और लंबी सुरंग निर्माण की वजह से अधिक जटिल माना जा रहा है।

तैयार हो चुका है एलाइनमेंट, यूपी में बनेंगे कई स्टेशन

दिल्ली-वाराणसी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का एलाइनमेंट लगभग तैयार हो चुका है। प्रस्तावित कॉरिडोर दिल्ली से शुरू होकर नोएडा, जेवर, मथुरा, आगरा, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, रायबरेली, प्रयागराज, भदोही और वाराणसी तक जाएगा। इसके अतिरिक्त लखनऊ से अयोध्या के लिए अलग हाईस्पीड रेल कॉरिडोर प्रस्तावित है, जबकि अयोध्या से प्रयागराज तक भी लाइन विकसित की जाएगी।

डीपीआर के अनुसार मुख्य कॉरिडोर की लंबाई करीब 812 किलोमीटर होगी। लखनऊ से एक शाखा लाइन अयोध्या जाएगी, जबकि दूसरी दिशा में कॉरिडोर रायबरेली, प्रयागराज और भदोही होते हुए वाराणसी तक पहुंचेगा। परियोजना में सभी प्रमुख स्टेशन एलिवेटेड बनाए जाने का प्रस्ताव है।

प्रदेश को मिलेगा हाईस्पीड कनेक्टिविटी का नया नेटवर्क

परियोजना पूरी होने के बाद दिल्ली से पूर्वांचल तक यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। हाईस्पीड रेल नेटवर्क से उत्तर प्रदेश के औद्योगिक, धार्मिक और पर्यटन शहरों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। डीपीआर तैयार होने के बाद अब स्टेशन स्थलों के अंतिम चयन और अन्य औपचारिकताओं की प्रक्रिया तेज हो गई है। यूपी विधानसभा चुनाव से पहले इसका शिलान्यास करने की तैयारी है।

यह है तैयारी

-दिल्ली से वाराणसी तक की कुल लंबाई -लगभग 812 किलोमीटर

-लखनऊ-अयोध्या शाखा लाइन की लंबाई -लगभग 124 किलोमीटर

-प्रस्तावित अधिकतम गति - 350 किमी प्रति घंटा

-संचालन गति-320 किमी प्रति घंटा

-अनुमानित लागत- करीब 2.5 से 3 लाख करोड़ रुपये

-प्रस्तावित स्टेशन-दिल्ली, नोएडा, जेवर, मथुरा, आगरा, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, अयोध्या, रायबरेली, प्रयागराज, भदोही और वाराणसी

-लखनऊ में प्रस्तावित स्टेशन के चार विकल्प, शहीद पथ-किसान पथ एक्सप्रेसवे, वृंदावन योजना (जी-20 ग्राउंड), इकाना स्टेडियम क्षेत्र और गोमती रिवरफ्रंट

-स्टेशन का स्वरूप - अधिकांश स्टेशन एलिवेटेड प्रस्तावित

-विशेषता -लखनऊ से अयोध्या के लिए अलग हाईस्पीड कॉरिडोर

कितने समय में तय होगा सफर

-दिल्ली से लखनऊ- लगभग 2 घंटे

-दिल्ली से वाराणसी - लगभग 3 घंटे 50 मिनट

-दिल्ली से अयोध्या-लगभग 2 घंटे 50 मिनट

-दिल्ली से प्रयागराज -लगभग 3 घंटे 15 मिनट

-लखनऊ से अयोध्या -लगभग 25 से 30 मिनट

-लखनऊ से प्रयागराज-लगभग 55 मिनट

-लखनऊ से वाराणसी -लगभग 1 घंटा 45 मिनट से 2 घंटे

Yogesh Yadav

लेखक के बारे में

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योगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।

पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।

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