
दिल्ली धमाके से 3 दिन पहले छोड़ी पौने 2 लाख सैलरी वाली नौकरी, कौन है डॉ. परवेज?
संक्षेप: दिल्ली में लालकिला के पास हुए कार विस्फोट से ठीक तीन दिन पहले डॉ. परवेज ने विश्वविद्यालय की नौकरी भी छोड़ दी थी। अचानक सात नवंबर को ई-मेल भेजकर त्यागपत्र दे दिया। नौकरी छोड़ने से पूर्व वह आतंकी संगठन जैश के आकाओं से डॉ. शाहीन के साथ भेंट कर चुका था। कई बैठकें दिल्ली और कानपुर में की थीं।
Delhi Red Fort Blast: दिल्ली में 10 नवम्बर 2025 यानी सोमवार की शाम लाल किले के पास हुए कार धमाके की जांच तेज हो गई है। इस मामले में गिरफ्तार डॉ.परवेज, उसकी बहन डॉ.शाहीन और उनके साथियों की जिंदगी की कई परतें अब खुलने लगी हैं। इंटीग्रल विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर पद की पौने दो लाख रुपये महीना की नौकरी छोड़कर डॉ. परवेज अंसारी आतंक की दुनिया में पैर जमा रहा था। वर्ष 2022 से अपनी बहन डॉ. शाहीन के साथ मिलकर इसका ताना-बाना बुन रहा था। दिल्ली में लालकिला के पास हुए कार विस्फोट से ठीक तीन दिन पहले उसने विश्वविद्यालय की नौकरी भी छोड़ दी थी।

खास बात यह कि उसने विश्वविद्यालय प्रबंधन को कोई नोटिस नहीं दिया था। अचानक सात नवंबर को ई-मेल भेजकर त्यागपत्र दे दिया। नौकरी छोड़ने से पूर्व वह आतंकी संगठन जैश के आकाओं से डॉ. शाहीन के साथ भेंट कर चुका था। कई बैठकें दिल्ली और कानपुर में की थीं। इनमें कानपुर से पकड़े गया डॉ. आरिफ मीर, हापुड़ का डॉ. फारुक अहमद, फरीदाबाद से गिरफ्तार डॉ. मुजम्मिल भी शामिल हुआ था। उसकी एक मुलाकात कार में विस्फोट करने वाले उमर से भी हुई थी। इसके बाद सभी ने मिलकर विस्फोट का प्रिंट तैयार किया था। तफ्तीश में लगीं खुफिया एजेंसियों को परवेज के घर से बरामद इलेक्ट्रानिक गैजेट्स से ऐसे साक्ष्य मिले हैं। एजेंसियां अब उन्हीं साक्ष्यों का संकलन कर कड़ी से कड़ी जोड़कर अपनी जांच आगे बढ़ा रही हैं।
शाहीन ने किया था परवेज का माइंडवाश, यूएई भी गया था
खुफिया एजेंसियों के सूत्रों की मानें तो डॉ. शाहीन ने डॉ. परवेज को आतंक की दुनिया का सपना दिखाया था। उसने इसे अल्लाह पाक का रास्ता बताकर कट्टरता का पाठ पढ़ाया था। कई किताबें भी शाहीन ने उसे दी थीं। शाहीन जब वर्ष 2016 से 18 के बीच यूएई में रहकर नौकरी करती थी, उस समय परवेज भी वहां गया था। शाहीन ने वहीं पर उसकी मुलाकात आतंक के हुक्मरानों से कराई थी। इंटीग्रल विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रोफेसर मो. हारिस सिद्दीकी का भी कहना है कि प्रमोशन के बाद वर्ष 2022 से डॉ. परवेज के व्यक्तित्व में बहुत बदलाव आया था। वह किताबें पढ़ता था। वह बच्चों को पढ़ाने में ज्यादा रुचि नहीं लेता था। कई बार छात्रों ने भी कहा था कि परवेज सर कुछ अलग तरह की बातें करते हैं लेकिन इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया।





