
Delhi Blast: डॉ.शाहीन की क्या पहेली? 12 साल पहले अचानक गायब हुई; निजी जिंदगी भी विवादों में रही
कन्नौज से आने के बाद डॉ. शाहीन मार्च 2010 से 2013 तक कानपुर में रही। फिर एक दिन अचानक बगैर कोई जानकारी दिए गायब हो गई। कॉलेज प्रबंधन ने उसका पता लगाने के लिए बहुत प्रयास किया। उसके लखनऊ के पते पर कई पत्र भी भेजे गए। लेकिन एक बार भी किसी पत्र का कोई जवाब नहीं आया।
Delhi Car Blast: फरीदाबाद से गिरफ्तार डॉ. शाहीन शाहिद की पहेली की गुत्थियां एक-एक कर सुलझ रही हैं। डॉ.शाहीन का यूपी के कानपुर से भी कनेक्शन रहा है। वह जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के फार्माकोलॉजी विभाग में सात साल तक प्रोफेसर रही। उसका निजी जीवन भी विवादों में रहा। डॉ.शाहीन का निकाह 1987 बैच के एक डॉक्टर से हुआ था। पता चल रहा है कि उसके बच्चे भी हैं। शौहर से उसका तलाक हो गया था। 12 साल पहले वह कानपुर से अचानक गायब हो गई और कभी नहीं लौटी। इसलिए शासन ने उसे बर्खास्त कर दिया था। वहीं डॉ. शाहीन का नाम ब्लास्ट में आने के बाद कॉलेज प्रशासन में हड़कंप मच गया। कोई इस मामले में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। प्रबंधन से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारियों ने तो फोन तक बंद कर दिए।
आतंकी मॉड्यूल के भंडाफोड़ के बाद गिरफ्तार की गई डॉ. शाहीन अंसारी के बारे में जांच एजेंसियों का दावा है कि डॉ. शाहीन प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की महिला इकाई जमात-उल-मोमिनात का हिस्सा है। उसके जिम्मे भारत में आतंकी संगठन की महिला विंग बनाने का काम था। वह कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के फार्माकोलॉजी विभाग में सात साल तक प्रोफेसर रही। सूत्रों के अनुसार, डॉ. शाहीन का चयन यूपीपीएससी के माध्यम से प्रवक्ता पद पर हुआ था। वह 2006 में मेडिकल कॉलेज के फार्माकोलोजी विभाग में बतौर प्रोफेसर जॉइन किया। सितंबर 2009 में उसका तबादला कन्नौज मेडिकल कॉलेज कर दिया गया था। उस वक्त कन्नौज मेडिकल कॉलेज शुरुआती दिनों में था। डॉ. शाहीन समेत कई डॉक्टर कन्नौज भेजे गए थे। हालांकि मार्च 2010 में वह दोबारा यहां आ गई। सूत्र बताते हैं कि उसका विवाद साथी प्रोफेसर से हुआ था, इसलिए उसका तबादला किया गया था।
2013 में अचानक गायब, तलाशने पर भी न मिली
सूत्र बताते हैं कि कन्नौज से आने के बाद डॉ. शाहीन मार्च 2010 से 2013 तक यहां रही। फिर एक दिन अचानक बगैर कोई जानकारी दिए गायब हो गई। कॉलेज प्रबंधन ने उसका पता लगाने के लिए बहुत प्रयास किया। उसके लखनऊ के पते पर पत्राचार भी किया गया, लेकिन एक बार भी किसी पत्र का कोई जवाब नहीं आया। कॉलेज के साथी प्रोफेसरों ने भी पता लगाने का प्रयास किया पर कोई खबर हाथ न लगी। वह मेडिकल कॉलेज परिसर में आवास नंबर एल-29 में रहती थी।
2020 में शाहीन की आई थी चिट्ठी
सूत्र बताते हैं कि 2013 में अचानक गायब होने के बाद 2020 में उसने कॉलेज और शासन को पत्राचार करके फिर से जॉइन करने की इच्छा जताई। हालांकि उस वक्त भी वह खुद सामने नहीं आई सिर्फ पत्र से ही बात रखी थी। हालांकि सात साल तक गायब रहने समेत तमाम सवालों का जवाब नहीं देने पर 2021 में शासन ने उसे बर्खास्त कर दिया था। सूत्रों के अनुसार, मूलरूप से लखनऊ की रहने वाली डॉ. शाहीन की शुरुआती पढ़ाई वहीं पर हुई। शैक्षिक दस्तावेज में उसकी जन्मतिथि 1979 दर्ज है। उसने हाईस्कूल-इंटर लालबाग गर्ल्स इंटर कॉलेज से किया। इसके बाद मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज प्रयागराज से एमबीबीएस और एमडी फॉर्माकोलॉजी से किया।
साथ काम करने वाले स्तब्ध, चमनगंज में भी रही
डॉ. शाहीन का नाम दिल्ली ब्लास्ट में सामने आने के बाद पूरा कॉलेज हैरान है। खासकर कभी डॉ. शाहीन के साथ काम करने वाले स्तब्ध हैं। किसी को उम्मीद नहीं थी कि वह ऐसे गंभीर प्रकरण में शामिल होगी। फिलहाल कोई कुछ बताने को तैयार नहीं है। शाहीन के स्वभाव के बारे में बताया कि वह अक्सर शांत ही रहती थी। उसकी आदत अक्सर अवकाश पर रहने की थी। कभी बीमारी तो कभी परिवारिक कारणों से अवकाश पर रहती थी। वह चमनगंज इलाके में भी कुछ दिन रही है। चमनगंज का भी पता कॉलेज में दर्ज कराया था। उसके कार्यकाल में मेडिकल कॉलेज से जुड़े एक सूत्र ने कहा कि डॉ. शाहीन शांत लेकिन कठोर स्वभाव की थी। उसे काम के समय में भी मजहबी क्रियाकलाप करते देखा जाता था।
निजी जीवन भी विवादों में रहा
डॉ. शाहीन का निजी जीवन भी विवादों में रहा। 1987 बैच के डॉक्टर से निकाह होने के बाद साल 2012 में तलाक भी हो गया। शाहीन के दो बच्चे होने की बात भी सामने आई है। शाहीन के पूर्व पति मौजूदा समय में फतेहपुर में नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं।





