
सफेद कोट की आड़ में जुटाया मौत का सामान, डॉक्टर लिखी कार में ठिकानों तक पहुंचाया
गिरफ्तार किए डॉ. अदील और डॉ. मुजाहिल से पूछताछ में यह साफ हो गया है कि इन लोगों ने अपने पेशे का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया। डॉक्टर लिखी कार से ही विस्फोटक जुटाया। सभी डॉक्टर आपस में संपर्क में थे। एनसीआर में कई बार मिले भी थे।
डॉ. मुजाहिल उर्फ मुजम्मिल, डॉ. अदील और डॉ. उमर ने सफेद कोट की आड़ में मौत का सामान जुटाया था। इनका आपस में संपर्क था। एनसीआर में कई बार मिले भी थे। तमाम एजेंसियां अब इसकी जानकारी जुटा रही हैं कि बरामद अमोनियम नाइट्रेट को आरोपियों ने किस-किस जगह से और किसकी मदद से खरीदा था।
आरोपियों ने इस सामान को अपनी डॉक्टर लिखी कार में ठिकानों तक पहुंचाया था। इसका इस्तेमाल दिल्ली समेत बाकी जगहों पर कई बम धमाकों के लिए किया जाना था। हालांकि इससे पहले ही मॉड्यूल का खुलासा हो गया और कुछ संदिग्ध आतंकी धरे गए। माना जा रहा है डॉ. उमर ने ही दिल्ली में फिदायीन हमला किया। श्रीनगर में उमर के परिजनों को हिरासत में लेकर पूछताछ जारी है।
दिल्ली धमाके में फरीदाबाद-श्रीनगर मॉड्यूल का हाथ ही बताया जा रहा है। डॉ. मुजाहिल और डॉ. अदील के फरार साथी डॉ. उमर पर विस्फोट करने का शक है। ऐसे में श्रीनगर में पुलिस और जांच एजेंसियों ने डॉ. उमर के परिजनों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। वहीं, गिरफ्तार किए डॉ. अदील और डॉ. मुजाहिल से पूछताछ में साफ हो गया है कि इन लोगों ने अपने पेशे का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया। डॉक्टर लिखी कार से ही विस्फोटक जुटाया। सभी डॉक्टर आपस में संपर्क में थे ।
जहर से बड़ी वारदात करने का था मंसूबा
एजेंसियों ने खुलासा किया तीनों रिसिन नामक रासायनिक जहर बनाने वाले थे, जिसका इस्तेमाल बड़ी वारदात के लिए करना था। इस रासायनिक हथियार का कोई एंटी डोट नहीं है। दूसरी ओर श्रीनगर पुलिस ने फरीदाबाद मॉड्यूल का खुलासा कर श्रीनगर निवासी कुछ डॉक्टरों की गिरफ्तारी की। यहां भी अमोनियम नाइट्रेट से विस्फोटक बनाकर धमाका करने की साजिश की जा रही थी।
श्रीनगर से तेलंगाना तक आतंकियों के जुड़ रहे तार
श्रीनगर से तेलंगाना तक संदिग्ध आतंकियों के तार जुड़ रहे हैं। सभी को सीमा पार से ड्रोन की मदद से हथियार दिए गए थे। दोनों मॉड्यूल को रासायनिक हथियारों से हमले की ट्रेनिंग दी गई थी। दोनों में रिक्रूट और वारदात अंजाम देने के लिए डॉक्टरों का इस्तेमाल किया गया। साफ है कि दोनों मॉड्यूल एक दूसरे से जुड़े हैं। एटीएस ने डॉ. अहमद और आजाद व सुहेल को गिरफ्तार कर बड़ी साजिश का खुलासा किया था।





