काम की बात: 50 हजार तक की साइबर ठगी में बिना केस लौटेगी रकम, नहीं काटने पड़ेंगे चक्कर
गृह मंत्रालय ने जटिलताओं को कम करने को दो मॉड्यूल लागू किए हैं। अब से 50 हजार तक की ठगी में बिना केस रकम लौटेगी। ब्लॉक खाते और मोबाइल को खुलवाने में भी दिक्कतें नहीं आएंगी।

साइबर ठगी की शिकायत पर सबसे पहले उस खाते को ब्लॉक कराया जाता है जिसमें ठगी की रकम जाती है। खाता तो ब्लॉक हो जाता है मगर रकम वापस लेने में पीड़ित के पसीने छूट जाते हैं। रकम वापसी को उतनी ही गारंटी देनी पड़ती है। गृह मंत्रालय ने जटिलताओं को कम करने के लिए दो मॉड्यूल पूरे देश में लागू किए हैं। एमआरएम और जीआरएम। इनसे 50 हजार रुपये की तक की रकम बिना मुकदमे वापस मिल सकेगी।
डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने बताया कि एमआरएम का मतलब मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल है। अभी तक साइबर ठगी में पीड़ित को पहले एफआईआर लिखानी पड़ती थी। रकम रिलीज कराने के लिए कोर्ट से आदेश कराने पड़ते थे। 50 हजार से कम की साइबर ठगी में पीड़ित को अब किसी भी ऑफिस के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। बशर्ते घटना की शिकायत समय रहते 1930 पर दर्ज करा दी जाए। जिन खातों में रकम जाती है उन्हें शिकायत के बाद फ्रीज करा दिया जाता है। सूचना बैंक के पास भी जाती है। बैंक एक लिंक जनरेट करता है।
जो संबंधित जनपद की साइबर क्राइम पुलिस टीम को मिलता है। बैंक खाते में कितनी रकम बची है यह पता चल जाता है। जिसके साथ ठगी हुई होती है उससे संपर्क किया जाता है। वह कार्यालय आने में समर्थ होता है उससे एक बांड भरवाया जाता है। जिसे पुलिस द्वारा अपलोड कर दिया जाता है। एक सप्ताह में रकम पीड़ित को वापस मिल जाती है। इस मॉड्यूल से उन पीड़ितों को बहुत राहत मिली है जिनके साथ 50 हजार रुपये से कम की साइबर ठगी होती है। 50 हजार से अधिक की साइबर ठगी के लिए रकम वापसी की प्रक्रिया पुरानी वाली ही है।
जीआरएम मतलब ग्रेवांस रेड्रेसल मॉड्यूल है। जो लीन/ फ्रीज बैंक खाते और मोबाइल को चालू कराने से संबंधित है। 1930 पर शिकायत मिलते ही उन खातों को फ्रीज कर दिया जाता है जिसमें रकम ट्रांसफर होती है। बड़ी संख्या में ऐसी शिकायतें भी मिलती थीं सामने वाले पहले खुद गलत ट्रांजक्शन कर दिया उसके बाद साइबर फ्रॉड की शिकायत करके खाते फ्रीज करा दिए।
गलत ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के कारण भी परेशान
खुद गलत ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के कारण खाते फ्रीज होने से लोग लगातार परेशान हो रहे हैं। खाते दोबारा चालू कराने के लिए पीड़ित बैंक और पुलिस के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिल रही। बैंक अधिकारी कार्रवाई के लिए पुलिस के पास भेज देते हैं, जबकि पुलिस बैंक से संपर्क करने की सलाह देती है। इस खींचतान के चलते खाताधारकों के जरूरी लेनदेन प्रभावित हो रहे हैं। बैंक खाते फ्रीज होने से आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।
पीड़ितों को चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे
पुलिस ने शिकायत देखकर बताया कि खाता तो दूसरे प्रदेश से फ्रीज हुआ है। वहां जाना पड़ेगा। अब ऐसे मामलों में पीड़ितों को चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। डीसीपी सिटी ने बताया कि ऐसे मामलों में पीड़ितों को सिर्फ बैंक में शिकायत करनी है। बैंक जांच के बाद अपनी रिपोर्ट पुलिस को भेजती है। पुलिस, बैंक और पीड़ित ऑन लाइन आपस में जुड़ते हैं। जांच में साइबर ठगी के साक्ष्य नहीं मिलने पर पुलिस अपनी रिपोर्ट बैंक को प्रेषित कर देती है। खाता वापस चालू हो जाता है। इससे पीड़ितों को बहुत राहत मिली है।


