मगरमच्छ ने बोला हमला, फिर भी जबड़े से निकल आया ग्रामीण, लेकिन जिंदगी की जंग हार गया

लाइव हिन्दुस्तान, लखीमपुर खीरी
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लखीमपुर खीरी में खेत पर काम के दौरान एक ग्रामीण पर मगरमच्छ ने हमला बोल दिया। मगरमच्छ ने ग्रामीण को अपने जबड़े में दबाया और उसे पानी में ले जाने लगा लेकिन ग्रामीण मगरमच्छ के जबड़े से निकल आया। कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। 

मगरमच्छ ने बोला हमला, फिर भी जबड़े से निकल आया ग्रामीण, लेकिन जिंदगी की जंग हार गया

Lakhimpur Kheri News: यूपी के लखीमपुर खीरी में सुतिया नाले के किनारे बैठे ग्रामीण पर मगरमच्छ ने हमला बोल दिया। ग्रामीण जब तक कुछ समझ पाता इससे पहले ही मगरमच्छ ने उसे अपने जबड़े में दबा लिया। मगरमच्छ जब ग्रामीण खुशीराम को खींचकर ले जाने लगा तो भी उसने हिम्मत नहीं हारी। घाव होने के बाद भी वह मगरमच्छ से लड़ता रहा। खुशीराम की चीख-पुकार सुन आसपास मौजूद ग्रामीण पहुंच गए। उन्होंने लाठी-डंडों से और शोर मचाकर मगरमच्छ को खदेड़ दिया। मगरमच्छ खुशीराम को छोड़कर गहरे पानी में चला गया। वह मगरमच्छ के जबड़े से तो निकल आया, लेकिन उसके घावों की वजह से बच नहीं सका।

सुरजीपुरवा निवासी 46 वर्षीय खुशीराम गुरुवार को खेत में काम कर रहा था। वह थोड़ी दूर गदियाना गांव के पास सोतिया नाले के किनारे गया। नाले में मौजूद मगरमच्छ ने अचानक उस पर हमला कर उसके हाथ और पेट में दांत गड़ा दिए और उसे पानी के अंदर खींच ले गया। खुशीराम की चीख-पुकार सुन आसपास मौजूद ग्रामीण पहुंच गए। उन्होंने किसी तरह उसे बचाकर बाहर निकाला। खुशीराम के हाथ, पेट और पीठ गंभीर रूप से जख्मी होने से ग्रामीण उसे निघासन सीएचसी ले गए। वहां से भी उसे जिला अस्पताल भेज दिया गया। उसकी दौरान इलाज मौत हो गई। दुधवा बफर जोन की डीएफओ कीर्ति चौधरी ने बताया कि घटना की सूचना मिली है, लेकिन जिस जगह यह घटना बताई जा रही, वह वन क्षेत्र नहीं है।

युवक की मौत से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

मगरमच्छ के हमले में जान गंवाने वाले खुशीराम अपने परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। उनकी मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। खुशीराम मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनके परिवार में दो बेटे और दो बेटियां हैं। बेटा राजू और बेटी रामलली की शादी हो चुकी है, जबकि बेटा श्यामू और बेटी चांदनी अभी अविवाहित हैं। खुशीराम की पत्नी राम प्यारी का रो रोकर बुरा हाल है। घटना की सूचना मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। गांव में शोक का माहौल है। मझगई रेंज के डिप्टी रेंजर मनोज यादव ने बताया कि घटनास्थल बल्लीपुर गांव के दक्षिण स्थित सुतिया नाला के पास का है। यह क्षेत्र वन विभाग का क्षेत्र नहीं है। यह राजस्व भूमि में आता है। उन्होंने बताया कि नाले में कुंभी फैली हुई थी, जिसके नीचे मगरमच्छ छिपकर बैठा था। इसी दौरान खुशीराम वहां पहुंचे और मगरमच्छ ने उन्हें पकड़कर पानी की ओर खींच लिया।

Dinesh Rathour

लेखक के बारे में

Dinesh Rathour

दिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका (डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।

पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी है।

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