मणिकर्णिका पर बाढ़ में भी नहीं रुकेगा शवदाह; आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा काशी का महाश्मशान

Jan 19, 2026 11:02 am ISTYogesh Yadav लाइव हिन्दुस्तान
share Share
Follow Us on

वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर अभी व्यवस्थाएं बेहद खराब स्थिति में हैं। इससे दूर-दूर से आने वालों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जगह-जगह लकड़ियों का ढेर लगा हुआ है। विकास कार्य पूरा होने पर एक व्यवस्थित 'लकड़ी प्लाजा' बनेगा।

मणिकर्णिका पर बाढ़ में भी नहीं रुकेगा शवदाह; आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा काशी का महाश्मशान

वाराणसी के महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर हो रहे विकास कार्यों को लेकर इस समय यूपी की भाजपा सरकार और विपक्षी नेताओं में वार-पलटवार चल रहा है। यहां पर नवनिर्माण को लेकर हुई तोड़फोड़ ने सत्ता पक्ष और विपक्ष को आमने-सामने ला दिया है।पुनर्विकास के बाद मणिकर्णिका घाट का नजारा पूरी तरह बदल जाएगा। इसे गंगा के 'हाई फ्लड लेवल' (HFL) को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। गंगा में बाढ़ आने पर भी शवदाह स्थल जलमग्न नहीं होंगे, जिससे शोक संतप्त परिजनों को परेशानी नहीं होगी। लगभग 17.56 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस नए कॉरिडोर का उद्देश्य महाश्मशान को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना और इसकी सदियों पुरानी विरासत को सहेजना है।

पुनर्विकास के लिए किए जा रहे ध्वस्तीकरण को लेकर विपक्षी नेताओं ने इसे 'अंधाधुंध शहरीकरण' बताते हुए पुरानी मूर्तियों और गलियों के नष्ट होने पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कोई भी ऐतिहासिक मंदिर नष्ट नहीं किया जा रहा है, बल्कि उन्हें और अधिक भव्य और सुलभ बनाया जा रहा है।

मणिकर्णिका पर बाढ़ में भी नहीं रुकेगा शवदाह; आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा काशी का महाश्मशान

घाट पर अभी व्यवस्थाएं बेहद खराब स्थिति में हैं। इससे दूर-दूर से आने वालों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जगह-जगह लकड़ियों का ढेर लगा हुआ है। विकास कार्य पूरा होने पर एक व्यवस्थित 'लकड़ी प्लाजा' बनेगा। वहां अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी सुलभ होगी। इसके अलावा परिजनों के बैठने के लिए वेटिंग एरिया और छत पर सीटिंग की व्यवस्था होगी। कॉरिडोर के विकास के साथ-साथ चक्र पुष्करणी कुंड, रत्नेश्वर महादेव मंदिर, तारकेश्वर मंदिर और दत्तात्रेय पादुका जैसे प्राचीन धरोहर स्थलों का भी जीर्णोद्धार किया जाएगा।

मणिकर्णिका पर बाढ़ में भी नहीं रुकेगा शवदाह; आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा काशी का महाश्मशान

क्यों खास है यह प्रोजेक्ट?

मणिकर्णिका दुनिया का एकमात्र ऐसा श्मशान है, जहां 24 घंटे चिताएं जलती हैं। संकरी गलियों और गंदगी के कारण यहां आने वाले लोगों को काफी कठिनाई होती थी। नए प्रोजेक्ट से न केवल स्वच्छता बढ़ेगी, बल्कि सीढ़ीदार रास्तों और रैंप की सुविधा से बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए घाट तक पहुंचना आसान हो जाएगा।

मणिकर्णिका घाट की कई धार्मिक मान्यताएं

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काशी के सभी घाटों में मणिकर्णिका घाट को सबसे पवित्र और प्रधान माना गया है। इसे 'महाश्मशान' की संज्ञा दी गई है। मान्यता है कि यहां जिसकी अंत्येष्टि होती है, उसे पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति मिल जाती है और वह सीधे मोक्ष प्राप्त करता है। मणिकर्णिका दुनिया का इकलौता ऐसा स्थान है जहाँ चिता की अग्नि कभी शांत नहीं होती। इसे 'अविमुक्त क्षेत्र' कहा जाता है, जिसका अर्थ है वह स्थान जिसे भगवान शिव कभी नहीं छोड़ते। 24 घंटे चिताओं का जलना जीवन की नश्वरता और सत्य का प्रतीक माना जाता है।

मणिकर्णिका पर बाढ़ में भी नहीं रुकेगा शवदाह; आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा काशी का महाश्मशान

शक्तिपीठ और 'मणिकर्णिका' नाम का रहस्य

इस घाट का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है। मणि (जवाहरात) और कर्णिका (कान की बाली)। पौराणिक कथा के अनुसार माता सती के आत्मदाह के बाद जब भगवान शिव उनके पार्थिव शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे, तब यहां उनके कान के कुंडल (मणिकर्णिका) गिरे थे। इस कारण इसे सिद्ध शक्तिपीठों में भी गिना जाता है।

चक्र पुष्करणी कुंड

घाट के पास ही एक प्राचीन कुंड है जिसे 'चक्र पुष्करणी कुंड' कहा जाता है। माना जाता है कि सृष्टि की उत्पत्ति के समय भगवान विष्णु ने अपने चक्र से इस कुंड को खोदा था और यहां कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर जब शिव यहां आए तो उनके कान की मणि इसी कुंड में गिर गई थी।

Yogesh Yadav

लेखक के बारे में

Yogesh Yadav

योगेश यादव हिन्दुस्तान में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर हैं। 

और पढ़ें
लेटेस्ट Hindi News, बॉलीवुड न्यूज , बिजनेस न्यूज , क्रिकेट न्यूज पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करे| पाएं Lucknow news , Prayagraj News , Varanasi News , Gorakhpur News , Kanpur News , Aligarh News से जुड़ी ताजा खबरें हिंदी में |