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रेप पीड़िता का गर्भ गिराने की कोर्ट ने दी अनुमति, भ्रूण व महिला का डीएनए सुरक्षित रखने के आदेश

रेप पीड़िता का गर्भ गिराने की कोर्ट ने दी अनुमति, भ्रूण व महिला का डीएनए सुरक्षित रखने के आदेश

संक्षेप:

यूपी में मंगलवार को न्यायिक अवकाश के बाद भी मुरादाबाद में सीजेएम कोर्ट खुली। अधिवक्ता ने सीएमओ को पीड़िता का गर्भ गिराने के अलावा भ्रूण और महिला का डीएनए सुरक्षित रखने के आदेश दिए।

Wed, 22 Oct 2025 06:17 AMDeep Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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यूपी में मुरादाबाद की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दुष्कर्म पीड़िता का गर्भ गिराने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट के आदेश पर मंगलवार को अवकाश के बावजूद सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने अपनी शक्तियां सीजेएम कोर्ट को सौंपते हुए केस की तत्काल सुनवाई करने को कहा। अदालत ने गर्भ गिराने के साथ ही महिला और भ्रूण का डीएनए सुरक्षित रखने के आदेश पारित किए। पीड़िता अभी 22 सप्ताह की गर्भवती है। अदालत के आदेश पर सीएमओ के निर्देशन में गठित मेडिकल बोर्ड ने पीड़िता के स्वास्थ्य और उम्र आदि की जांच की और पिछले दिनों अदालत को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।

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मंगलवार को त्योहार के कारण न्यायिक अवकाश था, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश पर अवकाश में सीजेएम कोर्ट खुली और केस में सुनवाई हुई। मुरादाबाद में न्यायिक क्षेत्र में ऐतिहासिक मामला दुष्कर्म की शिकार पीड़िता से संबंधित है। युवती को शादी का झांसा देकर आरोपी ने उससे अवैध संबंध बनाए जब वह गर्भवती हुई तो शादी से इनकार कर दिया। इसके बाद पीड़िता ने न्याय के लिए पुलिस व अदालत से न्याय की गुहार लगाई। तहरीर पर आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया।

इस बीच पीड़िता ने अनचाहा गर्भ गिराने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। पीड़िता के अधिवक्ता अंकित टंडन, मो. शाहरुख व हाईकोर्ट में अधिवक्ता रियाज अहमद सिद्दीकी ने बताया कि युवती ने हाईकोर्ट से अपना गर्भ गिराने की अनुमति मांगी। इस पर न्यायमूर्ति ने केस में तत्काल सुनवाई करते हुए मेडिकल बोर्ड का गठन करने के आदेश दिए। अधिवक्ताओं का कहना है कि मेडिकल प्रीगेंसी टर्मिनेशन एक्ट 1971 में वर्ष 2021 में संशोधन हुआ है। न्यायालय के आदेश के तहत मुरादाबाद में 17 अक्तूबर को सीएमओ के निर्देशन में मेडिकल बोर्ड का पैनल गठित हुआ। महिला के स्वास्थ्य व उम्र और गर्भ को लेकर 19 अक्तूबर को मेडिकल रिपोर्ट अदालत को सौंपी गई।

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अधिवक्ता अंकित टंडन का कहना है कि 29 सितंबर को प्रार्थना पत्र के समय महिला का 18 हफ्ते 3 दिन का गर्भ था। एक्ट में संशोधन के तहत न्यायमूर्ति से पीड़िता का गर्भ गिराने की अनुमति मांगी गई। साथ ही केस में ट्रायल के लिए पीड़िता व भ्रूण का डीएनए सुरक्षित रखने की अपील की गई। माननीय न्यायमूर्ति ने मुरादाबाद की सीजेएम को शक्तियां निहित करते हुए केस की सुनवाई को कहा।

सीजेएम कोर्ट ने दिए जरूरी निर्देश

-मेडिकल बोर्ड पीड़िता का स्वास्थ्य संबंधी ख्याल रखेगा

-अस्पताल में बेहतर संसाधनों का इस्तेमाल कर गंदगी से बचाएं

-महिला की पूर्ण रूप से सुरक्षा का पालन

Deep Pandey

लेखक के बारे में

Deep Pandey
दीप नरायन पांडेय, डिजिटल और प्रिंट जर्नलिज्म में 13 साल से अधिक का अनुभव। यूपी के लखनऊ और वाराणसी समेत कई जिलों में पत्रकारिता कर चुके हैं। लंबे समय तक प्रिंट मीडिया में कार्यरत रहे। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में हैं। राजनीति के साथ क्राइम और अन्य बीटों पर काम करने का अनुभव। और पढ़ें
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