कानपुर में और तेज हुई शिलापट की रार, नसीम संग इरफान के नाम पर BJP नेताओं ने खड़े किए सवाल
टॉयलेट के शिलापट को लेकर बदलते घटनाक्रम में सोमवार को नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय के आदेश का आधा ही पालन हुआ। उन्होंने आदेश दिया था कि निर्धारित प्रारूप शिलापट ही लगाया जाए, बाकी हटा दिया जाए। इस पर पुराने वाले शिलापट को हटाया तो गया मगर दूसरे शिलापट को यूं ही रहने दिया गया।

UP News : कानपुर के रामबाग के टॉयलेट पर शिलापट को लेकर शुरू हुई सियासी रार सोमवार को और तेज हो गई। जहां भाजपाइयों ने भी सीसामऊ विधान सभा क्षेत्र में विधायक नसीम सोलंकी संग पूर्व विधायक इरफान सोलंकी के नाम वाले शिलापटों को वायरल कर दिया वहीं इरफान सोलंकी ने भी शासन द्वारा शिलापट के निर्धारित प्रारूप को जारी किया है। दूसरी ओर नगर निगम ने टॉयलेट पर चार जून को लगाए गए शिलापट को हटा दिया जिसमें नसीम सोलंकी का नाम नहीं था, सांसद और महापौर संग सुरेश अवस्थी का ही नाम दिया गया था। हालांकि बाद में लगे शिलापट को यथावत रखा गया है जिसमें नसीम सोलंकी भी हैं और भाजपा के सुरेश अवस्थी के साथ भानु प्रताप सिंह भी हैं।
पिछले 72 घंटे से टॉयलेट के शिलापट को लेकर बदलते घटनाक्रम में सोमवार को नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय के आदेश का आधा ही पालन हुआ। उन्होंने आदेश दिया था कि शासन द्वारा निर्धारित प्रारूप शिलापट ही लगाया जाए, बाकी हटा दिया जाए। इस पर एक और शिलापट लगा दिया गया था। अब पुराने वाले शिलापट को हटाया तो गया मगर दूसरे शिलापट को यूं ही रहने दिया गया जो प्रारूप में नहीं है। लिहाजा इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
आरोप-प्रत्यारोप
सोशल मीडिया पर भाजपा पार्षद आलोक पांडेय समेत भाजपाइयों ने लिखा है कि विधायक निधि से हुए कार्यों के शिलापट में सजायाफ्ता का नाम कैसे हो सकता है? हालांकि ‘लाइव हिन्दुस्तान’ वायरल किए गए फोटो समेत अन्य बातों की पुष्टि नहीं करता है। पूर्व विधायक इरफान सोलंकी ने शासन द्वारा निर्धारित जो प्रारूप जारी किया है उसमें मुख्यमंत्री, नगर विकास मंत्री, लोकसभा सदस्य, राज्यसभा सदस्य, क्षेत्रीय विधायक, क्षेत्रीय एमएलसी और वार्ड पार्षद का ही नाम शिलापट पर हो सकता है। उनका कहना है कि भाजपा नेता का नाम देने का जिक्र प्रारूप में नहीं है।
सुरेश अवस्थी बोले-मैं कांट्रैक्टर को जानता तक नहीं
वहीं सीसामऊ सीट से भाजपा के प्रत्याशी रहे भाजपा नेता सुरेश अवस्थी ने कहा कि इलाकाई पार्षद ने मेरा नाम अपना प्रेम दिखाते हुए डलवा दिया होगा। मैं कांट्रैक्टर को जानता तक नहीं। सजायाफ्ता का नाम जब शिलापट में हो सकता है तो मुझे हजारों लोगों ने वोट दिया है।
जिन्हें शासनादेश ही नहीं दिख रहा उनका इलाज शासन ही करा सकता है
पूर्व विधायक इरफान सोलंकी ने कहा कि मैने शिलापट को शासनादेश के खिलाफ लगवाने की बात उठाई थी। विधायक नसीम सोलंकी की निधि से हुए कामों में उनके साथ मेरा नाम लिखा है और मेरे नाम के आगे विधायक भी नहीं लिखा है। मेरे और नसीम के कार्यों के पत्थरों में मेरे पिता स्वर्गीय मुश्ताक सोलंकी का नाम और प्रस्तावकों का भी नाम होता है। ऐसा नहीं हो सकता है, इसका कोई शासनादेश तो नहीं है। जिन्हें शासनादेश ही नहीं दिख रहा हो, उनका इलाज तो शासन ही करा सकता है।
क्या बोले पार्षद
पार्षद आलोक पांडेय ने कहा कि विधायक निधि से हुए काम में विधायक के नाम के ऊपर अपना नाम लिखवाना क्या संविधान का उल्लंघन नहीं है। संविधान के तहत सजा होने पर तो इरफान सोलंकी की विधायकी गई थी।
लेखक के बारे में
Ajay Singhअजय कुमार सिंह पिछले आठ वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पूर्वांचल के बड़े हिस्से से खबरों का कोआर्डिनेशन देख रहे हैं। वह हिन्दुस्तान ग्रुप से 2010 से जुड़े हैं। पत्रकारिता में 27 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले अजय ने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। हिन्दुस्तान से पहले वह ईटीवी, इंडिया न्यूज और दैनिक जागरण के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। अजय राजनीति, क्राइम, सेहत, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ी खबरों को गहराई से कवर करते हैं। बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट अजय फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम की खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं।
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