बिहार से आया था ‘मौत का सामान’, यूपी में खपाने से पहले ही STF ने चौपट कर दिया प्लान, तीन गिरफ्तार

गोरखपुर, प्रमुख संवाददाता
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यूपी एसटीएफ और एम्स थाना पुलिस ने अंतरराज्यीय अवैध असलहा तस्करी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन तस्करों को शनिवार देर रात गिरफ्तार कर लिया। तीनों तस्कर बिहार से हथियार लाकर यूपी में ऊंचे दामों पर बेचते थे, लेकिन एसटीएफ ने उनका प्लान चौपट कर दिया।

बिहार से आया था ‘मौत का सामान’, यूपी में खपाने से पहले ही STF ने चौपट कर दिया प्लान, तीन गिरफ्तार

Gorakhpur News: बिहार से हथियारों को लाकर उन्हें यूपी में खपाने की तैयारी चल रही थी। तीन तस्कर बड़ी तादाद में हथियारों को लाकर यूपी में बेचते थे, लेकिन इस बार एसटीएफ ने उनकी प्लानिंग की चौपट कर दी। यूपी एसटीएफ और एम्स थाना पुलिस ने अंतरराज्यीय अवैध असलहा तस्करी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन तस्करों को शनिवार देर रात गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के कब्जे से टीम ने असलहे, नकदी और बिना वैध कागजात की बुलेट मोटरसाइकिल के अलावा मोबाइल फोन बरामद किए हैं। तीनों आरोपी बिहार के सिवान और गोपालगंज से हथियार खरीदकर गोरखपुर और आसपास के जिलों में ऊंचे दामों पर बेचते थे। रविवार को उन्हें जेल भेज दिया गया।

एसटीएफ को सूचना मिली थी कि बिहार से अवैध हथियार लेकर कुछ तस्कर गोरखपुर आने वाले हैं। एसटीएफ प्रभारी निरीक्षक सत्य प्रकाश सिंह के निर्देशन में टीम लगातार इनपुट जुटा रही थी। इसी बीच मुखबिर से सूचना मिली कि तीन तस्कर माड़ापार के कोनी तिराहे पर हथियारों की खेप लेकर मौजूद हैं। सूचना मिलते ही एसटीएफ के उपनिरीक्षक विनायक सिंह और एम्स थाना प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार अवस्थी ने संयुक्त टीम के साथ घेराबंदी कर तीनों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों की पहचान सचिन शर्मा पुत्र सुरेश शर्मा निवासी बरईपट्टी, थाना नौतन बाजार, जिला सिवान (हाल पता हरिसेवकपुर नंबर-2, थाना गुलरिहा), मंजीत कुमार सिंह पुत्र बृजकिशोर सिंह निवासी महुआ भूसा, थाना नौतन, जिला सिवान, बिहार और सौरभ शुक्ला उर्फ निति निवासी बसडीला, थाना चौरीचौरा के रूप में हुई है।

चार दिन पहले ही असलहा बेचने वाले तस्कर गए हैं जेल

पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे बिहार के सिवान और गोपालगंज के कुख्यात हथियार तस्करों अनुराग कुमार, मिक्की उर्फ गोलू कुमार और मंजीत सिंह से अवैध असलहे खरीदते थे। इसके बाद इन्हें गोरखपुर और आसपास के जिलों में अधिक कीमत पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाते थे। जांच में पता चला कि जिन तीन तस्करों के नाम आरोपियों ने बताए हैं, वे 24 जून 2026 को बिहार के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र में अवैध हथियार तस्करी के मामले में गिरफ्तार होकर जेल जा चुके हैं।

ऐसे चलता था हथियारों का नेटवर्क

बिहार के सिवान और गोपालगंज से अवैध हथियार खरीदे जाते थे। गोरखपुर लाकर ग्राहकों की तलाश की जाती थी। एक पिस्टल लगभग 25 हजार रुपये और एक देशी तमंचा 12 हजार रुपये तक में बेचा जाता था। मुनाफे की रकम से आरोपी ऐशो-आराम और शौक पूरे करते थे। एसटीएफ अब नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों और संभावित खरीदारों की तलाश में जुटी है।

यह बरामद हुआ

आरोपियों के पास से 0.32 बोर की एक पिस्टल, मैगजीन, 12 बोर के दो देशी तमंचे और 10 जिंदा कारतूस, 0.32 बोर के चार कारतूस, तीन मोबाइल फोन, नकदी और एक बुलेट मोटरसाइकिल बरामद की गई है।

Dinesh Rathour

लेखक के बारे में

Dinesh Rathour

दिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका (डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।

पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी है।

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