यूपी में बढ़ेंगी बिजली की दरें? नियामक आयोग करेगा सुनवाई; उपभोक्ताओं के पास 21 दिन का मौका
बिजली की नई दरें तय करने के लिए दाखिल एआरआर और उस पर आई आपत्तियों पर मार्च में सुनवाई होगी। नियामक आयोग ने निर्देश दिया है कि वे 3 दिनों के अंदर एआरआर समाचार पत्रों में प्रकाशित कराएं। उपभोक्ताओं को अपना पक्ष रखने, आपत्ति और सुझाव देने के लिए 21 दिन का समय दिया गया है।

क्या उत्तर प्रदेश में बिजली की दरें बढ़ेंगी? कंपनियां तो ऐसा ही चाहती हैं। बिजली दरों में लगभग 20 प्रतिशत इजाफे के लिए कंपनियों द्वारा दाखिल वार्षिक राजस्व आवश्यकता प्रस्ताव को सुनवाई के लिए नियामक आयोग ने शुक्रवार को सशर्त मंजूरी दे दी है। अब मार्च के महीने में बिजली की नई दरें तय करने के लिए दाखिल एआरआर और उसपर आई आपत्तियों पर सुनवाई होगी। बिजली कंपनियों ने 12,453 करोड़ रुपये का राजस्व अंतर दिखाया है। नियामक आयोग ने निर्देश दिया है कि वे तीन दिनों के भीतर एआरआर समाचार पत्रों में प्रकाशित कराएं। प्रस्तावित एआरआर पर उपभोक्ताओं और अन्य को अपना पक्ष, आपत्तियां और सुझाव दाखिल करने के लिए 21 दिन का समय दिया गया है।
स्मार्ट मीटर पर 38 अरब खर्च
स्मार्ट प्रीपेड मीटर संचालन के लिए 3,837 करोड़ खर्च बताया गया है। यह रकम भी बिजली दरों में समायोजित की मांग की गई है। बिजली कंपनियों ने एआरआर में यह रकम दाखिल कर दी है। विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने एआरआर के आंकड़ों को मनगढ़ंत बताया है।
बिना बिजली की दरें बढ़ाए ही 1400 करोड़ वसूले
उत्तर प्रदेश में बीते छह साल में बिजली दरें एक बार भी नहीं बढ़ीं। बावजूद इसके बीते 11 महीनों में उपभोक्ताओं से बिजली बिल के अतिरिक्त 1400 करोड़ रुपये वसूल लिए गए हैं। फरवरी के बिजली बिल में 10 प्रतिशत अतिरिक्त वसूली के आदेश से नियामक आयोग भी सकते में है और उसने पावर कॉरपोरेशन से इस गणना के सभी दस्तावेज तलब किए हैं। सूत्र बताते हैं कि कॉरपोरेशन का जवाब आने के बाद न केवल फरवरी की वसूली बल्कि अब तक हुई कुल वसूली की जांच हो सकती है।
12 फरवरी को दस सूत्री मांगों को लेकर प्रदर्शन करेंगे कर्मचारी
एक तरफ बिजली के दामों को लेकर कवायद चल रही है तो दूसरी तरफ यूपी में बिजली के निजीकरण का विरोध कर रहे कर्मचारियों ने दस सू्त्री मांगों को लेकर 12 फरवरी को प्रदेश भर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। उनका कहना है कि निजीकरण का फैसला वापस होने तक आंदोलन जारी रहेगा। कर्मचारियों की मांगों में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग शामिल है। बिजली कर्मचारी के इस प्रदर्शन में किसान संगठन और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
लेखक के बारे में
Ajay Singhअजय कुमार सिंह पिछले आठ वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पूर्वांचल के बड़े हिस्से से खबरों का कोआर्डिनेशन देख रहे हैं। वह हिन्दुस्तान ग्रुप से 2010 से जुड़े हैं। पत्रकारिता में 27 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले अजय ने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। हिन्दुस्तान से पहले वह ईटीवी, इंडिया न्यूज और दैनिक जागरण के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। अजय राजनीति, क्राइम, सेहत, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ी खबरों को गहराई से कवर करते हैं। बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट अजय फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम की खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं।
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