यूपी में बिजली की नई दरों की तैयारी में कंपनियां; जानें डिटेल
संक्षेप: इस साल की बिजली दरें अभी जारी नहीं हुई हैं। बिजली कंपनियां दरें जारी होने के बाद उन्हीं दरों के आधार पर अगले साल बिजली आपूर्ति पर संभावित खर्च और राजस्व संकलन का एक खाका तैयार करती है। आपूर्ति पर खर्च और राजस्व संकलन में अंतर के आधार पर दरों में वृद्धि या कमी का प्रस्ताव दिया जाता है।
UP Electricity Rates: उत्तर प्रदेश में बिजली कंपनियों ने अगले साल की बिजली दरों के लिए तैयारी शुरू कर दी है। कंपनियों को हर साल 30 नवंबर तक नियामक आयोग में वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) का प्रस्ताव दाखिल करना होता है। इसी प्रस्ताव पर नियामक आयोग के निर्देश पर आपत्तियां और सुझाव मांगे जाते हैं। इस पर सुनवाई के बाद नई दरें तय की जाती हैं।

इस साल की बिजली दरें अभी जारी नहीं हुई हैं। बिजली कंपनियां दरें जारी होने के बाद उन्हीं दरों के आधार पर अगले साल बिजली आपूर्ति पर संभावित खर्च और राजस्व संकलन का एक खाका तैयार करती है। आपूर्ति पर खर्च और राजस्व संकलन में अंतर के आधार पर दरों में बढ़ोतरी या कमी का प्रस्ताव दिया जाता है। हर साल बिजली कंपनियों को विलंबतम 30 नवंबर तक यह ब्योरा नियामक आयोग में दाखिल करना होता है, जिसके बाद आयोग उसका परीक्षण करके मंजूरी देता है। बीते पांच साल से उत्तर प्रदेश में बिजली की दरों में इजाफा नहीं हुआ है। इस साल की बिजली दरें अभी जारी नहीं हुई हैं।
प्रस्ताव के 120 दिनों में जारी करनी होती हैं दरें
वार्षिक राजस्व आवश्यकता स्वीकारने के 120 दिनों के भीतर नियामक आयोग को दरें जारी करनी होती हैं। इस साल यह मियाद सितंबर में ही बीत गई है, लेकिन अब तक दरें जारी नहीं हुई हैं। यह पहली मर्तबा है जब इस 120 दिन की मियाद का उल्लंघन हुआ है।
साल की दरें तय न होने से आगणन में दिक्कत
इस साल की बिजली दरें अभी तय नहीं हैं। इसकी वजह से अगले साल के अनुमानित खर्च और राजस्व वसूली के अंतर का आकलन करने में बिजली कंपनियों को दिक्कत आ रही है। अगर दरें तय होतीं तो उसी दर के अगले साल के अनुमानित खर्च और राजस्व संकलन का ब्योरा तैयार किया जाता।





