सीएम योगी ने विकास प्राधिकरणों को दिया आदेश, अब यूपी के घरों में जरूरी होगा ये इंतजाम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग (लघु सिंचाई) की बैठक में कहा कि यूपी में 100 वर्ग मीटर से बड़े सभी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की सुविधा अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए यह कदम निर्णायक होगा।
यूपी में घर का नक्शा पास कराने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था करनी ही होगी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने विकास प्राधिकरणों को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि हर घर में वर्षा जल के संचयन का इंतजाम जरूर हो। उन्होंने इसके पहले नमामि गंगे की बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वर्षा जल संचयन के लिए 100 वर्ग मीटर से बड़े सभी भवनों में इसे बनाने की अनिवार्यता की जाए। उन्होंने मेरठ, कानपुर और मथुरा-वृंदावन में 1833 करोड़ रुपये से विकास कराने के निर्देश दिए। इसके साथ ही विकास प्राधिकरणों को नगर निगम की तर्ज पर अपना बॉन्ड लाने का निर्देश दिया है।

मुख्यमंत्री ने शनिवार को को नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग (लघु सिंचाई) की बैठक में कहा कि प्रदेश में 100 वर्ग मीटर से बड़े सभी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की सुविधा अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए यह कदम निर्णायक साबित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 तक प्रदेश में 82 अतिदोहित और 47 क्रिटिकल क्षेत्र थे। वर्ष 2024 में यह घटकर 50 अतिदोहित और 45 क्रिटिकल क्षेत्र रह गए हैं, जो संतोषजनक है। इस दिशा में और तेजी लाकर आने वाले वर्षों में इन क्षेत्रों को पूरी तरह सामान्य श्रेणी में लाने का प्रयास होना चाहिए।
अधिकारी फाइलों तक सीमित न रहें
योगी ने कहा कि अवस्थापना और शहरी विकास कार्यों को नए स्तर पर ले जाया जाए। वरिष्ठ अधिकारी फाइलों तक सीमित न रहें, धरातल पर उतरकर परियोजनाओं की प्रगति देखें। मेरठ, कानपुर और मथुरा-वृंदावन के समग्र विकास के लिए 1833 करोड़ रुपये कि लागत से 38 परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इनमें मेरठ में 11, कानपुर में 13 और मथुरा वृंदावन में 14 शामिल हैं। निर्देश दिया कि हर प्रस्ताव को स्थानीय स्तर पर सर्वे और अध्ययन के बाद ही अंतिम रूप दिया जाए, ताकि योजनाएं जरूरतों के अनुरूप हों और जनता को वास्तविक लाभ मिल सके।
मानक बिना बसनें न दें
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि मलिन बस्तियों का कार्यकल्प जरूरी है। मूलभूत सुविधाओं का विस्तार किया जाए। उन्होंने यह भी कहा है कि बिना मानक और नगर निकायों की बिना अनुमति के विकसित होने वाली कालोनियों व बस्तियों पर रोक लगाया जाए।
मुख्यमंत्री ने शनिवार को नगर विकास विभाग की बैठक में कहा कि अलग-अलग विभागों द्वारा अलग-अलग काम करने से योजनाओं में अनावश्यक देरी होती है। इसलिए सभी विभाग मिलकर साझा कार्ययोजना बनाएं और समयबद्ध ढंग से क्रियान्वयन करें। मलिन बस्तियों में साफ-सफाई, पेयजल आपूर्ति, जल निकासी, सड़क कनेक्टिविटी और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं को सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जल निकासी व्यवस्था (ड्रेनेज सिस्टम) को और मजबूत करने की जरूरत है। प्रत्येक शहर में ऐसी नाली की व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे भारी बारिश के बाद जलभराव की समस्या उत्पन्न न हो। ड्रेनेज सिस्टम के सुधार और नई व्यवस्थाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जाए, ताकि नागरिकों को बरसात के समय किसी असुविधा का सामना न करना पड़े। मलिन बस्तियों में पेयजल आपूर्ति, जल निकासी, सड़क कनेक्टिविटी, कूड़ा कलेक्शन और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं को सुनिश्चित किया जाए।
सामुदायिक शौचालयों की साफ-सफाई हो
बैठक में कहा कि मलिन बस्तियों और सार्वजनिक स्थलों पर अधिक से अधिक सामुदायिक शौचलय बनाएं। सामुदायिक शौचालयों की नियमित साफ-सफाई हो। नगर निकायों से जुड़े नए गांवों में भी मूलभूत सुविधाएं जल्द सुनिश्चित की जाए, जिससे लोगों किसी परेशानी का सामना न करना पड़े। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि लापरवाही की स्थिति में जिम्मेदार अधिकारियों से जवाबदेही तय की जाएगी। स्मार्ट सिटी की योजनाओं को इस तरह तैयार किया जाए जिससे शहर का समग्र विकास हो और साथ ही राजस्व की भी वृद्धि सुनिश्चित हो।
चेकडैमों से सिंचाई क्षमता में बढ़ोतरी
उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न भागों में स्थानीय, बरसाती नदी व नालों में विभाग द्वारा 6,448 चेकडैमों का निर्माण किया जा चुका है। प्रत्येक चेकडैम से औसतन 20 हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचन क्षमता विकसित होती है। इस प्रकार निर्मित चेकडैमों से कुल 1,28,960 हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचन क्षमता सृजित हुई है। साथ ही हर साल 10 हजार हेक्टेयर मीटर से अधिक भूजल रिचार्ज हो रहा है। इन प्रयासों से अन्नदाता किसान वर्ष में दो से तीन फसल लेने में सक्षम हुए हैं।





