

तीन साल के बच्चे के खून में कोलेस्ट्रॉल इतना बढ़ गया कि उसकी जान पर बन आई। कोलेस्ट्रॉल का स्तर 854 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर तक पहुंच गया था। दवाओं से पर्याप्त फायदा नहीं होने पर लखनऊ पीजीआई के डॉक्टरों ने प्लाज्मा एक्सचेंज के जरिए खून से अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल निकालने का फैसला किया। बच्चे को 20 सप्ताह तक हर हफ्ते यह प्रक्रिया की गई। हर बार कोलेस्ट्रॉल के स्तर में औसतन करीब 70 फीसदी की कमी आई। इलाज के बाद बच्चे की हालत में सुधार हुआ और त्वचा पर जमा कोलेस्ट्रॉल भी कम हुआ।
बच्चा होमोजाइगस फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया (एचओएफएच) नाम की दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित था। इस बीमारी में शरीर खून से खराब कोलेस्ट्रॉल को ठीक से बाहर नहीं निकाल पाता। नतीजतन खून में कोलेस्ट्रॉल लगातार बढ़ता जाता है। इससे त्वचा और नसों में कोलेस्ट्रॉल जमा होने के साथ हृदय की धमनियों में रुकावट, हृदय के वाल्व में बीमारी और कम उम्र में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
मेडिकल जेनेटिक्स विभाग में जांच के बाद बच्चे में बीमारी की पहचान हुई। इसके बाद उसे ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग भेजा गया। बच्चे की कम उम्र को देखते हुए डॉक्टरों ने विशेष तरीके से प्लाज्मा एक्सचेंज की योजना बनाई।इस प्रक्रिया में मशीन की मदद से बच्चे के खून से कोलेस्ट्रॉल वाला प्लाज्मा अलग किया गया। उसकी जगह उपयुक्त द्रव दिया गया और बाकी रक्त बच्चे के शरीर में वापस पहुंचाया गया। इस तरह खून में जमा अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल को तेजी से कम करने में मदद मिली।
डॉक्टरों के मुताबिक बच्चे ने इलाज की सभी प्रक्रियाओं को अच्छी तरह सहन किया। कोई बड़ी जटिलता नहीं हुई। नियमित प्लाज्मा एक्सचेंज से कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होने के साथ त्वचा पर जमा कोलेस्ट्रॉल में भी कमी आई। परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए कुछ प्रक्रियाएं निःशुल्क भी की गईं। पीजीआई निदेशक डॉ. आरके धीमान ने इलाज करने वाली टीम को बधाई दी। इलाज करने वाली टीम में ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के डॉ. भरत सिंह, मेडिकल जेनेटिक्स विभाग की डॉ. अमिता मोइरांगथेम, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की प्रमुख डॉ. प्रीति एल्हेंस, डॉ. अनुपम वर्मा और डॉ. अजय जोसेफ शामिल रहे।
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