ब्रह्मज्ञान प्राप्त होने के बाद जीवन मानवता की सेवा, कल्याण और उत्थान का बन जाता माध्यम
Chitrakoot News - चित्रकूट में निरंकारी भवन में बाबा हरदेव सिंह की स्मृति में समर्पण दिवस का आयोजन किया गया। महात्मा पुष्पेन्द्र ने बताया कि बाबा का जीवन मानवता, सेवा और प्रेम भक्ति के लिए समर्पित था। उन्होंने सभी को प्रेरित किया कि मानव जीवन के हर क्षण को सार्थक बनाएं और प्रेम, करुणा, और मानवीय मूल्यों का पालन करें।
चित्रकूट, संवाददाता। निरंकारी भवन में बाबा हरदेव सिंह की स्मृति में समर्पण दिवस पर सत्संग का आयोजन हुआ। जिसमें मुख्यालय कर्वी के अलावा आसपास के गांवों से लोग शामिल हुए। बांदा से पधारे महात्मा पुष्पेन्द्र ने कहा कि बाबा हरदेव सिंह का संपूर्ण जीवन मानवता, सेवा और प्रेम भक्ति के प्रति समर्पित रहा।उन्होंने मिशन से जुड़े लोगों को प्रेरित किया कि मानव जीवन का प्रत्येक क्षण सार्थक बने और हर पल इंसानियत, करुणा एवं मानवीय मूल्यों का प्रमाण प्रस्तुत करे। बाबा हरदेव ने सदैव यही शिक्षा दी कि प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर मानवीय गुण विकसित कर निराकार का आसरा लेते हुए सार्थक एवं उद्देश्यपूर्ण जीवन जिए।
कहा कि अगर किसी के जीवन में दुख, पीड़ा या संघर्ष है, तो हमारा कर्तव्य उसे बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रेम, संवेदनशीलता और सहयोग से उसे शांत करना है। जीवन ऐसा हो जो रिश्तों में प्रेम एवं समर्पण की भावना को सुदृढ़ करे। यही शिक्षाओं का सार और सच्ची मानवता का स्वरूप है। ब्रह्मज्ञान प्राप्त होने के बाद जीवन केवल व्यक्तिगत सीमाओं तक नहीं रहता, बल्कि समस्त मानवता की सेवा, कल्याण और उत्थान का माध्यम बन जाता है। सच्ची सेवा दिखावे से परे प्रेम, विनम्रता और निस्वार्थता से परिपूर्ण होती है। वास्तविक भक्ति शब्दों से आगे बढ़कर व्यवहार, विचार और कर्मों में झलकती है। सत्संग के साथ मौजूद लोगों ने लंगर में प्रसाद ग्रहण किया।
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