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भरत शब्द बोलने से पाप-प्रपंच का होता नाश: मोरारी बापू

हिन्दुस्तान टीम,चित्रकूटPublished By: Newswrap
Mon, 31 May 2021 04:20 AM
भरत शब्द बोलने से पाप-प्रपंच का होता नाश: मोरारी बापू

चित्रकूट। संवाददाता

दीनदयाल शोध संस्थान में आयोजित रामकथा के दूसरे दिन मानस मर्मज्ञ संत मोरारी बापू ने लोगों से आग्रह किया कि वह अपने जीवन में भगवान के आचरण के विभिन्न रूपों को व्यवहार में लाएं। क्योंकि इष्टदेव के चरित्र का अनुकरण एवं अनुसरण करना ही वास्तविक भक्ति है। आप चाहे योग करे, चाहे ध्यान करें, वैराग्य लें या फिर कोई अन्य कार्य करें, लेकिन यदि भावपूर्ण तुलसी की कथा का पाठ करें तो आपको यह सभी मिल जाएंगे।

राम कथा के दूसरे दिन बापू ने रामनाम धुन व संगीतमय चौपाइयों के साथ कथा शुरू करते हुए कहा कि इस नौ दिवसीय रामकथा का विषय चित्रकूट के अनुसार 'मानस भरत चरित्र' का होना चाहिए। गुरु कृपा, संतों के आशीर्वाद से जो कुछ अन्त:करण की प्रवृत्ति बनी। उसके मुताबिक श्री भरत जी को चित्त में रखकर उनके जीवन का दर्शन करें। अपने जीवन में भगवान के आचरण के विभिन्न रूपों को व्यवहार में लाएं। क्योंकि इष्टदेव के चरित्र का अनुकरण करना ही वास्तविक भक्ति है। कोरोना के इस दौर में सबको सावधान रहना जरुरी है। मास्क सभी लोग नियमित पहनें। भरत शब्द बोलने से पाप-प्रपंच का नाश होता है। जिसका अन्त:करण, निरन्तर भजन में रत रहता है। उसमें भरत जी का स्वभाव होता है। वेद की महिमा अतुलनीय है। लेकिन मानस के बिना रामकथा भी अधूरी है। बापू ने कहा कि देश में महाभारत को पंचम वेद कहा जाता है। लेकिन उनकी दृष्टि से रामचरित मानस पंचम वेद है।

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