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चित्रकूट

संसाधनों के अभाव में ज्यादातर बच्चे ई-पाठशाला से वंचित

हिन्दुस्तान टीम,चित्रकूटPublished By: Newswrap
Thu, 17 Jun 2021 05:51 AM
चित्रकूट। संवाददाता
 पहली जुलाई से स्कूल तो खुल रहे पर सिर्फ शिक्षक-शिक्षिकाओं की स्कूलों...
1 / 2चित्रकूट। संवाददाता पहली जुलाई से स्कूल तो खुल रहे पर सिर्फ शिक्षक-शिक्षिकाओं की स्कूलों...
चित्रकूट। संवाददाता
 पहली जुलाई से स्कूल तो खुल रहे पर सिर्फ शिक्षक-शिक्षिकाओं की स्कूलों...
2 / 2चित्रकूट। संवाददाता पहली जुलाई से स्कूल तो खुल रहे पर सिर्फ शिक्षक-शिक्षिकाओं की स्कूलों...

चित्रकूट। संवाददाता

पहली जुलाई से स्कूल तो खुल रहे पर सिर्फ शिक्षक-शिक्षिकाओं की स्कूलों उपस्थिति रहेगी। बच्चों को ई-पाठशाला के जरिए पढ़ाया जाएगा। बच्चों की पढ़ाई को लेकर अभिभावक चिंतित हैं। संसाधनों की कमी के चलते चिंता और बढ़ रही है। अभिभावकों का कहना है कि ई-पाठशाला के भरोसे बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पाती है। बच्चे इसमें समझ भी नहीं पाते हैं। इससे पढ़ाई की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है।

कोरोनाकाल में पिछले एक वर्ष से सर्वाधिक शिक्षण कार्य बाधित हो रहा है। बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ गया है। किसी तरह सत्र के आखिरी दौर में कुछ दिन स्कूल खुले, लेकिन दूसरी लहर की शुरुआत होने से फिर बंद हो गए। बिना परीक्षाओं के ही बच्चों को प्रमोट करना पड़ा। अब दूसरी लहर लगभग खत्म हो चुकी है। हालांकि अभी तीसरी लहर आने की संभावना जताई है। फिर भी कोरोना संक्रमण थमने के बाद अब आगामी एक जुलाई से परिषदीय स्कूल खुलने जा रहे हैं। लेकिन स्कूलों में बच्चों को नहीं बुलाया जाना है। केवल शिक्षकों की ही उपस्थिति रहेगी। खास बात यह है कि एक बार फिर से ई-पाठशाला के जरिए बच्चों को पढ़ाया जाना है। ई-पाठशाला से होने वाली पढ़ाई को लेकर अभिभावक काफी चिंतित नजर आ रहे हैं। क्योंकि ग्रामीण अंचलों में नेटवर्क के साथ ही संसाधनों की कमी से उनको जूझना पड़ रहा है।

बच्चों के भविष्य के साथ हो रहा खिलवाड़: ई-पाठशाला से होने वाली पढ़ाई सफल नहीं हो पा रही है। कारण कि इसका संचालन भी ठीक तरीके से नहीं होता। ग्रामीण अंचलों में केवल खानापूरी ही होती है। बच्चे ई-पाठशाला के जरिए सही तरीके से पढ़ नहीं पाते हैं। उनको ज्यादातर चीजें समझ में नहीं आती हैं। क्योंकि स्कूल व ई-पाठशाला की पढ़ाई में बहुत ही फर्क है।

कर्वी की संध्या सिंह का कहना है कि ई-पाठशाला से बच्चों की सही पढ़ाई नहीं हो पाती है। गरीब घरों के बच्चों के घरों में एंड्रायड फोन उपलब्ध नहीं है। जिससे वह वंचित रहते हैं। नेटवर्क की समस्या से भी पढ़ाई बाधित होती है। सुमन गुप्ता का कहना है कि कोरोनाकाल में बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा है। स्कूलों में पढ़ाई बाधित होने से बच्चे घरों में ज्यादातर समय खेलकूद में निकाल देते हैं। कुछ देर के लिए पढ़ाई के नाम पर सिर्फ खानापूरी करते हैं।

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