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चित्रकूट

धर्मनगरी के भागीरथ ने सूखी मंदाकिनी में पहुंचाई जलधारा

हिन्दुस्तान टीम,चित्रकूटPublished By: Newswrap
Fri, 28 May 2021 05:50 PM

धर्मनगरी के भागीरथ ने सूखी मंदाकिनी में पहुंचाई जलधारा

चित्रकूट। संवाददाता

हर साल गर्मी में निचले इलाके की तरफ सूखी मंदाकिनी में इस बार जलधारा नजर आने लगी है। बीते मार्च मंदाकिनी सूखने लगी थी। लेकिन जिले के एक समाजसेवी ने ग्रामीणों के मदद से बंधोइन में मंदाकिनी के रोके गए पानी को खोल दिया और बांध के कई गेट खोलने के बाद जलधारा को कनकोटा तक यमुना नदी से मिलाने का काम किया। जहां-जहां जलधारा रुकी, वहां ग्रामीणों की मदद से सफाई कराई गई। अब नदी में पानी देख ग्रामीण अवाक हैं और तट पर आकर नदी की पूजा में भी जुट गए।

मंदाकिनी की जलधारा सूखने से नदी किनारे बसे गांवों के हैंडपंप जवाब दे जाते हैं। कुंओं का पानी भी गर्मी के दिनों में सूख जाता है। सबसे अधिक मवेशियों के लिए संकट होता है। ऐसे में लोहदा गांव के युवा समाजसेवी आशीष सिंह रघुवंशी धर्मनगरी में भागीरथ बने। उन्होंने अपनी टीम के साथ नदी में जलधारा शुरू कराने के लिए ढाई माह पूर्व बंधोइन चेकडैम के 20 पाटे खोल दिए। इससे मंदाकिनी की जलधारा कल-कल करती हुई दर्जनों गांवों से होकर कनकोटा यमुना नदी के संगम में समाहित हो गई। 7 मार्च को आशीष ने टीम के साथ बंधोइन आकर चेकडैम के पाटे खोले थे। इसके बाद नदी की जलधारा में जहां भी रुकावट आई, वहां ग्रामीणों की मदद से खुदाई कर जलधारा को आगे बढ़ाया। दर्जनों गांवों का सफर तय करते हुए जलधारा 81 दिनो में कनकोटा स्थित यमुना में जाकर मिली।

बंधोइन में रोका जाता मंदाकिनी का पानी:

धर्मनगरी से सटे एमपी के अनुसूइया आश्रम के घनघोर जंगलों से मंदाकिनी का उद्गम माना जाता है। नदी में प्रदूषण की वजह से काफी स्रोत बंद हो गए। जिससे गर्मी के दिनों में मंदाकिनी सूखने लगती है।मंदाकिनी के पानी को रामघाट व कर्वी मुख्यालय से करीब पांच किमी दूर बंधोइन में बने डैम पर रोका जाता है। कर्वी में मंदाकिनी से जलापूर्ति होती है और बंधोइन के पास किसान सिंचाई के लिए नदी के पानी का इस्तेमाल करते हैं।

इन गांवो तक पहुंची नदी जलधारा: मुख्यालय कर्वी के आगे बंधोइन में बने चेकडैम पर पानी रोके जाने के बाद गर्मी के दिनों में मंदाकिनी की जलधारा कई वर्ष से सूख रही है। इस वर्ष भी यही हाल रहा है। जिससे निचले इलाके में नदी किनारे के गांवों परसौंजा, कहेटा, चौरा, देवल, अगरहुंडा, नहरा, कलवारा खुर्द, भानपुर, सिंघौली, ब्योहरा, अरछा बरेठी, लोहदा, सगवारा, महुवा गांव, सरधुवा से कनकोटा तक लोगों को दिक्कतें होती है। समाजसेवी के प्रयास से इस बार इन गांवों तक नदी का पानी पहुंच गया है।

समाजसेवी का टीम ने निभाया साथ

निचले इलाके में सूखी मंदाकिनी नदी में जलधारा लाने के भागीरथी प्रयास में समाजसेवी का टीम के साथियों ने पूरा साथ निभाया है। उनके साथ टीम में राजीव सिंह, गिरिवर सिंह, रामलखन पांडेय, गौरव ठाकुर, कंचन सिंह, धीरा सिंह, रिशभ गौर, शैलेश रघुवंशी, नानबाबू निषाद, प्रभाष वर्मा, ज्ञानचंद्र रैकवार, चंदन रैकवार, सौरभ सिंह, राजेन्द्र सिंह, रणविजय सिंह, रोशन सिंह, अशोक सिंह, शिशिर प्रताप सिंह, सरजो यादव आदि शामिल रहे।

पाटे खोलने का नहीं हुआ विरोध:

बंधोइन में मंदाकिनी नदी की जलधारा रोकने के लिए जिस चेकडैम का निर्माण कराया गया है। उससे कई गांवों सिंचाई होती है। रबी की फसल कटने के बाद किसी को सिंचाई के लिए फिलहाल पानी की जरूरत भी नहीं रही। जिसके चलते चेकडैम से पाटे खोलने का विरोध किसी ने नहीं किया, इस बात को खुद समाजसेवी मान रहे है। उनका कहना है कि सिंचाई के दौर में पाटे खोलने पर लोग विरोध भी कर सकते थे।

81 दिनों में 40 किमी का पूरा किया सफर:मंदाकिनी की जलधारा बीते सात मार्च को बंधोइन चेकडैम से खोली गई। ऐसे में दर्जनो गांवों को पार करते हुए यह जलधारा शुक्रवार 28 मई को कनकोटा गांव के पास यमुना नदी में समाहित हुई। इस तरह से 81 दिनों में नदी की जलधारा ने दर्जनों गांवों को पार करते हुए लगभग 40 किमी का सफर तय किया।

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