लखनऊ के इस इलाके में छह एकड़ की जमीन पर बनेगा नया भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय: सीएम योगी

Dec 18, 2025 05:34 pm ISTDinesh Rathour लाइव हिन्दुस्तान, लखनऊ
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सीएम योगी ने कहा, नवीन भवन के लिए विश्वविद्यालय और पर्यटन व संस्कृति विभाग यह सुनिश्चित करें कि जो भी बने वह वैश्विक मानक का होना चाहिए। जिसमें आधुनिक और सामग्र सुविधा परिसर में ही उपलब्ध हो।

लखनऊ के इस इलाके में छह एकड़ की जमीन पर बनेगा नया भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय: सीएम योगी

भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष समारोह के शुभारंभ कार्यक्रम में सीएम योगी ने कहा, भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय ने पीढ़ी दर पीढ़ी भारत की सांस्कृतिक चेतना को, उसके स्वर, लय और संस्कारों को एक नई पहचान दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय अब नए कलेवर में नजर आएगा। 1926 में भातखंडे संगीत का छोटा केंद्र था। तब की आवश्यकताओं के लिए सुविधाएं पर्याप्त थी। आज के लिए या बहुत कम है। उन्होंने कहा की इसलिए सरकार ने लखनऊ के ककराबाद में लगभग छह एकड़ भूमि इस विश्वविद्यालय को प्रदान की है। जहां विश्वविद्यालय के नवीन भवन की स्थापना की जाएगी। उन्होंने कहा कि नवीन भवन के लिए विश्वविद्यालय और पर्यटन व संस्कृति विभाग यह सुनिश्चित करें कि जो भी बने वह वैश्विक मानक का होना चाहिए। जिसमें आधुनिक और सामग्र सुविधा परिसर में ही उपलब्ध हो। जहां शिक्षा, शोध, साधना और सांस्कृतिक प्रस्तुति के लिए कार्य होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नवीन भवन में दो ऑडिटोरियम होने चाहिए। एक छोटा 200 से ढाई सौ की क्षमता का और एक बड़ा हजार-1200 से लेकर 1500 की क्षमता का ऑडिटोरियम बनाया जाए। उन्होंने कहा की यहां एक ओपन थिएटर और अच्छी लाइब्रेरी की स्थापना भी होनी चाहिए।

गुरुदेव रबिंद्रनाथ टैगोर की चिट्ठी का उल्लेख

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 1940 में गुरुदेव रबिंद्रनाथ टैगोर ने एक पत्र जारी कर इस संस्थान को विश्वविद्यालय के रूप में संबोधित किया था। उन्होंने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि पंडित विष्णु नारायण भातखण्डे की भावनाओं के अनुरूप इस संस्थान को विश्वविद्यालय का स्वरूप प्रदान किया जा सका। उन्होंने कहा कि वर्ष 1947 में देश आज़ाद हुआ और वर्ष 1950 में संविधान लागू हुआ। इसके बाद वर्ष 2017 तक अनेक सरकारें आईं और गईं, लेकिन तत्कालीन राज्यपाल राम नाइक ने भातखण्डे संस्थान को विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने के विषय में उनसे संवाद किया। मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि प्रस्ताव आने में देर हुई, विभाग से निरंतर संवाद हुआ और अंततः वर्ष 2022 में सरकार ने इसे विश्वविद्यालय के रूप में मान्यता दी। यह उत्तर प्रदेश का पहला संस्कृति विश्वविद्यालय है। उन्होंने कुलपति प्रो. माण्डवी सिंह की सराहना करते हुए कहा कि उनके द्वारा विश्वविद्यालय का कुलगीत और लोगो ‘नादाधीनं जगत्’ थीम पर आधारित किया गया, जिसका अर्थ है-पूरा जगत नाद के अधीन है। यह जीवन की सच्चाई को दर्शाता है।

ओंकार है सृष्टि का पहला स्वर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस सृष्टि का पहला स्वर ओंकार है। उन्होंने नाद योग का उल्लेख करते हुए कहा कि विज्ञान, अध्यात्म और संस्कृति तीनों ही इसकी पुष्टि करते हैं। भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय का विजन भी यही है कि नाद के अधीन पूरा जगत है। उन्होंने कहा कि संगीत की विभिन्न विधाओं के माध्यम से इसी नाद की पहचान करना साधना का विषय है। विश्वविद्यालय से जुड़े पूर्व कलाकारों को सम्मानित किए जाने पर उन्होंने कहा कि ये कलाकार न केवल भातखण्डे की परंपरा, बल्कि उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक मूल्यों को भी वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित कर रहे हैं। कॉफी टेबल बुक के विमोचन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आने वाले समय में यह पुस्तक प्रेरणा का कार्य करेगी। देश की आज़ादी के शताब्दी महोत्सव के साथ जब विश्वविद्यालय जुड़ रहा होगा, तब यह कॉफी टेबल बुक अत्यंत प्रासंगिक सिद्ध होगी।

पंडित विष्णु नारायण भातखण्डे के योगदान को किया याद

मुख्यमंत्री योगी ने पंडित विष्णु नारायण भातखण्डे के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि वर्ष 1926 में देश औपनिवेशिक शासन के अधीन था। उस समय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सीमित थी और संगीत तथा कला के लिए मंच उपलब्ध नहीं थे। उन्होंने कहा कि उस दौर में पंडित भातखण्डे ने भारतीय संगीत को वैज्ञानिक आधार प्रदान किया। शास्त्रीय अनुशासन, सुव्यवस्थित पाठ्यक्रम, राग-ताल का वर्गीकरण, क्रमिक पद्धति और गुरु-शिष्य परंपरा को आधुनिक शिक्षा से जोड़ना उनका ऐतिहासिक योगदान था। यह कार्य केवल शैक्षणिक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति को आत्मसम्मान, आत्मगौरव और स्थायित्व देने का प्रयास था।

कुम्भ 2019 और महाकुम्भ 2025 का उल्लेख

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा और मार्गदर्शन में देश में अपनी विरासत को पुनः खोजने का कार्य आरंभ हुआ है। इससे भारत को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिल रही है। उन्होंने वर्ष 2019 के कुम्भ और वर्ष 2025 में आयोजित महाकुम्भ का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ लोगों का मानना था कि आज का युवा अपनी संस्कृति से विमुख हो रहा है। औपनिवेशिक काल में इस प्रकार की धारणा को जानबूझकर बढ़ाया गया। लेकिन महाकुम्भ 2025 में 66.30 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस मिथक को तोड़ दिया। इनमें सर्वाधिक संख्या युवाओं की थी। न केवल भारत, बल्कि विश्व के हर कोने से लोग इस आयोजन से जुड़े। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सही प्लेटफॉर्म मिलने पर संस्कृति स्वतः आगे बढ़ती है।

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दिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका (डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।

पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी है।

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