सस्ती बिजली के लिए कानून में बदलाव का प्रस्ताव, 15 लाख से ज्यादा लोगों को होगा फायदा
यूपी में सस्ती बिजली के लिए कानून में बदलाव का प्रस्ताव नियामक आयोग में दाखिल किया गया है। इससे 15 लाख से ज्यादा लोगों को फायदा हो सकेगा। जुलाई में 47 लाख उपभोक्ताओं का बिजली भार बिना अनुमति बढ़ाने से यह उपभोक्ता रियायती दरों वाले दायरे से बाहर हो गए हैं।

उत्तर प्रदेशम में 15 लाख से ज्यादा बिजली उपभोक्ताओं को राहत के लिए कदम आगे बढ़ा दिया गया है। बिना सहमति के राज्य के 47 लाख उपभोक्ताओं का बिजली भार बढ़ाए जाने के आदेश को नियामक आयोग में चुनौती दी गई है। साथ ही गरीब उपभोक्ताओं को रियायती बिजली के दायरे में बनाए रखने के लिए कानून में बदलाव का प्रस्ताव भी दाखिल किया गया है। 47 लाख में से लगभग 15 लाख उपभोक्ता बिजली भार बढ़ने की वजह से रियायती बिजली के दायरे से बाहर हो गए हैं।
प्रदेश में एक किलोवॉट बिजली भार के साथ महीने में 100 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं को रियायती दर (तीन रुपये प्रति यूनिट) पर बिजली मिलती है। इस दर पर इन्हें बिजली उपलब्ध करवाने के लिए सरकार पावर कॉरपोरेशन को सब्सिडी देती है। जुलाई में जब पावर कॉरपारेशन ने 47 लाख उपभोक्ताओं का बिजली भार बढ़ा दिया तो उसकी जद में रियायती बिजली का लाभ पाने वाले लगभग 15 लाख उपभोक्ता भी आ गए। इन्हें रियायती बिजली के लाभ के दायरे में बनाए रखने के लिए सोमवार को राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने सोमवार को लोकमहत्व प्रस्ताव दाखिल किया।
सप्लाई कोड में बदलाव की मांग
आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह को सौंपे गए प्रस्ताव में विद्युत आपूर्ति संहिता (सप्लाई कोड) में बदलाव की मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि एक किलोवॉट यानी न्यूनत बिजली भार लेने वाले गरीब उपभोक्ताओं का वास्तविक भार किसी विशेष अवसर जैसे- शादी-विवाह, पारिवारिक समारोह या अन्य सामाजिक कार्यक्रम के दौरान 100 से 500 वॉट तक अस्थाई रूप से साल भर में तीन या इससे ज्यादा बार बढ़ने पर भी उनका स्थाई भार न बढ़ाया जाए। स्थाई बिजली भार बढ़ाते ही ये रियायती बिजली के दायरे से बाहर हो जाते हैं।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि इन उपभोक्ताओं को रियायती दर के दायरे से बाहर नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि जिस महीने वे तय लोड बढ़ जाता है, उस महीने वे दोगुना जुर्माना देते हैं। ऐसे में इन्हें रियायती बिजली के दायरे से बाहर करना अन्यायपूर्ण है। लिहाजा आपूर्ति संहिता में बदलाव किया जाए।
भाजपा के घोषणा पत्र का हिस्सा थी रियायती बिजली
अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि गरीब उपभोक्ताओं को रियायती बिजली का वादा भाजपा ने घोषणा पत्र में किया था। उसी वादे के तहत यह रियायती बिजली मिल रही है। लिहाजा उपभोक्ताओं को इस दायरे से बाहर नहीं किया जाना चाहिए।
खपत घटने के बाद भी लोड बढ़ा, जांच हो
एक अन्य लोकमहत्व प्रस्ताव में उपभोक्ता परिषद ने गरीब उपभोक्ताओं की कुल बिजली खपत घटने के बावजूद लोड बढ़ने के मामले की जांच करवाने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में 1 करोड़ 69 लाख 99 हजार 611 गरीब उपभोक्ताओं का कुल बिजली खर्च 13,260 मिलियन यूनिट था। यानी सालाना औसतन 780 यूनिट प्रति उपभोक्ता।
वहीं, वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 में इन उपभोक्ताओं की संख्या बढ़कर 1 करोड़ 78 लाख 91 हजार 784 हो गई, लेकिन कुल बिजली बिक्री घटकर 7,586.74 मिलियन यूनिट रह गई। यानी प्रति उपभोक्ता औसत वार्षिक खपत केवल 424 यूनिट रह गई। जब खपत घटी है तो लाखों गरीब उपभोक्ताओं का स्वीकृत विद्युत भार बढ़ाने का कोई तकनीकी या तार्किक आधार नहीं बनता। गरीब उपभोक्ताओं को रियायती बिजली मिलने के दायरे से बाहर करने की संभावना जताते हुए इन आंकड़ों के स्वतंत्र जांच की मांग आयोग से की गई है।
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Yogesh Yadavयोगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।
पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।


