पुलिस की लापरवाही! ACP ऑफिस से थाने भेजी गई चार्जशीट 8 साल से गायब, पीड़ित ने मांगा 25 लाख का मुआवजा
कानपुर एसीपी कार्यालय और महाराजपुर थाने के बीच से एक चार्जशीट गायब हो गई। आठ साल से गायब चार्जशीट को रिकंस्ट्रक्ट करने के बजाय पुलिस उसे तलाशने में लगी है। पीड़ित पुलिस और कोर्ट दोनों से आरटीआई में जवाब मांग चुका है।

UP News: यूपी के कानपुर में इसे लापरवाही नहीं तो और क्या कहेंगे। एसीपी कार्यालय और महाराजपुर थाने के बीच से एक चार्जशीट गायब हो गई। आठ साल से गायब चार्जशीट को रिकंस्ट्रक्ट (पुनर्गठन) करने के बजाय पुलिस उसे तलाशने में लगी है। पीड़ित पुलिस और कोर्ट दोनों से आरटीआई में जवाब मांग चुका है। कोर्ट ने तो नियमों का हवाला देकर जानकारी देने से इनकार कर दिया लेकिन मामला तब और हास्यास्पद हो गया जब पुलिस ने आरटीआई में जवाब दिया कि चार्जशीट कोर्ट में दाखिल हो चुकी है।
महाराजपुर थाने में साल 2016 को मुकेश माहेश्वरी ने धोखाधड़ी और अमानत में खयानत का मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में एसआई शीलेंद्र यादव फिर एक-एक कर सात एसआई ने विवेचना की। विवेचना पूरी होने के बाद अनुमति के लिए चार्जशीट एसीपी कार्यालय भेजी गई। वहां से 22 जनवरी 2018 को चार्जशीट एसीपी कार्यालय से थाने गई ताकि कोर्ट में दाखिल की जा सके। एसीपी कार्यालय और थाने के बीच यह चार्जशीट गायब हो गई। वादी मुकेश बताते हैं कि कोविड काल के दौरान उन्होंने ध्यान नहीं दिया।
इधर, वह सक्रिय हुए और महाराजपुर थाने के चक्कर लगाए तो पता चला कि चार्जशीट लगा दी गई। कोर्ट में चेक किया तो वहां चार्जशीट नहीं मिली। उन्होंने कोर्ट और पुलिस दोनों से आरटीआई के जरिये जानकारी मांगी। कोर्ट ने सूचना देने से इंकार कर दिया जबकि महाराजपुर थाने के पुरवामीर चौकी इंचार्ज इम्तियाज अहमद की ओर से दिए गए जवाब में कहा गया कि चार्जशीट 22 जनवरी 2018 को दाखिल कर दी गई है। मुकेश बताते हैं कि पिछल आठ साल से चार्जशीट गायब है । हालांकि कोर्ट से उनके पास फाइल रीकंस्ट्रक्ट नोटिस पहुंचा है।
इन लोगों ने की विवेचना
मामले में एसआई शीलेंद्र यादव, एसआई शिवशंकर यादव, एसआई सुधीर यादव, एसआई मुकेश सोलंकी, एसआई अजीत कुमार पांडेय, एसआई योगेंद्र सिंह सोलंकी और विनोद कुमार ने जांच की।
मांगा 25 लाख का मुआवजा
मुकेश ने बताया कि पिछले आठ साल से पता नहीं चल रहा कि चार्जशीट कहां है। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पोर्टल समेत हर जगह शिकायत की। अब उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर 25 लाख का मुआवजा मांगा है। इसमें राज्य सरकार के साथ ही कमिश्नरेट पुलिस को भी पक्षकार बनाया है।
यह था पूरा मामला
महाराजपुर थाने में दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक महाराजपुर सिकठिया के जोगेंद्र सिंह, उनके भाई और महेंद्र कुमार तिवारी ने 5.40 लाख रुपये में एक जमीन का सौदा किया। उन्होंने एग्रीमेंट कर 2.60 लाख रुपये दे दिए। आरोप है कि एग्रीमेंट के बाद भी जमीन दूसरे को बेच दी।
एसीपी चकेरी की जांच के बाद हुआ खुलासा
मुकेश ने इस मामले में पुलिस आयुक्त से शिकायत की तो जांच एसीपी चकेरी को सौंपी गई। तत्कालीन एसीपी चकेरी अभिषेक पांडेय ने 5 सितंबर 2025 को अपनी जांच पूरी की। एसीपी की जांच रिपोर्ट के मुताबिक जोगेंद्र सिंह और महेंद्र कुमार तिवारी के खिलाफ 22 जनवरी 2018 को चार्जशीट तैयार कर एसीपी कार्यालय भेजी गई थी। पर्यवेक्षण के बाद एसीपी कार्यालय से 30 मई 2018 को चार्जशीट कोर्ट में दाखिल करने के लिए महाराजपुर थाने भेजी गई। जांच में सामने आया कि चार्जशीट कोर्ट कब भेजी गई, थाने के अभिलेखों में इसका जिक्र नहीं मिला। इसके बाद चार्जशीट के गायब होने का खुलासा हुआ।
लेखक के बारे में
Pawan Kumar Sharmaपवन कुमार शर्मा पिछले चार वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हैं। डिजिटल मीडिया में काम करते हुए वह उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम, सरकारी योजनाओं और टूरिज्म से जुड़े मुद्दों पर नियमित रूप से लिखते हैं। इससे पहले पवन एबीपी न्यूज के साथ बतौर फ्रीलांसर काम कर चुके हैं। पवन ने नई दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इससे पहले क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। ग्राउंड रिपोर्टिंग और अकादमिक समझ के साथ पवन तथ्यात्मक, संतुलित और पाठक-केंद्रित समाचार लेखन करते हैं।
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