चंद्र ग्रहण: अयोध्या का श्रीराम मंदिर सुबह से शाम तक, काशी विश्वनाथ केवल पौने तीन घंटे बंद रहेगा
3 मार्च 2026 को लगने वाले चंद्र ग्रहण के कारण उत्तर प्रदेश के मंदिरों के समय में बड़ा बदलाव किया गया है। अयोध्या में राम मंदिर सुबह 9 बजे से रात 8:30 बजे तक बंद रहेगा, जबकि काशी विश्वनाथ मंदिर केवल शाम 4:30 से 7:15 बजे तक ही बंद रहेगा।

Chandra Grahan: फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा के पावन अवसर पर मंगलवार, 3 मार्च को लगने जा रहे चंद्र ग्रहण का गहरा प्रभाव उत्तर प्रदेश के प्रमुख देवालयों की पूजा पद्धति और दर्शन समय पर पड़ने वाला है। खगोलीय घटना के चलते सूतक काल की मान्यताओं का पालन करते हुए अयोध्या में प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर जहां लगभग पूरे दिन बंद रहेगा, वहीं महादेव की नगरी काशी में बाबा विश्वनाथ के पट केवल पौने तीन घंटे के लिए बंद किए जाएंगे। ग्रहण के चलते दोनों ही प्रमुख धार्मिक शहरों में श्रद्धालुओं के लिए विशेष समय सारिणी और दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
अयोध्या: रामलला के मंदिर में सुबह 9 से रात 8:30 तक प्रवेश बंद
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने खगोलीय गणनाओं के आधार पर स्पष्ट किया है कि 3 मार्च को राम मंदिर के पट सुबह 9:00 बजे से रात 8:30 बजे तक आम श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह बंद रहेंगे। हालांकि, भक्तों की आस्था को ध्यान में रखते हुए सुबह 4:00 बजे होने वाली मंगला आरती और सुबह 6:30 बजे की श्रृंगार आरती के दर्शन सुलभ कराए जाएंगे। ग्रहण के मोक्ष (समाप्ति) के बाद रात 8:30 बजे शुद्धिकरण के उपरांत पट दोबारा खुलेंगे और 9:30 बजे होने वाली शयन आरती के दर्शन भी श्रद्धालु कर सकेंगे।
ट्रस्ट के न्यासी डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि ग्रहण के दौरान मंदिर परिसर बंद रहने के कारण उस दिन के लिए सुगम और विशिष्ट दर्शन के पास जारी नहीं किए जा रहे हैं। वर्तमान में श्रद्धालुओं को 3 मार्च के रेफरल पास जारी करने पर भी रोक लगा दी गई है ताकि मंदिर परिसर में भीड़ अनियंत्रित न हो। केवल आरती पास धारकों को ही निर्धारित स्लॉट में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।
काशी विश्वनाथ: शाम 4:30 से 7:15 तक ही रहेगा प्रतिबंध
वाराणसी में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर और मां अन्नपूर्णा मंदिर की धार्मिक परंपराएं अन्य मंदिरों से अलग हैं। नगर के अन्य देवालय जहां सूतक काल लगते ही दोपहर में ही बंद हो जाएंगे, वहीं बाबा विश्वनाथ के पट ग्रहण के दौरान चंद्रमा के उदय काल से करीब डेढ़ घंटे पहले यानी शाम 4:30 बजे बंद किए जाएंगे। 3 मार्च को ग्रहण का स्पर्श दोपहर 3:20 बजे और मोक्ष शाम 6:47 बजे होगा। मोक्ष के बाद विग्रहों के विशेष स्नान, शुद्धिकरण और पूजन-अर्चन के उपरांत रात 7:15 बजे मंदिर के पट दोबारा आम भक्तों के लिए खोल दिए जाएंगे।
वाराणसी के अन्य प्रमुख मंदिरों का समय
विश्वनाथ मंदिर के उलट संकटमोचन मंदिर, विशालाक्षी मंदिर, बड़ी शीतला माता मंदिर, दुर्गाकुंड और बीएचयू स्थित बिड़ला विश्वनाथ मंदिर जैसे अन्य प्रमुख देवालय ग्रहण का स्पर्श काल (दोपहर 3:20) शुरू होने से पहले ही बंद कर दिए जाएंगे। इन मंदिरों में सूतक काल की शास्त्रीय मान्यताओं का कड़ाई से पालन किया जाएगा और ग्रहण समाप्ति के बाद गंगा स्नान व मंदिर की शुद्धि के उपरांत ही दर्शन बहाल होंगे।
लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव हिन्दुस्तान में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर हैं।
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