रमजान के आखिरी अशरे में तलाशी जाती है शबे कद्र
Chandauli News - चंदौली, संवाददाता मुकद्दस रमजान माह के आखिरी अशरे के 10 दिनों में शब-ए-कद्र

चंदौली, संवाददाता मुकद्दस रमजान माह के आखिरी अशरे के 10 दिनों में शब-ए-कद्र की रात आती है। इसे लैलतुल कद्र भी कहा जाता है। यह रात हजार रातों से अफजल है। इस रात में फरिश्ते जमीन पर उतरते हैं। फरिश्ते रोजेदारों के दुओं पर आमीन फरमाते हैं। इस रात में रोजेदारों को इबादत करने का सवाब एक हजार साल के बराबर मिलता है। इसमें रोजेदार की हर दुआ कबूल होती है। इस रात को पांच ताक रातों में तलाशा जा सकता है। यह बातें मुफ्ती रिजवान साहब ने हदीस के हवाले से कही। उन्होंने कहा कि शबे कद्र की यह पाक रात रमजान के आखिरी अशरे में तलाशी जाती है।
इसे 21, 23, 25, 27 और 29 रमजान की रात में तलाश जा सकता है। इस रात में जिब्राइल अलैहि सलाम के जरिए कुरान शरीफ नाजिल हुई थीं। इस रात की इबादत का सवाब एक साल की इबादत के बराबर मिलता है। इस रात की कुछ खास निशानियां बतायी गई है। यह रात न ज्यादा ठंड होती है और न ही ज्यादा गर्मी, बल्कि मौसम खुशनुमा रहता है। रहमत की बारिश होने की संभावना भी होती है। इस दिन सूरज की रोशनी तेज नहीं होती और न ही आंखों में चुभती है। बल्कि धूप भी सुकून देने वाली महसूस होती है। कहा कि रमजान की तमाम रातों में यह सबसे सलामती वाली रात मानी जाती है। इस रात रोजेदारों को गुनाहों से तौबा कर अल्लाह की इबादत, जिक्र, दुआ और कुरआन की तिलावत में व्यस्त रहना चाहिए। साथ ही अपने और बुजुर्गों एवं माता-पिता के गुनाहों की माफी भी मांगनी चाहिए।
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