Chandauli News: उपनाईं गंगा,चेतावनी बिंदु से सिर्फ 90 सेमी नीचे
Chandauli News: धानापुर में गंगा का जलस्तर अचानक बढ़ने लगा है, जिससे तटीय किसानों में चिंता बढ़ गई है। यदि जलस्तर इसी गति से बढ़ता रहा, तो क्षेत्र में बाढ़ आने की संभावना है। किसान इससे अपनी धान की फसल के बर्बाद होने की आशंका जता रहे हैं। तटीय गांवों में कटान भी तेज हो गया है।

Chandauli News: धानापुर, हिन्दुस्तान संवाद। दो दिन पहले स्थिर हुईं गंगा अचानक बीते शनिवार की शाम से दोबारा बढ़ने लगीं। रविवार को गंगा का जलस्तर तीव्र गति से बढ़ रहा है। यह देख तटीय इलाके में बाढ़ के संभावित खतरे की सोचकर दहशत बढ़ गई है। तटीय किसानों के माथे पर इस बात की चिंता भी स्पष्ट दिखने लगी है कि अभी तक सिंचाई के अभाव में परती रह गए जिन खेतों की हाल फिलहाल में वे लोग किसी तरह रोपाई किये हैं। वह फसल भी बाढ़ आने पर पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगी। रविवार को गंगा का जलस्तर दो से ढाई सेमी प्रति घंटे के हिसाब से बढ़ रहा है।
यही स्थिति रही तो सच में गंगा किनारा छोड़ देंगीऔर अब यदि डेढ़ से दो मीटर पानी और बढ़ा तो तटीय इलाकों में बाढ़ का आना तय है। सहेपुर के किसान हृदयनारायण सिंह, रामपुर दीयां के गंगा यादव प्रसहटा के महेंद्र यादव, हिंगुतर के मुराहू चौहान बुद्धपुर के गोविंद उपाध्याय, लल्लू उपाध्याय आदि किसानों का कहना है कि गंगा का पानी बहुत तेज गति से बढ़ रहा है। सोमवार तक बीच गंगा में जमा बालू का बड़ा रेता भी डूब सकता है। वहीं सहेपुर से नौघरां के बीच बड़े पैमाने पर किसानों का खेत गंगा की गोंद में समा गया। गंगा का यह रौद्र रूप देखकर तटीय क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों के माथे पर चिंता की लकीरें स्पष्ट दिखने लगी हैं। नौघरां गांव के किसान बाके उपाध्याय, नरौली के रामधनी यादव, सुमंत, धानापुर के शशिकांत दूबे आदि अन्य का कहना है कि सावन माह में जब कभी भी गंगा का पानी बढ़ा है तो भादो माह के प्रारंभ में बाढ़ अवश्य आई है। अबकी बार भी जलस्तर के बढ़ाव को देखकर लोगों को बाढ़ की यही आशंका परेशान कर रही है। कारण यह कि सावन की बाढ़ किसानों की अनगिनत उम्मीदों को तार तार कर जाता है। तटीय इलाके के किसानों की बडी परेशानी यह है कि यदि इस वक्त गंगा में बाढ़ आई तो उनकी धान की समूची खेती पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगी। उधर गंगा में उफान के साथ ही पानी के तेज बहाव से तटवर्ती इलाके में उपजाऊ भूमि का कटना भी तेज हो गया है। वैसे तो सहेपुर, रामपुर दीयां, प्रसहटा, हिंगुतरगढ़, बुद्धपुर, नौघरां, रायपुर, नरौली, महमदपुर, मिश्रपुरा, अमादपुर, मेढवा, नगवां, सोनहुली, कवलपुरा, पपरौल, प्रहलादपुर, गुरैनी, जिगना, बीरासराय, बयानपुर, अवहीं, महुंजी आदि अन्य तटवर्ती गांव पिछले चार पांच दशक से गंगा कटान का भयानक दंश झेल रहे हैं। वहीं नौघरां, नरौली, कवलपुरा, छोटकी सोनहुली, जिगना, गुरैनी, प्रहलादपुर, महुजी आदि आधा दर्जन गांव अपने अस्तित्व का संकट झेल रहे हैं। लोगों को अफशोस इस बात का है कि बरसात और बाढ़ आने पर अचानक सक्रियता दिखाने वाले कथित और संवेदनहीन सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अफसर भी सही वक्त पर किसानों की मदद करने को कभी नहीं दिखते हैं।24 घंटे में ढाई से तीन फुट बढ़ गई गंगा की जलस्तर : चहनियां। गंगा का जलस्तर फिर से तेजी से बढ़ने लगा है। इस बार पिछली बार की अपेक्षा जलस्तर में वृद्धि की रफ्तार अधिक है। बलुआ घाट की सभी सीढ़ियां पुनः डूब गई हैं, जिससे तटवर्ती गांवों में कटान और विषैले जीवों को लेकर चिंता बढ़ गई है। पिछले एक सप्ताह से जलस्तर घटने के बाद बलुआ घाट पर दोनों महिला चेंज रूम दिखने लगे थे, लेकिन विगत दो दिनों में जलस्तर में फिर से तेज बढ़ोतरी हुई है। जो जलस्तर पिछली बार एक महीने में घाट की सीढ़ियों को डुबोया था, वही इस बार नेपाल में ग्लेशियर पिघलने और भारी बारिश के कारण महज दो दिनों में बढ़ गया। पानी अब टीन शेड में बने यात्री विश्रामालय की ओर बढ़ रहा है। जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती गांव कावर, महुआरिया, बिसुपुर, महुआरी खास, सराय, बलुआ, डेरवा, महुआर कला, हरधन जुड़ा, विजयी का पूरा, गणेश पूरा, टांडा, बड़गांवा, तिरगांवा, हसनपुर, नादी-निधौरा आदि गांवों के किसानों की पहले ही उपजाऊ जमीन गंगा में समाहित हो चुकी है। फिर से जलस्तर बढ़ने से कटान तेज होने और गांवों में पानी घुसने की आशंका से ग्रामीण चिंतित हैं।


