मां के कदमों में जन्नत है और बाप जन्नत की सीढ़ी: अली अहमद
Chandauli News - चंदौली, संवाददाता। मां के कदमों में जन्नत है और बाप जन्नत की सीढ़ी है।

चंदौली, संवाददाता। मां के कदमों में जन्नत है और बाप जन्नत की सीढ़ी है। जिसने अपने मां-बाप को राजी कर लिया। उसकी दुनियां में हर मुश्किल आसान हो जाएगी। साथ ही उसका आखिरत में भी बेड़ा पार हो जाएगा। जो इंसान अपने मां-बाप का दिल दुखाया। उसकी आखिरत भी बिगड़ जाएगी और दुनियां में भी हर जगह उसको असफलता हाथ लगेगी। यह बातें माह-ए-रमजान के दूसरे अशरे में सोमवार को मुख्यालय स्थित मदरसे में हदीस बयान करते हुए कारी अली अहमद ने कही। उन्होंने हदीस के हवाले से रमजान माह की फजीलत भी बयान किया। उन्होंने कहा कि मां-बाप को जो शख्स राजी कर लिया।
उससे अल्लाह राजी हो जाता है। इससे अपनी मां-बाप की नाफरमानी कभी नहीं करनी चाहिए। मां-बाप की नाफरमानी करने वाले हमेशा परेशानहाल रहते हैं। इसलिए मां-बाप की हमेशा सेवा करनी चाहिए। उनसे ऊंची आवाज में बात नहीं करनी चाहिए। उनका कहना मानना चाहिए। कहा कि अपने मां-बाप की सेवा नहीं करने वाले और उनसे तेज आवाज में बात करने, उनका कहना नहीं मानने वाले सख्स की रोजा और दुआएं दोनों ही कबूल नहीं होती है। जिनके सिर पर मां-बाप की दुआएं होती हैं। उसको कामयाबी भी मिल जाती है। उन्होंने कहा कि हदीस में आता है कि अपने रिश्तेदारों से बेहतर रिश्ता रखना चाहिए। उनसे कभी भी झगड़ा नहीं करना चाहिए। क्योंकि रिश्तेदारों से बेहतर सुलूक नहीं रखने और झगड़ा करने वालों की रोजे की कबुलियत नहीं होती है। इसलिए उनसे हमेशा अच्छा व्यवहार करना चाहिए।
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