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भगवान के चतुर्भुज स्वरूप का करें स्मरण : जीयर स्वामी

भगवान के चतुर्भुज स्वरूप का करें स्मरण : जीयर स्वामी

कैलावर यज्ञ स्थल पर चतुर्मासा महायज्ञ के 39वें दिन लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी महाराज ने कहा कि धन, संपदा, पद व प्रतिष्ठा सबकुछ यही रह जाती है। व्यक्ति का अच्छा कर्म ही स्मरण रहता है। व्यक्ति को अपने जीवन में सामाजिक कार्य व गरीबों की सेवा करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पत्नी बहुत स्नेह करने वाली द्वार तक रोते रोते लौट जाएगी। बंधु जन श्मशान तक जाएंगे। बेटा है जिसके लिए आपने अनीति, अन्याय, कुकर्म किया है। वह मुखाग्नि देने के बाद साथ छोड़ देगा। वह भी कामना यही करेगा कि जल्दी दाह संस्कार हो जाए। कोई साथ नहीं जाता है। भगवान के चतुर्भुज रूप का ही ध्यान करना चाहिए। भगवान के जिस स्वरूप में प्रेम हो, उसी स्वरूप का ध्यान करना चाहिए। कहा कि शुकदेवजी ने परिक्षित को बताया कि भगवान के अनंत अवतार है। सभी अवतार का दर्शन कर सकते हो, लेकिन भगवान के चतुर्भुज रूप का ध्यान करना चाहिए। अलग-अलग रूपों में माया व मोह हो सकता है, लेकिन चतुर्भुज रूप में भ्रम समाप्त हो जाता है। भगवान के चरण से लेकर मुख मंडल तक ध्यान करना चाहिए। भगवान के चरण से शुरू करते हुए पूरे स्वरूप का ध्यान करना चाहिए।

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  • Web Title:Remember the quadrilateral form of God Jiyr Swamy