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सरकार की गलत नीतियों से भुखमरी के कगार हैं शिल्पकार

हिन्दुस्तान टीम,चंदौलीNewswrap
Mon, 01 Nov 2021 03:04 AM
सरकार की गलत नीतियों से भुखमरी के कगार हैं शिल्पकार

चंदौली। संवाददाता

आल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा की ओर से रविवार को मुख्यालय स्थित एक लान में विश्वकर्मा शिल्पकार रोजी-रोटी संरक्षण सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसका शुभारम्भ मुख्य अतिथि राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने किया। वहीं समाज के उत्थान के संबंध में चर्चा की गई।

कहा कि प्राकृतिक संसाधनों और कच्चे माल पर निर्भर परंपरागत शिल्पकार कोरोना महामारी के चलते बर्बादी और भुखमरी के कगार पर है। सरकार की गलत नीतियों और पूंजीवादी व्यवस्था को संरक्षण देने के कारण बेरोजगारी की मार सबसे ज्यादा परंपरागत कामगार श्रमिकों और दस्तकारों पर पड़ा है। भारत में आर्थिक विकास की रीढ़ कुटीर उद्योग धंधे पूरी तरह से बर्बाद हो रहे हैं। इससे परंपरागत हुनरमंद कारीगरों और शिल्प कला के सामने अस्तित्व का गंभीर संकट खड़ा है। आर्थिक मंदी के चलते पूंजी का अभाव कच्चे माल की अनुपलब्धता एवं विक्रय बाजार न होने के चलते देश के लाखों परंपरागत शिल्पी भुखमरी के कगार पर हैं। शिल्पकार और श्रमिकों के लिए सरकार की ओर से संचालित योजनाएं भ्रष्टाचार की शिकार हो गई हैं। सरकार सिर्फ घोषणाओं तक ही सिमट कर रह गई है। अनेक योजनाएं पूरी तरह से गायब हो चुकी है। भीषण महंगाई के दौर में आज भी भारतीय शिल्पकार की न्यूनतम आय फैक्ट्री कामगार से भी कम है। परंपरागत हस्तशिल्प और हुनरमंद कारीगरी को बचाने के लिए सरकारी योजनाओं को भ्रष्टाचार से मुक्त धरातल पर पात्रता धारण करने वाले लोगों के बीच तक लाना होगा। उन्होंने हस्तशिल्प पहचान पत्र धारक परंपरागत शिल्पकारों को कंपाउंड दर पर बिजली, ऋण की सुविधा एवं फैक्ट्री कारीगरों की भांति न्यूनतम आय की गारंटी के साथ ही बेरोजगारी भत्ता देने की मांग की। सम्मेलन में हस्तशिल्प कार्ड का वितरण भी किया गया। इस मौके पर दीनदयाल विश्वकर्मा, कालिका, नीरज, दिनेश, कैलाश, अवधेश, संजय, महेंद्र, भैरव, सुरेश, मृत्युंजय, नंदलाल, चंद्रशेखर, सुरेश, अरविंद, राम किशन, विजय आदि उपस्थित रहे। अध्यक्षता जिलाध्यक्ष श्रीकांत विश्वकर्मा एवं संचालन राजेश विश्वकर्मा कवि ने किया।

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